पीओके में हिंसा से 27 लोगों की मौत, चुनाव से पहले बढ़ा तनाव

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आरक्षित सीटों को लेकर आंदोलन कर रहे संगठन पर प्रतिबंध के बाद भड़की हिंसा, पुलिसकर्मियों समेत कई लोगों की जान गई

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता और जन असंतोष खुलकर सामने आया है। क्षेत्र के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 27 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पड़े। शुरुआती जानकारी के मुताबिक मृतकों में चार पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जारी है, जबकि प्रदर्शनकारी सरकार पर दमनात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि यह विवाद विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर शुरू हुआ था, जो अब बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) लंबे समय से इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रही है। संगठन का आरोप है कि इन सीटों की वजह से स्थानीय लोगों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है और सत्ता कुछ चुनिंदा समूहों तक सीमित रह जाती है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो विभिन्न युद्धों और संघर्षों के दौरान जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच टकराव लगातार बढ़ता गया और आखिरकार हालात हिंसा तक पहुंच गए।

तनाव उस समय और बढ़ गया जब पीओके सरकार ने 5 जून को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत JAAC पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को इसका कारण बताया। प्रतिबंध लगने के बाद पुलिस ने संगठन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और कई समर्थकों को हिरासत में लिया गया। इसके विरोध में विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन शुरू हो गए। हालात तब ज्यादा बिगड़ गए जब संगठन के एक सदस्य की कथित पुलिस फायरिंग में मौत होने की खबर सामने आई। इस घटना के बाद समर्थक बड़ी संख्या में अस्पताल के शवगृह के बाहर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे।

रविवार को रावलकोट में स्थिति अचानक नियंत्रण से बाहर हो गई। प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस और JAAC समर्थकों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला हिंसक हो गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। प्रशासन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों पर हथियारों से हमला किया, जबकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बल प्रयोग कर हालात को और बिगाड़ दिया। इस दौरान गोलीबारी और पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं। अधिकारियों के अनुसार कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं, वहीं बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आई हैं।

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक अब तक 30 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सुरक्षा एजेंसियां हिंसा फैलाने वालों की पहचान करने में जुटी हैं। प्रशासन का कहना है कि किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं विपक्षी और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि सरकार राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए कठोर कदम उठा रही है। इस बीच सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव दिखाई दे रहा है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

आगामी विधानसभा चुनाव भी इस पूरे विवाद की एक बड़ी वजह हैं। पीओके में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने हैं और चुनाव से पहले बढ़ता तनाव सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। यहां विधानसभा की कुल 53 सीटें हैं, जिनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है। बाकी सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। ऐसे समय में आरक्षित सीटों का मुद्दा चुनावी राजनीति के केंद्र में आ गया है।

पिछले कुछ वर्षों में पीओके की राजनीति लगातार अस्थिर रही है। सरकारों में बदलाव, नेतृत्व संकट और राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष ने प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित किया है। 2021 के चुनावों के बाद बनी सरकार भी कई उतार-चढ़ाव से गुजरी। कई प्रधानमंत्रियों को बीच कार्यकाल में पद छोड़ना पड़ा और राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते रहे। ऐसे माहौल में जनता के बीच असंतोष बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।

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09 Jun 2026 By Vaishnavi.J

पीओके में हिंसा से 27 लोगों की मौत, चुनाव से पहले बढ़ा तनाव

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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता और जन असंतोष खुलकर सामने आया है। क्षेत्र के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 27 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पड़े। शुरुआती जानकारी के मुताबिक मृतकों में चार पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जारी है, जबकि प्रदर्शनकारी सरकार पर दमनात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि यह विवाद विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर शुरू हुआ था, जो अब बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) लंबे समय से इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रही है। संगठन का आरोप है कि इन सीटों की वजह से स्थानीय लोगों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है और सत्ता कुछ चुनिंदा समूहों तक सीमित रह जाती है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो विभिन्न युद्धों और संघर्षों के दौरान जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच टकराव लगातार बढ़ता गया और आखिरकार हालात हिंसा तक पहुंच गए।

तनाव उस समय और बढ़ गया जब पीओके सरकार ने 5 जून को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत JAAC पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को इसका कारण बताया। प्रतिबंध लगने के बाद पुलिस ने संगठन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और कई समर्थकों को हिरासत में लिया गया। इसके विरोध में विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन शुरू हो गए। हालात तब ज्यादा बिगड़ गए जब संगठन के एक सदस्य की कथित पुलिस फायरिंग में मौत होने की खबर सामने आई। इस घटना के बाद समर्थक बड़ी संख्या में अस्पताल के शवगृह के बाहर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे।

रविवार को रावलकोट में स्थिति अचानक नियंत्रण से बाहर हो गई। प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस और JAAC समर्थकों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला हिंसक हो गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। प्रशासन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों पर हथियारों से हमला किया, जबकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बल प्रयोग कर हालात को और बिगाड़ दिया। इस दौरान गोलीबारी और पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं। अधिकारियों के अनुसार कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं, वहीं बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आई हैं।

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक अब तक 30 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सुरक्षा एजेंसियां हिंसा फैलाने वालों की पहचान करने में जुटी हैं। प्रशासन का कहना है कि किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं विपक्षी और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि सरकार राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए कठोर कदम उठा रही है। इस बीच सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव दिखाई दे रहा है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

आगामी विधानसभा चुनाव भी इस पूरे विवाद की एक बड़ी वजह हैं। पीओके में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने हैं और चुनाव से पहले बढ़ता तनाव सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। यहां विधानसभा की कुल 53 सीटें हैं, जिनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है। बाकी सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। ऐसे समय में आरक्षित सीटों का मुद्दा चुनावी राजनीति के केंद्र में आ गया है।

पिछले कुछ वर्षों में पीओके की राजनीति लगातार अस्थिर रही है। सरकारों में बदलाव, नेतृत्व संकट और राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष ने प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित किया है। 2021 के चुनावों के बाद बनी सरकार भी कई उतार-चढ़ाव से गुजरी। कई प्रधानमंत्रियों को बीच कार्यकाल में पद छोड़ना पड़ा और राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते रहे। ऐसे माहौल में जनता के बीच असंतोष बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/27-people-died-due-to-violence-in-pok-tension-increased/article-55412

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