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ट्रम्प का ग्रीनलैंड पर बयान: अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चाहिए आर्कटिक रणनीतिक स्थल
अंतराष्ट्रीय न्यूज
डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अमेरिकी दावों को खारिज किया, रूस-चीन गतिविधियों का हवाला देते हुए ट्रम्प ने जताई चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की आवश्यकता दोहराई, जिससे डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं में नाराज़गी बढ़ गई। ट्रम्प ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्कटिक क्षेत्र में रूस व चीन की मौजूदगी को देखते हुए ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
ट्रम्प ने एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत में यह बयान दिया। उन्होंने इसे पहले भी द अटलांटिक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में व्यक्त किया था। ट्रम्प का कहना था कि आर्कटिक में चीन और रूस की बढ़ती गतिविधियों से निपटने के लिए अमेरिका को ग्रीनलैंड पर प्रभाव बढ़ाने की जरूरत है।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेत्ते फ्रेडरिक्सेन ने तुरंत ट्रम्प के बयान को “बेतुका” करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका का ग्रीनलैंड पर कब्जा करने का कोई अधिकार नहीं है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने भी इस टिप्पणी को अपमानजनक बताया और कहा कि उनका देश बिकाऊ नहीं है।
क्यों विवाद बढ़ा
विवाद तब और गहरा गया जब अमेरिकी अधिकारी स्टीफन मिलर की पत्नी कैटी मिलर ने सोशल मीडिया पर ग्रीनलैंड का नक्शा अमेरिकी झंडे के रंग में साझा किया, जिसे कैप्शन “जल्द ही” के साथ पोस्ट किया गया। इस कदम को अमेरिका की संभावित भूमि नीति की ओर इशारा माना गया, जिससे डेनमार्क और ग्रीनलैंड में चिंता बढ़ गई।
कैसे जुड़ा अमेरिका का हित
विशेषज्ञ बताते हैं कि ग्रीनलैंड का महत्व अमेरिका के लिए कई कारणों से रणनीतिक है:
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सैन्य महत्व: थुले एयर बेस से रूस और चीन की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है।
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प्राकृतिक संसाधन: यहां दुर्लभ खनिज, तेल और गैस भंडार हैं।
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नई समुद्री मार्ग: ग्लोबल वार्मिंग से आर्कटिक में नई शिपिंग रूट्स खुल रही हैं।
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राष्ट्रीय सुरक्षा: अमेरिकी नीति इसे “फ्रंटलाइन” मानती है, जिससे संभावित खतरों को पहले ही रोका जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रम्प के बयान नाटो सहयोगियों के बीच तनाव पैदा कर सकते हैं। डेनमार्क और ग्रीनलैंड पहले से ही नाटो का सदस्य हैं और अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग में हैं। ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य सुविधा मौजूद है, लेकिन पूर्ण नियंत्रण का दावा अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ माना जाएगा।
इस विवाद के बीच डेनमार्क और ग्रीनलैंड सरकार ने कहा है कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत काम जारी रखेंगे। अमेरिका की इस रणनीतिक चिंता के बावजूद, ग्रीनलैंड की स्थिति स्थिर है और क्षेत्रीय नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी प्रकार के विदेशी अधिग्रहण के लिए तैयार नहीं हैं।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की आवश्यकता दोहराई, जिससे डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं में नाराज़गी बढ़ गई। ट्रम्प ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्कटिक क्षेत्र में रूस व चीन की मौजूदगी को देखते हुए ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
ट्रम्प ने एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत में यह बयान दिया। उन्होंने इसे पहले भी द अटलांटिक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में व्यक्त किया था। ट्रम्प का कहना था कि आर्कटिक में चीन और रूस की बढ़ती गतिविधियों से निपटने के लिए अमेरिका को ग्रीनलैंड पर प्रभाव बढ़ाने की जरूरत है।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेत्ते फ्रेडरिक्सेन ने तुरंत ट्रम्प के बयान को “बेतुका” करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका का ग्रीनलैंड पर कब्जा करने का कोई अधिकार नहीं है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने भी इस टिप्पणी को अपमानजनक बताया और कहा कि उनका देश बिकाऊ नहीं है।
क्यों विवाद बढ़ा
विवाद तब और गहरा गया जब अमेरिकी अधिकारी स्टीफन मिलर की पत्नी कैटी मिलर ने सोशल मीडिया पर ग्रीनलैंड का नक्शा अमेरिकी झंडे के रंग में साझा किया, जिसे कैप्शन “जल्द ही” के साथ पोस्ट किया गया। इस कदम को अमेरिका की संभावित भूमि नीति की ओर इशारा माना गया, जिससे डेनमार्क और ग्रीनलैंड में चिंता बढ़ गई।
कैसे जुड़ा अमेरिका का हित
विशेषज्ञ बताते हैं कि ग्रीनलैंड का महत्व अमेरिका के लिए कई कारणों से रणनीतिक है:
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सैन्य महत्व: थुले एयर बेस से रूस और चीन की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है।
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प्राकृतिक संसाधन: यहां दुर्लभ खनिज, तेल और गैस भंडार हैं।
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नई समुद्री मार्ग: ग्लोबल वार्मिंग से आर्कटिक में नई शिपिंग रूट्स खुल रही हैं।
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राष्ट्रीय सुरक्षा: अमेरिकी नीति इसे “फ्रंटलाइन” मानती है, जिससे संभावित खतरों को पहले ही रोका जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रम्प के बयान नाटो सहयोगियों के बीच तनाव पैदा कर सकते हैं। डेनमार्क और ग्रीनलैंड पहले से ही नाटो का सदस्य हैं और अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग में हैं। ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य सुविधा मौजूद है, लेकिन पूर्ण नियंत्रण का दावा अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ माना जाएगा।
इस विवाद के बीच डेनमार्क और ग्रीनलैंड सरकार ने कहा है कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत काम जारी रखेंगे। अमेरिका की इस रणनीतिक चिंता के बावजूद, ग्रीनलैंड की स्थिति स्थिर है और क्षेत्रीय नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी प्रकार के विदेशी अधिग्रहण के लिए तैयार नहीं हैं।
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