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ईरान में सत्ता संकट गहराया: खामेनेई के देश छोड़ने की अटकलें, रूस जाने की तैयारी का दावा
अंतराष्ट्रीय न्यूज
लगातार आठ दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच खुफिया रिपोर्ट का दावा, हालात बिगड़े तो बेटे और करीबी लोगों के साथ तेहरान छोड़ सकते हैं ईरानी सुप्रीम लीडर
ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। एक खुफिया रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि यदि हालात काबू में नहीं आए, तो खामेनेई देश छोड़कर रूस जा सकते हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब ईरान लगातार आठ दिनों से गंभीर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा है।
ब्रिटेन के एक प्रमुख अखबार को मिली खुफिया जानकारी के अनुसार, 86 वर्षीय खामेनेई अपने बेटे और संभावित उत्तराधिकारी मुजतबा खामेनेई सहित लगभग 20 लोगों के छोटे समूह के साथ ईरान से बाहर जाने की योजना पर विचार कर रहे हैं। बताया गया है कि यह योजना आपात स्थिति के लिए तैयार की गई है और इसके तहत विदेशों में संपत्ति और वित्तीय संसाधनों को पहले ही सुरक्षित किया जा चुका है।
ईरान में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को राजधानी तेहरान से हुई थी, जहां व्यापारियों ने गिरती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई के खिलाफ आवाज उठाई। धीरे-धीरे यह आंदोलन देश के 78 से अधिक शहरों में फैल गया। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अब तक 222 से ज्यादा स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें कम से कम 35 लोगों की मौत और 1200 से अधिक की गिरफ्तारी की पुष्टि की गई है।
प्रदर्शनों की मुख्य वजह आर्थिक संकट मानी जा रही है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक गिरावट के साथ 1.45 मिलियन प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गई। महंगाई दर रिकॉर्ड स्तर पर है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 70 प्रतिशत से अधिक और दवाओं में करीब 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इसके साथ ही 2026 के बजट में प्रस्तावित 62 प्रतिशत कर वृद्धि ने जनाक्रोश को और हवा दी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात पर नजर रखी जा रही है। अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने सुरक्षा बलों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं। ईरान की सरकारी एजेंसियों का दावा है कि हिंसा में सैकड़ों सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं।
इस बीच, भारत सरकार ने भी स्थिति को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने ईरान की गैर जरूरी यात्रा से बचने और वहां रह रहे भारतीयों से दूतावास में पंजीकरण कराने की अपील की है।
खामेनेई पिछले 35 वर्षों से ईरान की सर्वोच्च सत्ता में हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से देश की राजनीति और नीति निर्धारण में उनकी निर्णायक भूमिका रही है। मौजूदा घटनाक्रम को विशेषज्ञ ईरान के लिए अब तक का सबसे गंभीर आंतरिक संकट मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह आंदोलन सत्ता में बदलाव की दिशा में बढ़ता है या सरकार हालात पर दोबारा नियंत्रण हासिल कर पाती है।
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ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। एक खुफिया रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि यदि हालात काबू में नहीं आए, तो खामेनेई देश छोड़कर रूस जा सकते हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब ईरान लगातार आठ दिनों से गंभीर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा है।
ब्रिटेन के एक प्रमुख अखबार को मिली खुफिया जानकारी के अनुसार, 86 वर्षीय खामेनेई अपने बेटे और संभावित उत्तराधिकारी मुजतबा खामेनेई सहित लगभग 20 लोगों के छोटे समूह के साथ ईरान से बाहर जाने की योजना पर विचार कर रहे हैं। बताया गया है कि यह योजना आपात स्थिति के लिए तैयार की गई है और इसके तहत विदेशों में संपत्ति और वित्तीय संसाधनों को पहले ही सुरक्षित किया जा चुका है।
ईरान में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को राजधानी तेहरान से हुई थी, जहां व्यापारियों ने गिरती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई के खिलाफ आवाज उठाई। धीरे-धीरे यह आंदोलन देश के 78 से अधिक शहरों में फैल गया। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अब तक 222 से ज्यादा स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें कम से कम 35 लोगों की मौत और 1200 से अधिक की गिरफ्तारी की पुष्टि की गई है।
प्रदर्शनों की मुख्य वजह आर्थिक संकट मानी जा रही है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक गिरावट के साथ 1.45 मिलियन प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गई। महंगाई दर रिकॉर्ड स्तर पर है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 70 प्रतिशत से अधिक और दवाओं में करीब 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इसके साथ ही 2026 के बजट में प्रस्तावित 62 प्रतिशत कर वृद्धि ने जनाक्रोश को और हवा दी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात पर नजर रखी जा रही है। अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने सुरक्षा बलों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं। ईरान की सरकारी एजेंसियों का दावा है कि हिंसा में सैकड़ों सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं।
इस बीच, भारत सरकार ने भी स्थिति को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने ईरान की गैर जरूरी यात्रा से बचने और वहां रह रहे भारतीयों से दूतावास में पंजीकरण कराने की अपील की है।
खामेनेई पिछले 35 वर्षों से ईरान की सर्वोच्च सत्ता में हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से देश की राजनीति और नीति निर्धारण में उनकी निर्णायक भूमिका रही है। मौजूदा घटनाक्रम को विशेषज्ञ ईरान के लिए अब तक का सबसे गंभीर आंतरिक संकट मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह आंदोलन सत्ता में बदलाव की दिशा में बढ़ता है या सरकार हालात पर दोबारा नियंत्रण हासिल कर पाती है।
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