दावोस मंच से ईरान पर टिप्पणी के बाद तेज हुआ कूटनीतिक टकराव, जेलेंस्की पर ईरानी विदेश मंत्री का तीखा पलटवार

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विश्व आर्थिक मंच में ईरान के नेतृत्व पर सवाल उठाने वाले यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बयान पर तेहरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी तेज

दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और नेताओं की मौजूदगी वाले विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दावोस सम्मेलन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की ईरान को लेकर की गई टिप्पणी ने एक नया कूटनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों और मानवाधिकार स्थिति पर चिंता जताते हुए जेलेंस्की ने वहां के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को सत्ता से हटाने की अपील की थी। इस बयान के कुछ ही घंटों बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए जेलेंस्की पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

तेहरान से जारी बयान में अराघची ने कहा कि यूक्रेनी नेतृत्व एक ओर संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय कानून की दुहाई देकर वैश्विक समर्थन मांगता है, वहीं दूसरी ओर ऐसे कदमों का समर्थन करता है जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए किसी बाहरी ताकत पर निर्भर नहीं है और देश की रक्षा ईरानी जनता और उसकी सेना स्वयं करती है।

यह विवाद उस वक्त सामने आया है जब दावोस में वैश्विक मंच पर जेलेंस्की ने ईरान की आंतरिक स्थिति पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा था कि ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दी। जेलेंस्की के अनुसार, अगर ऐसे हालात में सख्त रुख नहीं अपनाया गया तो यह दुनिया भर के तानाशाही शासनों को गलत संदेश देगा।

ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए जेलेंस्की की टिप्पणी को गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसे बयानों से थक चुकी है और किसी देश के आंतरिक मामलों में दखल देना स्वीकार्य नहीं है। अराघची ने यह भी जोड़ा कि ईरान किसी विदेशी समर्थन या “भाड़े की सेनाओं” के सहारे नहीं चलता, बल्कि अपनी संप्रभुता की रक्षा खुद करता है।

इस बयानबाज़ी के बीच अमेरिका की भूमिका भी चर्चा में है। दावोस सम्मेलन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सैन्य गतिविधियों की निगरानी की बात कही। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका क्षेत्र में ईरानी गतिविधियों पर करीबी नजर रखे हुए है, हालांकि उन्होंने किसी तत्काल सैन्य कार्रवाई से इनकार किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि जेलेंस्की की टिप्पणी केवल ईरान तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में वैश्विक समर्थन जुटाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है। वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला मान रहा है।

फिलहाल यह कूटनीतिक टकराव बयानबाज़ी तक सीमित है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इसके असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यूरोप, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।

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www.dainikjagranmpcg.com
23 Jan 2026 By Nitin Trivedi

दावोस मंच से ईरान पर टिप्पणी के बाद तेज हुआ कूटनीतिक टकराव, जेलेंस्की पर ईरानी विदेश मंत्री का तीखा पलटवार

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दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और नेताओं की मौजूदगी वाले विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दावोस सम्मेलन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की ईरान को लेकर की गई टिप्पणी ने एक नया कूटनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों और मानवाधिकार स्थिति पर चिंता जताते हुए जेलेंस्की ने वहां के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को सत्ता से हटाने की अपील की थी। इस बयान के कुछ ही घंटों बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए जेलेंस्की पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

तेहरान से जारी बयान में अराघची ने कहा कि यूक्रेनी नेतृत्व एक ओर संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय कानून की दुहाई देकर वैश्विक समर्थन मांगता है, वहीं दूसरी ओर ऐसे कदमों का समर्थन करता है जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए किसी बाहरी ताकत पर निर्भर नहीं है और देश की रक्षा ईरानी जनता और उसकी सेना स्वयं करती है।

यह विवाद उस वक्त सामने आया है जब दावोस में वैश्विक मंच पर जेलेंस्की ने ईरान की आंतरिक स्थिति पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा था कि ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दी। जेलेंस्की के अनुसार, अगर ऐसे हालात में सख्त रुख नहीं अपनाया गया तो यह दुनिया भर के तानाशाही शासनों को गलत संदेश देगा।

ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए जेलेंस्की की टिप्पणी को गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसे बयानों से थक चुकी है और किसी देश के आंतरिक मामलों में दखल देना स्वीकार्य नहीं है। अराघची ने यह भी जोड़ा कि ईरान किसी विदेशी समर्थन या “भाड़े की सेनाओं” के सहारे नहीं चलता, बल्कि अपनी संप्रभुता की रक्षा खुद करता है।

इस बयानबाज़ी के बीच अमेरिका की भूमिका भी चर्चा में है। दावोस सम्मेलन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सैन्य गतिविधियों की निगरानी की बात कही। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका क्षेत्र में ईरानी गतिविधियों पर करीबी नजर रखे हुए है, हालांकि उन्होंने किसी तत्काल सैन्य कार्रवाई से इनकार किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि जेलेंस्की की टिप्पणी केवल ईरान तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में वैश्विक समर्थन जुटाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है। वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला मान रहा है।

फिलहाल यह कूटनीतिक टकराव बयानबाज़ी तक सीमित है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इसके असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यूरोप, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।

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