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ट्रम्प का दावा: ईरान की ओर दूसरा अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा बढ़ रहा, नए परमाणु समझौते पर दबाव
अंतराष्ट्रीय न्यूज
ट्रम्प ने कहा, ईरान के सामने नए समझौते पर सहमति का दबाव बनाने की तैयारी
वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका का एक और नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है। ट्रम्प ने उम्मीद जताई कि इससे ईरान को नए परमाणु समझौते पर सहमति देने के लिए दबाव डाला जा सकता है। हालांकि, उन्होंने नए बेड़े की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।
अमेरिका पहले ही ईरान के पास USS अब्राहम लिंकन, न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर, और अन्य युद्धपोत तैनात कर चुका है। यह बेड़ा अरब सागर में पहुंच चुका है और ईरान के कई शहरों की स्ट्राइक रेंज में है। मिडिल ईस्ट में लगभग 30,000–40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जिनमें तीन गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं।
ट्रम्प ने एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के अधिकारी कई बार संपर्क कर चुके हैं और वे डील करना चाहते हैं।अमेरिका ने ईरान के लिए चार मुख्य शर्तें रखी हैं:
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यूरेनियम संवर्धन पर पूर्ण प्रतिबंध
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पहले से संवर्धित यूरेनियम को हटाना
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लंबी दूरी की मिसाइलों की संख्या सीमित करना
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क्षेत्रीय प्रॉक्सी बलों को मदद देना बंद करना
ट्रम्प का मानना है कि अगर ईरान इन शर्तों को मानता है तो बातचीत संभव है।
ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल (2017–2021) में JCPOA (परमाणु समझौता 2015) से अमेरिका को बाहर कर दिया था और “मैक्सिमम प्रेशर” नीति अपनाई। इसके तहत ईरान के तेल निर्यात, वित्तीय और व्यापारिक क्षेत्रों पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और IRGC कमांडर ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका हमला करता है तो ईरान सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल के केंद्रों को निशाने पर लेगा। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रम्प पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया।
प्रदर्शन और सामाजिक स्थिति
ईरान में 28 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें 5000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हुई। प्रदर्शन महंगाई और आर्थिक कठिनाइयों के खिलाफ थे। ईरान की मुद्रा रियाल रिकॉर्ड स्तर पर गिर गई और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो गईं।
क्षेत्रीय स्थिति
सऊदी अरब ने स्पष्ट किया कि उसका एयरस्पेस ईरान पर किसी भी हमले के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा कि उनका देश बातचीत और स्थिरता के पक्ष में है।
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अंतराष्ट्रीय न्यूज
वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका का एक और नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है। ट्रम्प ने उम्मीद जताई कि इससे ईरान को नए परमाणु समझौते पर सहमति देने के लिए दबाव डाला जा सकता है। हालांकि, उन्होंने नए बेड़े की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।
अमेरिका पहले ही ईरान के पास USS अब्राहम लिंकन, न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर, और अन्य युद्धपोत तैनात कर चुका है। यह बेड़ा अरब सागर में पहुंच चुका है और ईरान के कई शहरों की स्ट्राइक रेंज में है। मिडिल ईस्ट में लगभग 30,000–40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जिनमें तीन गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं।
ट्रम्प ने एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के अधिकारी कई बार संपर्क कर चुके हैं और वे डील करना चाहते हैं।अमेरिका ने ईरान के लिए चार मुख्य शर्तें रखी हैं:
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यूरेनियम संवर्धन पर पूर्ण प्रतिबंध
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पहले से संवर्धित यूरेनियम को हटाना
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लंबी दूरी की मिसाइलों की संख्या सीमित करना
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ट्रम्प का मानना है कि अगर ईरान इन शर्तों को मानता है तो बातचीत संभव है।
ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल (2017–2021) में JCPOA (परमाणु समझौता 2015) से अमेरिका को बाहर कर दिया था और “मैक्सिमम प्रेशर” नीति अपनाई। इसके तहत ईरान के तेल निर्यात, वित्तीय और व्यापारिक क्षेत्रों पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और IRGC कमांडर ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका हमला करता है तो ईरान सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल के केंद्रों को निशाने पर लेगा। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रम्प पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया।
प्रदर्शन और सामाजिक स्थिति
ईरान में 28 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें 5000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हुई। प्रदर्शन महंगाई और आर्थिक कठिनाइयों के खिलाफ थे। ईरान की मुद्रा रियाल रिकॉर्ड स्तर पर गिर गई और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो गईं।
क्षेत्रीय स्थिति
सऊदी अरब ने स्पष्ट किया कि उसका एयरस्पेस ईरान पर किसी भी हमले के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा कि उनका देश बातचीत और स्थिरता के पक्ष में है।
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