SIR केस में ममता बनर्जी और TMC सांसदों की याचिका पर सुनवाई, SC ने दिया ये कड़ा निर्देश

देश विदेश

By Rohit.P
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पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं।

पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। यह याचिका ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के अन्य सांसदों की ओर से दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सलाह लेकर एक नोटिफिकेशन जारी करे और अपीलों की सुनवाई के लिए एक विशेष अपीलेट ट्रिब्यूनल का गठन करे।

अदालत ने कहा कि इस ट्रिब्यूनल में एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीश शामिल होंगे। इसका उद्देश्य उन मामलों की समीक्षा करना होगा जिनकी याचिकाएं पहले स्तर पर ज्यूडिशियल अधिकारियों द्वारा खारिज कर दी जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी आवेदन को ज्यूडिशियल अधिकारी अस्वीकार करते हैं तो उन्हें उसके पीछे का स्पष्ट कारण बताना होगा।

अपीलों के लिए बनेगा विशेष ट्रिब्यूनल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन मामलों में ज्यूडिशियल अधिकारियों द्वारा आवेदन खारिज किए जा रहे हैं, उन पर आगे अपील की व्यवस्था होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से अपीलेट ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इस ट्रिब्यूनल के संचालन का पूरा खर्च चुनाव आयोग वहन करेगा।

कोर्ट का मानना है कि बड़ी संख्या में आने वाली आपत्तियों और आवेदनों को देखते हुए एक स्वतंत्र अपीलीय व्यवस्था जरूरी है, ताकि लोगों को न्याय पाने का अवसर मिल सके।

मामलों की संख्या को लेकर कोर्ट में जानकारी

सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि ज्यूडिशियल अधिकारियों द्वारा अब तक लगभग सात लाख मामलों की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर करीब 63 लाख आवेदन हैं, जिनमें से अभी लगभग 57 लाख मामलों पर कार्रवाई बाकी है।

इस पर अदालत ने जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने 10 मार्च को अदालत को बताया है कि दस लाख से अधिक आपत्तियों का निपटारा किया जा चुका है। इसके लिए बड़ी संख्या में ज्यूडिशियल अधिकारियों को तैनात किया गया है जो लगातार काम कर रहे हैं।

CJI की नाराजगी और सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश ने याचिका को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की अग्रिम याचिकाएं दाखिल करने से यह संदेश जाता है कि याचिकाकर्ताओं को न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ज्यूडिशियल अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने की हिम्मत कैसे की गई।

मुख्य न्यायाधीश ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस तरह के मामलों में अदालत अवमानना नोटिस जारी करने पर भी विचार कर सकती है। इस पर मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को स्पष्ट किया कि उनकी ओर से ज्यूडिशियल अधिकारियों की निष्ठा पर सवाल उठाने का कोई इरादा नहीं था।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब ऐसी स्थिति बन गई है जहां अदालत को दोनों पक्षों के दावों पर संदेह होने लगा है और वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

बड़ी संख्या में तैनात किए गए ज्यूडिशियल अधिकारी

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए पश्चिम बंगाल के अलावा ओडिशा और झारखंड से भी ज्यूडिशियल अधिकारियों को बुलाया गया है। कुल मिलाकर 700 से अधिक अधिकारियों को तैनात किया गया है। इनमें से लगभग 500 अधिकारी पश्चिम बंगाल से हैं, जबकि बाकी अन्य राज्यों से भेजे गए हैं।

अदालत ने कहा कि ये अधिकारी दिन-रात काम कर रहे हैं ताकि सभी आपत्तियों और आवेदनों का जल्द निपटारा किया जा सके।

चुनाव आयोग और राज्य सरकार को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि ज्यूडिशियल अधिकारियों को अपने दायित्व निभाने में हर तरह की लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने कहा कि यदि अधिकारियों को किसी तकनीकी या प्रशासनिक सहायता की आवश्यकता हो तो उसे तुरंत उपलब्ध कराया जाए।

साथ ही अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को भी निर्देश दिया कि ज्यूडिशियल अधिकारियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि वे बिना किसी बाधा के काम कर सकें। अदालत ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अधिकारियों के लिए नई लॉगिन आईडी तुरंत जारी की जाएं।

न्यायिक अधिकारियों के प्रयासों की सराहना

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि ज्यूडिशियल अधिकारियों की छुट्टियां तक रद्द कर दी गई हैं और वे लगातार काम कर रहे हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकारियों से इससे अधिक त्याग की उम्मीद करना मुश्किल है।

अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के प्रयासों को देखते हुए सभी संस्थाओं को सहयोग करना चाहिए ताकि प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सके।

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