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NEET रि-एग्जाम में छात्रों ने मुश्किल हालात में दिया एग्जाम
Digital Desk
सड़क हादसे, गंभीर बीमारियों और इलाज के बीच भी करीब 20 लाख से ज्यादा छात्रों ने NEET-UG रि-एग्जाम दिया, जबकि 81 उम्मीदवारों के लिए विशेष मेडिकल इंतजाम किए गए।
NEET-UG रि-एग्जाम 2026 रविवार को देश और विदेश के कई केंद्रों पर शांतिपूर्ण माहौल में आयोजित हुआ, लेकिन इसके पीछे कई ऐसी कहानियां सामने आईं जो छात्रों के संघर्ष और जज्बे को दिखाती हैं। करीब 20 लाख से अधिक छात्रों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया, जिसे पहले पेपर लीक के कारण रद्द कर दिया गया था। परीक्षा को लेकर इस बार सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम किए गए थे, लेकिन असली तस्वीर उन छात्रों की रही जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद परीक्षा देने पहुंचे।
कोलकाता के एक छात्र की कहानी ने सबका ध्यान खींचा। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने और हाल ही में वेंटिलेटर से बाहर आने के बावजूद उसने NEET परीक्षा देने का फैसला किया। उसके लिए विशेष इंतजाम किए गए और परीक्षा केंद्र पर अलग कमरा, मेडिकल सपोर्ट और एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। डॉक्टरों की निगरानी में उसने परीक्षा दी। वहीं एक अन्य छात्र जो सड़क हादसे में घायल हो गया था, उसे प्राथमिक उपचार के बाद परीक्षा केंद्र पर देरी से पहुंचने के कारण प्रवेश नहीं मिल सका। यह घटना कई जगह चर्चा का विषय बनी रही। राजस्थान के अजमेर में एक महिला अभ्यर्थी को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी। वह बुर्का पहनकर परीक्षा केंद्र पहुंची थी, लेकिन शुरुआती तौर पर प्रवेश को लेकर असमंजस की स्थिति बनी। बाद में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी नियमों के पालन के बाद उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी गई। इस घटना ने परीक्षा प्रक्रिया और सुरक्षा नियमों को लेकर एक बार फिर चर्चा को जन्म दिया।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अनुसार इस बार परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। लगभग 95 हजार परीक्षा केंद्रों पर 5,440 शहरों में परीक्षा आयोजित की गई, जिनमें 14 अंतरराष्ट्रीय केंद्र भी शामिल थे। करीब 1.39 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे और 21,311 सिग्नल जैमर का उपयोग किया गया। हर परीक्षा हॉल में कम से कम दो निरीक्षक और प्रत्येक केंद्र पर 40 से अधिक सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए थे। इसके बावजूद परीक्षा केंद्रों पर कुछ जगहों पर देर से पहुंचने वाले छात्रों को प्रवेश नहीं मिल सका। सरकार और प्रशासन ने करीब 81 ऐसे उम्मीदवारों के लिए विशेष व्यवस्था की थी, जो गंभीर बीमारियों या मेडिकल कंडीशन से जूझ रहे थे। इनमें कैंसर से पीड़ित छात्र और गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल छात्र भी शामिल थे। इन छात्रों के लिए अलग कमरे, मेडिकल टीम और एंबुलेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। यह कदम इस बात को दर्शाता है कि परीक्षा के दौरान भी गंभीर परिस्थितियों में छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखा गया।
परीक्षा के दौरान कई जगहों पर ट्रैफिक और समय प्रबंधन को लेकर भी सख्ती दिखाई गई। कुछ छात्रों के देर से पहुंचने की वजह से उन्हें प्रवेश नहीं मिल पाया। भोपाल में एक घायल छात्र को समय पर इलाज और देरी के कारण परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिला, जिससे उसके परिवार ने नाराजगी जताई। परिवार का कहना था कि हादसे के बावजूद वह परीक्षा देना चाहता था, लेकिन समय सीमा के कारण उसे रोका गया। परीक्षा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा होती रही। बताया गया कि इस बार पेपर लीक के बाद परीक्षा दोबारा आयोजित की गई थी, जिससे छात्रों में तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। हालांकि सरकार ने सुरक्षा और निगरानी को लेकर कई कड़े कदम उठाए थे, जिससे परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकी। इस पूरी परीक्षा प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि हजारों छात्र कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों के लिए डटे रहे। कहीं गंभीर चोट, कहीं इलाज और कहीं निजी कठिनाइयों के बावजूद छात्रों का हौसला कम नहीं हुआ। यह परीक्षा केवल एक प्रवेश परीक्षा नहीं बल्कि छात्रों के संघर्ष और धैर्य की परीक्षा भी बन गई। NEET-UG रि-एग्जाम को सफलतापूर्वक संपन्न माना जा रहा है, लेकिन कुछ घटनाओं ने परीक्षा व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं पर सवाल भी खड़े किए हैं।
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NEET रि-एग्जाम में छात्रों ने मुश्किल हालात में दिया एग्जाम
Digital Desk
NEET-UG रि-एग्जाम 2026 रविवार को देश और विदेश के कई केंद्रों पर शांतिपूर्ण माहौल में आयोजित हुआ, लेकिन इसके पीछे कई ऐसी कहानियां सामने आईं जो छात्रों के संघर्ष और जज्बे को दिखाती हैं। करीब 20 लाख से अधिक छात्रों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया, जिसे पहले पेपर लीक के कारण रद्द कर दिया गया था। परीक्षा को लेकर इस बार सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम किए गए थे, लेकिन असली तस्वीर उन छात्रों की रही जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद परीक्षा देने पहुंचे।
कोलकाता के एक छात्र की कहानी ने सबका ध्यान खींचा। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने और हाल ही में वेंटिलेटर से बाहर आने के बावजूद उसने NEET परीक्षा देने का फैसला किया। उसके लिए विशेष इंतजाम किए गए और परीक्षा केंद्र पर अलग कमरा, मेडिकल सपोर्ट और एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। डॉक्टरों की निगरानी में उसने परीक्षा दी। वहीं एक अन्य छात्र जो सड़क हादसे में घायल हो गया था, उसे प्राथमिक उपचार के बाद परीक्षा केंद्र पर देरी से पहुंचने के कारण प्रवेश नहीं मिल सका। यह घटना कई जगह चर्चा का विषय बनी रही। राजस्थान के अजमेर में एक महिला अभ्यर्थी को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी। वह बुर्का पहनकर परीक्षा केंद्र पहुंची थी, लेकिन शुरुआती तौर पर प्रवेश को लेकर असमंजस की स्थिति बनी। बाद में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी नियमों के पालन के बाद उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी गई। इस घटना ने परीक्षा प्रक्रिया और सुरक्षा नियमों को लेकर एक बार फिर चर्चा को जन्म दिया।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अनुसार इस बार परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। लगभग 95 हजार परीक्षा केंद्रों पर 5,440 शहरों में परीक्षा आयोजित की गई, जिनमें 14 अंतरराष्ट्रीय केंद्र भी शामिल थे। करीब 1.39 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे और 21,311 सिग्नल जैमर का उपयोग किया गया। हर परीक्षा हॉल में कम से कम दो निरीक्षक और प्रत्येक केंद्र पर 40 से अधिक सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए थे। इसके बावजूद परीक्षा केंद्रों पर कुछ जगहों पर देर से पहुंचने वाले छात्रों को प्रवेश नहीं मिल सका। सरकार और प्रशासन ने करीब 81 ऐसे उम्मीदवारों के लिए विशेष व्यवस्था की थी, जो गंभीर बीमारियों या मेडिकल कंडीशन से जूझ रहे थे। इनमें कैंसर से पीड़ित छात्र और गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल छात्र भी शामिल थे। इन छात्रों के लिए अलग कमरे, मेडिकल टीम और एंबुलेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। यह कदम इस बात को दर्शाता है कि परीक्षा के दौरान भी गंभीर परिस्थितियों में छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखा गया।
परीक्षा के दौरान कई जगहों पर ट्रैफिक और समय प्रबंधन को लेकर भी सख्ती दिखाई गई। कुछ छात्रों के देर से पहुंचने की वजह से उन्हें प्रवेश नहीं मिल पाया। भोपाल में एक घायल छात्र को समय पर इलाज और देरी के कारण परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिला, जिससे उसके परिवार ने नाराजगी जताई। परिवार का कहना था कि हादसे के बावजूद वह परीक्षा देना चाहता था, लेकिन समय सीमा के कारण उसे रोका गया। परीक्षा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा होती रही। बताया गया कि इस बार पेपर लीक के बाद परीक्षा दोबारा आयोजित की गई थी, जिससे छात्रों में तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। हालांकि सरकार ने सुरक्षा और निगरानी को लेकर कई कड़े कदम उठाए थे, जिससे परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकी। इस पूरी परीक्षा प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि हजारों छात्र कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों के लिए डटे रहे। कहीं गंभीर चोट, कहीं इलाज और कहीं निजी कठिनाइयों के बावजूद छात्रों का हौसला कम नहीं हुआ। यह परीक्षा केवल एक प्रवेश परीक्षा नहीं बल्कि छात्रों के संघर्ष और धैर्य की परीक्षा भी बन गई। NEET-UG रि-एग्जाम को सफलतापूर्वक संपन्न माना जा रहा है, लेकिन कुछ घटनाओं ने परीक्षा व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं पर सवाल भी खड़े किए हैं।
