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भारत में ‘कॉकरोच पार्टी’ के नेतृत्व में प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी
Digital Desk
NEET-UG विवाद और पेपर लीक आरोपों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का धरना, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG परीक्षा विवाद को लेकर चल रहा प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए सैकड़ों छात्र, युवा पेशेवर और नौकरी तलाशने वाले लोग इस धरने में शामिल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। यह विरोध उस मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर है, जिसे पेपर लीक के आरोपों के बाद विवादों के केंद्र में देखा जा रहा है। इस प्रदर्शन का नेतृत्व एक नए और अनोखे समूह ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ द्वारा किया जा रहा है, जिसने सोशल मीडिया पर अपनी व्यंग्यात्मक राजनीति शैली के कारण तेजी से ध्यान आकर्षित किया है। इस समूह का प्रतीक ‘कॉकरोच’ है और यह नाम भारत की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के संदर्भ में व्यंग्यात्मक तरीके से रखा गया बताया जाता है। संगठन का कहना है कि उनका उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ाना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि NEET-UG जैसी अत्यंत प्रतिस्पर्धी परीक्षा में कथित पेपर लीक ने लाखों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने परीक्षा परिणाम रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया था। रविवार को देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच दोबारा परीक्षा दी, जिसमें बायोमेट्रिक जांच और निगरानी के विशेष इंतजाम किए गए थे।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बाद में बयान जारी कर कहा था कि री-एग्जाम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ है और किसी भी प्रकार की पेपर लीक की शिकायत नहीं मिली है। हालांकि जंतर-मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारियों के लिए यह जवाब पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि समस्या सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा सिस्टम की जवाबदेही का सवाल है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिषेक दीपके ने रविवार को समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंदोलन सिर्फ परीक्षा विवाद का नहीं बल्कि सिस्टम में सुधार का है। उन्होंने कहा कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक छात्र इसी तरह सड़कों पर आवाज उठाते रहेंगे। दीपके अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी में छात्र हैं और हाल ही में भारत आकर उन्होंने इस आंदोलन की शुरुआत की थी। 19 जून को शुरू हुआ यह धरना प्रशासन की अनुमति के साथ तय समय तक चलना था, लेकिन 20 जून को समय समाप्त होने के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने जगह नहीं छोड़ी। उनका कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी दौरान कई प्रदर्शनकारी रात भर जंतर-मंतर पर ही रुके रहे और सड़कों पर सोते नजर आए।
धरना स्थल पर हालात भी लगातार चर्चा में बने रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अनुमति समाप्त होने के बाद पुलिस ने लाइटें बंद कर दीं और पानी तथा शौचालय की सुविधा सीमित कर दी गई। हालांकि बाद में ये सुविधाएं बहाल कर दी गईं। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस आंदोलन में सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि आम नागरिक भी शामिल हो रहे हैं। दिल्ली के एक स्टोरकीपर ज्योति ठाकुर ने कहा कि वह इस आंदोलन में इसलिए शामिल हुईं क्योंकि उनका मानना है कि बेहतर शिक्षा व्यवस्था ही बेहतर समाज की नींव है। वहीं 39 वर्षीय वकील गौरव जैन ने कहा कि वे जवाबदेही के मुद्दे पर समर्थन देने पहुंचे हैं और शिक्षा प्रणाली में सुधार जरूरी है। कॉकरोच जनता पार्टी का उदय भी एक विवादित टिप्पणी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा बेरोजगार युवाओं पर की गई टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी फैल गई थी। बाद में स्पष्ट किया गया कि टिप्पणी का संदर्भ फर्जी डिग्री रखने वालों से जुड़ा था, लेकिन तब तक विरोध की लहर फैल चुकी थी। शिक्षा मंत्रालय और सत्ताधारी पार्टी की ओर से इस आंदोलन और इस्तीफे की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और छात्र लगातार नारेबाजी कर रहे हैं कि यह लड़ाई सिर्फ परीक्षा की नहीं बल्कि सिस्टम की जिम्मेदारी तय करने की है।
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भारत में ‘कॉकरोच पार्टी’ के नेतृत्व में प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी
Digital Desk
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG परीक्षा विवाद को लेकर चल रहा प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए सैकड़ों छात्र, युवा पेशेवर और नौकरी तलाशने वाले लोग इस धरने में शामिल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। यह विरोध उस मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर है, जिसे पेपर लीक के आरोपों के बाद विवादों के केंद्र में देखा जा रहा है। इस प्रदर्शन का नेतृत्व एक नए और अनोखे समूह ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ द्वारा किया जा रहा है, जिसने सोशल मीडिया पर अपनी व्यंग्यात्मक राजनीति शैली के कारण तेजी से ध्यान आकर्षित किया है। इस समूह का प्रतीक ‘कॉकरोच’ है और यह नाम भारत की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के संदर्भ में व्यंग्यात्मक तरीके से रखा गया बताया जाता है। संगठन का कहना है कि उनका उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ाना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि NEET-UG जैसी अत्यंत प्रतिस्पर्धी परीक्षा में कथित पेपर लीक ने लाखों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने परीक्षा परिणाम रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया था। रविवार को देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच दोबारा परीक्षा दी, जिसमें बायोमेट्रिक जांच और निगरानी के विशेष इंतजाम किए गए थे।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बाद में बयान जारी कर कहा था कि री-एग्जाम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ है और किसी भी प्रकार की पेपर लीक की शिकायत नहीं मिली है। हालांकि जंतर-मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारियों के लिए यह जवाब पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि समस्या सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा सिस्टम की जवाबदेही का सवाल है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिषेक दीपके ने रविवार को समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंदोलन सिर्फ परीक्षा विवाद का नहीं बल्कि सिस्टम में सुधार का है। उन्होंने कहा कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक छात्र इसी तरह सड़कों पर आवाज उठाते रहेंगे। दीपके अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी में छात्र हैं और हाल ही में भारत आकर उन्होंने इस आंदोलन की शुरुआत की थी। 19 जून को शुरू हुआ यह धरना प्रशासन की अनुमति के साथ तय समय तक चलना था, लेकिन 20 जून को समय समाप्त होने के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने जगह नहीं छोड़ी। उनका कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी दौरान कई प्रदर्शनकारी रात भर जंतर-मंतर पर ही रुके रहे और सड़कों पर सोते नजर आए।
धरना स्थल पर हालात भी लगातार चर्चा में बने रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अनुमति समाप्त होने के बाद पुलिस ने लाइटें बंद कर दीं और पानी तथा शौचालय की सुविधा सीमित कर दी गई। हालांकि बाद में ये सुविधाएं बहाल कर दी गईं। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस आंदोलन में सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि आम नागरिक भी शामिल हो रहे हैं। दिल्ली के एक स्टोरकीपर ज्योति ठाकुर ने कहा कि वह इस आंदोलन में इसलिए शामिल हुईं क्योंकि उनका मानना है कि बेहतर शिक्षा व्यवस्था ही बेहतर समाज की नींव है। वहीं 39 वर्षीय वकील गौरव जैन ने कहा कि वे जवाबदेही के मुद्दे पर समर्थन देने पहुंचे हैं और शिक्षा प्रणाली में सुधार जरूरी है। कॉकरोच जनता पार्टी का उदय भी एक विवादित टिप्पणी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा बेरोजगार युवाओं पर की गई टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी फैल गई थी। बाद में स्पष्ट किया गया कि टिप्पणी का संदर्भ फर्जी डिग्री रखने वालों से जुड़ा था, लेकिन तब तक विरोध की लहर फैल चुकी थी। शिक्षा मंत्रालय और सत्ताधारी पार्टी की ओर से इस आंदोलन और इस्तीफे की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और छात्र लगातार नारेबाजी कर रहे हैं कि यह लड़ाई सिर्फ परीक्षा की नहीं बल्कि सिस्टम की जिम्मेदारी तय करने की है।
