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केतन अग्रवाल हत्याकांड: सिया का दूसरा मोबाइल मिला, कोडवर्ड चैट की जांच तेज
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अदालत ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, पुलिस अब बरामद मोबाइल और कथित सांकेतिक चैट के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। मामले में गिरफ्तार सिया गोयल और उसके कथित साथी चेतन चौधरी को वडगांव अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों अब येरवदा जेल में रहेंगे। पुलिस ने अदालत से दोनों की कस्टडी बढ़ाने की मांग की थी ताकि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच आगे बढ़ाई जा सके, लेकिन अदालत ने यह मांग स्वीकार नहीं की। पेशी के दौरान दोनों आरोपियों ने नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी आरोपी की सहमति के बिना ऐसे परीक्षण नहीं कराए जा सकते। इसके बाद फिलहाल इन जांच प्रक्रियाओं पर रोक लग गई है। पुलिस का कहना है कि अब डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। इसी बीच सिया के घर से एक दूसरा मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है, जिसे कथित तौर पर छिपाकर रखा गया था। इस मोबाइल को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजा गया है, जहां उसके डेटा की जांच की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार इस डिवाइस से मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक अब तक बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से बड़ी मात्रा में डिलीट किया गया डेटा रिकवर किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सिया और चेतन आपस में कथित तौर पर कोडवर्ड और सांकेतिक भाषा में बातचीत करते थे। चैट में निकनेम, इमोजी और ऐसे संकेतों का इस्तेमाल किया गया है, जिनका वास्तविक अर्थ समझने के लिए साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। पुलिस का मानना है कि इन चैट के जरिए दोनों कथित रूप से अपनी योजनाओं पर चर्चा करते थे। हालांकि इन संदेशों की अंतिम पुष्टि फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। इसी बीच मामले में तीसरे व्यक्ति की संभावित भूमिका की भी जांच शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक बीड जिले से एक युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि वह पुणे के बालेवाड़ी स्थित एक निजी कंपनी में काम करता है और सिया या केतन में से किसी एक का परिचित है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या उसे कथित योजना की पहले से जानकारी थी। फिलहाल उसकी भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि उसे गवाह बनाया जाए या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
पुलिस जांच के अनुसार केतन अग्रवाल और सिया गोयल की शादी इसी साल नवंबर में होने वाली थी। दोनों की सगाई पहले हो चुकी थी और परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था। जांच में यह दावा किया गया है कि मई के आखिर में कथित हत्या की योजना बनाई गई और अगले कुछ दिनों में घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ा। पुलिस का आरोप है कि 14 जून को लोहगढ़ किले पर पहली बार कथित तौर पर केतन को धक्का देने की कोशिश की गई, लेकिन वह बच गया। इसके बाद 18 जून को सिया ने प्री-वेडिंग फोटोशूट का बहाना बनाकर केतन को दोबारा लोहगढ़ फोर्ट चलने के लिए राजी किया। पुलिस का आरोप है कि उसी दिन चेतन चौधरी भी वहां मौजूद था और दोनों ने मिलकर केतन को पहाड़ी से धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम को डिजिटल साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और फोरेंसिक रिपोर्ट के जरिए जोड़ने की कोशिश कर रही है। वहीं बचाव पक्ष ने अभी तक आरोपों पर विस्तार से सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। मामले की अगली सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत तय तारीख पर होगी।
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पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। मामले में गिरफ्तार सिया गोयल और उसके कथित साथी चेतन चौधरी को वडगांव अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों अब येरवदा जेल में रहेंगे। पुलिस ने अदालत से दोनों की कस्टडी बढ़ाने की मांग की थी ताकि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच आगे बढ़ाई जा सके, लेकिन अदालत ने यह मांग स्वीकार नहीं की। पेशी के दौरान दोनों आरोपियों ने नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी आरोपी की सहमति के बिना ऐसे परीक्षण नहीं कराए जा सकते। इसके बाद फिलहाल इन जांच प्रक्रियाओं पर रोक लग गई है। पुलिस का कहना है कि अब डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। इसी बीच सिया के घर से एक दूसरा मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है, जिसे कथित तौर पर छिपाकर रखा गया था। इस मोबाइल को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजा गया है, जहां उसके डेटा की जांच की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार इस डिवाइस से मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक अब तक बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से बड़ी मात्रा में डिलीट किया गया डेटा रिकवर किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सिया और चेतन आपस में कथित तौर पर कोडवर्ड और सांकेतिक भाषा में बातचीत करते थे। चैट में निकनेम, इमोजी और ऐसे संकेतों का इस्तेमाल किया गया है, जिनका वास्तविक अर्थ समझने के लिए साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। पुलिस का मानना है कि इन चैट के जरिए दोनों कथित रूप से अपनी योजनाओं पर चर्चा करते थे। हालांकि इन संदेशों की अंतिम पुष्टि फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। इसी बीच मामले में तीसरे व्यक्ति की संभावित भूमिका की भी जांच शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक बीड जिले से एक युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि वह पुणे के बालेवाड़ी स्थित एक निजी कंपनी में काम करता है और सिया या केतन में से किसी एक का परिचित है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या उसे कथित योजना की पहले से जानकारी थी। फिलहाल उसकी भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि उसे गवाह बनाया जाए या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
पुलिस जांच के अनुसार केतन अग्रवाल और सिया गोयल की शादी इसी साल नवंबर में होने वाली थी। दोनों की सगाई पहले हो चुकी थी और परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था। जांच में यह दावा किया गया है कि मई के आखिर में कथित हत्या की योजना बनाई गई और अगले कुछ दिनों में घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ा। पुलिस का आरोप है कि 14 जून को लोहगढ़ किले पर पहली बार कथित तौर पर केतन को धक्का देने की कोशिश की गई, लेकिन वह बच गया। इसके बाद 18 जून को सिया ने प्री-वेडिंग फोटोशूट का बहाना बनाकर केतन को दोबारा लोहगढ़ फोर्ट चलने के लिए राजी किया। पुलिस का आरोप है कि उसी दिन चेतन चौधरी भी वहां मौजूद था और दोनों ने मिलकर केतन को पहाड़ी से धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम को डिजिटल साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और फोरेंसिक रिपोर्ट के जरिए जोड़ने की कोशिश कर रही है। वहीं बचाव पक्ष ने अभी तक आरोपों पर विस्तार से सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। मामले की अगली सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत तय तारीख पर होगी।
