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ईरान की नई धमकी, खाड़ी में एक्सक्लूजन जोन की चेतावनी
Digital Desk
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच CENTCOM ने 94 वाणिज्यिक जहाजों को डायवर्ट किया। ईरान ने फारस की खाड़ी में नए समुद्री एक्सक्लूजन जोन की चेतावनी दी है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री सुरक्षा को गंभीर मोड़ पर ला दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया है कि उसकी सेनाओं ने 7 सितंबर तक 94 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला, तीन जहाजों को निष्क्रिय किया और दो जहाजों पर सवार होकर कार्रवाई की। इसी बीच ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि तेहरान ने अमेरिकी युद्धपोतों और सैन्य ठिकानों के खिलाफ अपनी परिचालन रणनीति को “मौलिक रूप से पुनर्गठित” कर लिया है।
ईरान ने दी नई धमकी
मोहसेन रेजाई ने कहा कि अमेरिकी आर्थिक दबाव का जवाब फारस की खाड़ी में एक समुद्री एक्सक्लूजन जोन बनाकर दिया जा सकता है। उनके मुताबिक प्रस्तावित क्षेत्र अमेरिकी नाकाबंदी की सीमा से लेकर फारस की खाड़ी के कुछ हिस्सों तक फैल सकता है।
रेजाई ने यह भी चेतावनी दी कि नए प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने वाले जहाजों को ईरानी प्रतिबंध सूची में डाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि हाल के ईरानी मिसाइल परीक्षणों के जरिए वॉशिंगटन को स्पष्ट संदेश दिया जा चुका है।
CENTCOM ने मोड़े 94 जहाज
अमेरिकी CENTCOM के अनुसार, 7 सितंबर तक उसकी सेनाओं ने नाकाबंदी लागू करते हुए 94 वाणिज्यिक जहाजों को डायवर्ट किया। तीन जहाजों को निष्क्रिय करने और दो पर बोर्डिंग की भी जानकारी दी गई है।
CENTCOM ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी नौसेना के अभियान की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि ये कार्रवाई ईरान के खिलाफ लागू समुद्री नाकाबंदी का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है।
यह अभियान केवल हालिया कार्रवाई नहीं है। अमेरिकी CENTCOM ने जुलाई में घोषणा की थी कि वह ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात पर नाकाबंदी फिर शुरू करेगा। उस समय उसने कहा था कि इससे पहले अप्रैल-जून के अभियान में 140 से अधिक जहाजों का मार्ग बदला गया था।
होर्मुज पर बढ़ा दबाव
ईरान की नई चेतावनी का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ सकता है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और पहले से ही युद्ध के कारण समुद्री आवाजाही में भारी कमी देखी जा रही है।
रॉयटर्स के अनुसार, सोमवार को केवल सात कमोडिटी जहाज स्ट्रेट से गुजरे, जबकि एक दिन पहले यह संख्या आठ थी। हालांकि, कुछ जहाजों के ट्रांसपोंडर बंद होने के कारण वास्तविक संख्या अलग हो सकती है।
ईरान ने संकेत दिया है कि वह होर्मुज को पूरी तरह बंद करने के बजाय अपने विरोध की शर्तों के आधार पर समुद्री आवाजाही को नियंत्रित करने का नया तरीका अपना सकता है।
मिसाइल हमलों का दावा
तनाव के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी विमानवाहक पोत और एक विध्वंसक पोत पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इन अमेरिकी युद्धपोतों पर इसलिए हमला किया गया क्योंकि वे ईरानी जहाजों को परेशान कर रहे थे और समुद्री नाकाबंदी में हिस्सा ले रहे थे। हालांकि, अमेरिकी सेना ने ईरान के इन दावों का खंडन किया है और कहा है कि उसके युद्धपोतों ने मिसाइल हमलों से सफलतापूर्वक बचाव किया।
इससे दोनों देशों के दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर भी स्पष्ट होता है।
अमेरिका ने तेल टैंकरों पर कार्रवाई की
मौजूदा तनाव की पृष्ठभूमि में अमेरिका ने 5 सितंबर को तीन ईरानी कच्चे तेल टैंकरों पर कार्रवाई की थी। CENTCOM के मुताबिक, यह कदम अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के बाद उठाया गया।
अमेरिकी कमांड ने कहा था कि एक विमानवाहक पोत और गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक ने ईरानी हमलों से बचाव किया और किसी अमेरिकी सैन्यकर्मी को नुकसान नहीं पहुंचा। इसके बाद ईरान ने अपनी सैन्य प्रतिक्रिया और समुद्री दबाव बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
आर्थिक युद्ध का नया मोर्चा
ईरान ने अपनी नई समुद्री रणनीति को सीधे अमेरिकी आर्थिक दबाव से जोड़ा है। रेजाई के मुताबिक, अगर अमेरिका आर्थिक युद्ध जारी रखता है तो इसका जवाब समुद्री क्षेत्र में प्रतिबंध बढ़ाकर दिया जाएगा।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की सैन्य क्षमता को अमेरिकी हमलों से नुकसान पहुंचने के बावजूद उसके पास मिसाइल और ड्रोन क्षमता बरकरार है। तेहरान इसी क्षमता और होर्मुज पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल अमेरिका तथा क्षेत्रीय देशों पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है।
इसका असर तेल की कीमतों और खाड़ी देशों से होने वाले ऊर्जा निर्यात पर भी पड़ सकता है।
दुनिया की नजर होर्मुज पर
फारस की खाड़ी में प्रस्तावित एक्सक्लूजन जोन और अमेरिकी नाकाबंदी के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि समुद्री यातायात कितना प्रभावित होता है। अगर दोनों पक्षों ने अपने-अपने प्रतिबंधित क्षेत्रों को वास्तव में लागू किया, तो वाणिज्यिक जहाजों के लिए जोखिम और बीमा लागत बढ़ सकती है।
अमेरिका पहले ही नाकाबंदी लागू करने की अपनी नीति जारी रखे हुए है, जबकि ईरान ने संकेत दिया है कि वह अमेरिकी युद्धपोतों और सैन्य ठिकानों के खिलाफ अपनी रणनीति बदल चुका है।
आने वाले दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की समुद्री आवाजाही, ईरान के प्रस्तावित एक्सक्लूजन जोन की सीमा और अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाई इस संकट की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।
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