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अयोध्या चढ़ावा चोरी पर अखिलेश यादव का हमला, बोले- बड़े लोगों को क्लीन चिट तो छोटे कर्मचारियों को जेल क्यों?
Digital Desk
सहारनपुर दौरे पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि बड़े लोगों को जांच में राहत मिली है तो जेल भेजे गए छोटे कर्मचारियों के साथ भी न्याय होना चाहिए।
अखिलेश ने फिर उठाया चढ़ावा चोरी का मुद्दा
सहारनपुर में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जांच में बड़े पदों पर रहे लोगों को क्लीन चिट दी गई है तो छोटे कर्मचारियों को जेल भेजने का आधार क्या है। अखिलेश ने कहा कि नई घटनाओं के कारण पुराना मामला भुलाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने राम मंदिर में आए चढ़ावे और राम धन की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि सेवा करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई, जबकि बड़े लोगों को राहत दी गई। उनका कहना था कि अगर जांच में बड़े लोगों की भूमिका नहीं मिली तो छोटे कर्मचारियों को भी बाहर किया जाना चाहिए।
SIT रिपोर्ट के बाद तेज हुई राजनीतिक बहस
अखिलेश का बयान ऐसे समय आया है जब अयोध्या चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही उत्तर प्रदेश सरकार की SIT की अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस फिर तेज हुई है। 17-18 अगस्त को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, SIT ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। उपलब्ध रिपोर्टों में कहा गया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा की चोरी में भूमिका नहीं मिली। हालांकि, मामले से जुड़ी दूसरी जांच प्रक्रिया का भी उल्लेख सामने आया है, इसलिए पूरे प्रकरण को केवल पहली SIT रिपोर्ट के आधार पर समाप्त मानना उचित नहीं है। SIT की शुरुआती जांच से जुड़े विवरणों में मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कर्मचारियों की संदिग्ध गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था में कमियों का उल्लेख किया गया था। मामले में कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी हुई थी।
'बड़े लोगों को बाहर करो तो छोटे कर्मचारियों को भी बाहर करो'
अखिलेश यादव ने इसी कार्रवाई को आधार बनाते हुए सवाल किया कि जब जांच में बड़े लोगों के खिलाफ भूमिका नहीं मिली तो कर्मचारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई की भी समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राम धन की सुरक्षा को लेकर भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। सपा प्रमुख ने इस मुद्दे को केवल चोरी के मामले तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे मंदिर और अयोध्या के विकास से भी जोड़ा।
अयोध्या के विकास को लेकर भी भाजपा पर हमला
अखिलेश ने अयोध्या के शहरी विकास पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर के विकास पर जितना पैसा खर्च हुआ, उसके बाद अयोध्या को विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित किया जाना चाहिए था। उन्होंने भाजपा पर जमीनों से जुड़े घोटालों और प्रभावित लोगों को मुआवजा नहीं देने के आरोप भी लगाए। ये राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें अखिलेश यादव के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। सपा प्रमुख ने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो अयोध्या के विकास को इस तरह आगे बढ़ाया जाएगा कि दुनिया के दूसरे बड़े शहरों की तरह वहां आने वाले लोगों को आधुनिक सुविधाएं और बेहतर शहरी ढांचा दिखाई दे।
सहारनपुर दौरे का राजनीतिक संदर्भ
अखिलेश यादव का सहारनपुर दौरा किसी बड़ी जनसभा के तौर पर नहीं था। वह चौधरी रुद्रसैन के आवास पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। उनके दौरे के अगले दिन जयंत चौधरी के रामपुर मनिहारान में कार्यक्रम को लेकर भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा है। ऐसे में अखिलेश का अयोध्या चढ़ावा विवाद को फिर उठाना सिर्फ धार्मिक मुद्दे तक सीमित नहीं माना जा सकता। सपा इसे सरकार की जवाबदेही और प्रशासनिक कार्रवाई से जोड़कर राजनीतिक मुद्दा बना रही है। दूसरी ओर, SIT की रिपोर्ट में जिन लोगों को राहत मिलने की बात सामने आई है, उसकी वास्तविक कानूनी स्थिति और मामले की अन्य जांच प्रक्रियाओं के नतीजे आगे की तस्वीर तय करेंगे।
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