- Hindi News
- देश विदेश
- WHO प्रमुख ने जेपी नड्डा से की मुलाकात, भारत की स्वास्थ्य उपलब्धियों की सराहना
WHO प्रमुख ने जेपी नड्डा से की मुलाकात, भारत की स्वास्थ्य उपलब्धियों की सराहना
Digital Desk
डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस ने जेपी नड्डा से मुलाकात की, जहां भारत ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, TB नियंत्रण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में हुई प्रगति को साझा किया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने तिमोर-लेस्ते की राजधानी डिली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात की। यह बैठक WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की समिति के 79वें सत्र के दौरान हुई।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग पर चर्चा की। बातचीत में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, गैर-संचारी रोगों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और तपेदिक (TB) जैसे प्रमुख मुद्दे शामिल रहे।
दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य सेवाओं की समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास और मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
नड्डा ने उपलब्धियां गिनाईं
WHO की क्षेत्रीय बैठक में जेपी नड्डा ने भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में पिछले वर्षों में हुई प्रगति को सामने रखा।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत का मातृ मृत्यु अनुपात 2014 में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 130 से घटकर 87 हो गया है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में भी 1990 के बाद उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
सरकार ने नवजात शिशुओं के जीवित रहने, टीकाकरण कवरेज और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार को स्वास्थ्य व्यवस्था के विस्तार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों के रूप में रेखांकित किया।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार
WHO के क्षेत्रीय मंच पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा।
भारत को 79वें क्षेत्रीय सत्र के दौरान पिछले एक दशक से मातृ और नवजात टिटनेस के उन्मूलन की स्थिति बनाए रखने के लिए सम्मानित किया गया।
भारत को WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र से दो पुरस्कार मिले। दूसरा सम्मान प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से गैर-संचारी रोगों से निपटने में भारत के नेतृत्व के लिए दिया गया। इसमें उच्च रक्तचाप और मधुमेह के प्रोटोकॉल आधारित उपचार से जुड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों की दिशा में हुई प्रगति भी शामिल है।
नड्डा ने इन उपलब्धियों का श्रेय देश के अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को दिया।
TB नियंत्रण में प्रगति
भारत के स्वास्थ्य एजेंडे में तपेदिक (TB) उन्मूलन की दिशा में प्रयास भी प्रमुख रहे।
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, भारत में TB की घटनाओं में 21 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह गिरावट 12 प्रतिशत रही। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में TB उपचार कवरेज बढ़कर 92 प्रतिशत हो गया है, जबकि वैश्विक औसत 78 प्रतिशत है।
TB Mukt Bharat Abhiyan के तहत जून तक 28 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी थी। करीब 20 लाख लोगों को निवारक TB उपचार भी दिया गया था।
सरकार ने उपचार ले रहे मरीजों की सहायता के लिए Nikshay Mitras यानी सामुदायिक स्वयंसेवकों का नेटवर्क भी विस्तार किया है।
प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
बैठक में भारत की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई।
नड्डा ने Ayushman Arogya Mandirs के बढ़ते नेटवर्क को स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इन केंद्रों पर स्क्रीनिंग, बीमारी की शुरुआती पहचान, बुनियादी उपचार और जरूरत पड़ने पर रेफरल की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
भारत eSanjeevani टेलीमेडिसिन सेवा और ABHA आधारित डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड के जरिए दूरदराज के क्षेत्रों में मरीजों को स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जोड़ने का प्रयास भी कर रहा है।
इससे ग्रामीण, आदिवासी और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की भौगोलिक बाधाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
मेडिकल वर्कफोर्स बढ़ी
भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2014 में 387 से बढ़कर 858 हो गई है। इसी अवधि में MBBS सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1,42,464 हो गई।
पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार मौजूदा मेडिकल कॉलेजों के साथ 157 नए नर्सिंग कॉलेज स्थापित कर रही है।
इन प्रयासों का उद्देश्य खासकर उन क्षेत्रों में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता बढ़ाना है, जहां विशेषज्ञों और अन्य चिकित्सा पेशेवरों की कमी बनी हुई है।
WHO सहयोग पर जोर
नड्डा और टेड्रोस की मुलाकात WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की वार्षिक मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान हुई। इस बैठक में सदस्य देशों ने Dili Declaration on Human Resources for Health: Equity in Specialised Care को अपनाया।
घोषणापत्र में स्वास्थ्यकर्मियों की बेहतर योजना, विशेषज्ञ डॉक्टरों का समान वितरण और ग्रामीण तथा कम सेवा वाले क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
इसमें टेलीमेडिसिन, विशेषज्ञों की पहुंच, कार्य-विभाजन और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की बात भी शामिल है।
भारत ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में इस घोषणा को महत्वपूर्ण कदम बताया।
स्वास्थ्य सबके लिए लक्ष्य
टेड्रोस और नड्डा की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत क्षेत्रीय और वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग में अपनी भूमिका मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
मातृ स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य और TB नियंत्रण में प्रगति के बावजूद बीमारी की रोकथाम, विशेषज्ञ स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और सभी वर्गों तक समान स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना अब भी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं।
बैठक में इसलिए केवल भारत की उपलब्धियों पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि WHO और अन्य देशों के साथ लगातार सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
संक्रामक रोगों, गैर-संचारी रोगों और विशेषज्ञ स्वास्थ्यकर्मियों की कमी जैसी बढ़ती चुनौतियों के बीच नड्डा-टेड्रोस बैठक ने मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

