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विदेश में पढ़ाई की पसंद बदली: 51% भारतीय छात्रों ने जर्मनी को चुना, नौकरी बनी सबसे बड़ा फैक्टर
Digital Desk
upGrad के Transnational Education Report 2026 के अनुसार, भारतीय छात्र अब विदेश में पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी रैंकिंग से ज्यादा नौकरी, करियर ग्रोथ और Return on Investment को महत्व दे रहे हैं।
विदेश में पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। अब केवल प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी या उसकी ग्लोबल रैंकिंग छात्रों के फैसले का आधार नहीं रह गई है। नौकरी के अवसर, करियर ग्रोथ और पढ़ाई पर होने वाले खर्च के मुकाबले मिलने वाला रिटर्न (ROI) तेजी से महत्वपूर्ण हो रहा है। upGrad के Transnational Education Report 2026 में जर्मनी भारतीय छात्रों के बीच सबसे ज्यादा पसंद किया गया डेस्टिनेशन रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच upGrad Study Abroad के शिक्षार्थियों के बीच जर्मनी का हिस्सा 51% एनरोलमेंट रहा। यह आंकड़ा सभी भारतीय छात्रों का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि रिपोर्ट में शामिल upGrad के स्टडी-अब्रॉड लर्नर्स से संबंधित है।
49% छात्रों के लिए नौकरी सबसे बड़ी वजह
upGrad की रिपोर्ट में 53,800 aspirants की काउंसलिंग के दौरान जुटाए गए डेटा का विश्लेषण किया गया। इसमें 49% छात्रों ने बेहतर नौकरी के अवसरों को विदेश में पढ़ाई करने की अपनी प्राथमिक वजह बताया। रिपोर्ट में करियर आउटकम को शिक्षा की गुणवत्ता, स्थायी निवास और लाइफस्टाइल जैसे पारंपरिक कारणों से आगे बताया गया है। upGrad Study Abroad के University Partnerships के वाइस प्रेसिडेंट प्रनीत सिंह के अनुसार, स्टडी-अब्रॉड मार्केट में महत्वपूर्ण बदलाव दिख रहा है और छात्र करियर आउटकम तथा तत्काल ROI पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
अमेरिका-कनाडा के बजाय यूरोप की ओर बढ़ता रुझान
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया अभी भी भारतीय छात्रों के महत्वपूर्ण डेस्टिनेशन हैं, लेकिन बढ़ती लागत और सख्त इमिग्रेशन नीतियों के बीच यूरोप के देशों की ओर रुचि बढ़ रही है। जर्मनी के साथ फ्रांस, स्पेन और फिनलैंड भी छात्रों के विकल्पों में उभर रहे हैं। जर्मनी की लोकप्रियता के पीछे शिक्षा और करियर के बीच बेहतर तालमेल की धारणा महत्वपूर्ण है। खासकर वे छात्र जो विदेश में पढ़ाई का खर्च नियंत्रित रखना चाहते हैं और साथ ही रोजगार के अवसर तलाश रहे हैं, उनके लिए जर्मनी प्रमुख विकल्प बन रहा है।
30 लाख रुपये से कम बजट वाले छात्रों की बड़ी संख्या
रिपोर्ट में विदेश जाने वाले छात्रों की आर्थिक प्रोफाइल में भी बदलाव सामने आया है। 10 में से करीब 7 aspirants ने बताया कि उनका कुल शिक्षा बजट 30 लाख रुपये से कम है। वहीं, लगभग 60% छात्र Tier-2 और Tier-3 शहरों से आते हैं। करीब 65.8% freshers हैं और 73% से अधिक छात्र मास्टर्स डिग्री के लिए विदेश जाने में रुचि रखते हैं। इससे संकेत मिलता है कि विदेश में पढ़ाई अब केवल बड़े शहरों के छात्रों या महंगी और प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में प्रवेश पाने की कोशिश तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों के छात्र भी करियर और रोजगार के नजरिए से विदेशी शिक्षा के विकल्प तलाश रहे हैं।
AI और STEM कोर्स की मांग बढ़ी
करियर-केंद्रित सोच का असर छात्रों की कोर्स पसंद पर भी दिखाई दे रहा है। upGrad के डेटा में STEM शिक्षा की मांग में सालाना आधार पर 18% वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा, उसके Pathways पोर्टफोलियो के आधे कार्यक्रम AI-integrated या AI-first बताए गए हैं। इस बदलाव से यह संकेत मिलता है कि छात्र अब केवल विदेशी डिग्री हासिल करने के बजाय ऐसे कौशल और कोर्स तलाश रहे हैं जिनकी बदलते रोजगार बाजार में उपयोगिता हो।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट भारतीय स्टडी-अब्रॉड बाजार में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है। विदेश में पढ़ाई का फैसला अब केवल “कहां की यूनिवर्सिटी बेहतर है?” तक सीमित नहीं रह गया है। छात्रों के लिए यह सवाल तेजी से “कहां पढ़कर बेहतर करियर बनाया जा सकता है?” में बदल रहा है।
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