नेपाल बाढ़ में 903 मौतें, 4,247 लोग अब भी लापता

Digital Desk

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नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से मौतों का आंकड़ा 903 पहुंच गया है और 4,247 लोग अब भी लापता हैं। ग्लेशियर-चट्टान खिसकने के बाद बचाव अभियान जारी है।

हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर-चट्टान धंसने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई है। हजारों सुरक्षाकर्मी नदी किनारों, मलबे और जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 903 हो गई है, जबकि 4,247 लोग अब भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) की सोमवार सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान छठे दिन भी जारी है। अब तक 10,451 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर खिसकने के बाद आई। इसके बाद पानी, बर्फ, चट्टान और मलबे की तेज धारा ने नदियों का जलस्तर बढ़ा दिया और रास्ते में आने वाले घरों, पुलों, सड़कों तथा जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया।

मौतों का आंकड़ा 900 पार

NDRRMA के ताजा आंकड़ों के अनुसार नेपाल के कई जिलों से 903 शव और मानव अवशेष बरामद किए जा चुके हैं। चितवन में सबसे अधिक 272 शव मिले हैं। इसके बाद नवलपरासी पूर्व में 207, नवलपरासी पश्चिम में 151, नुवाकोट में 95, गोरखा में 62, धादिंग में 55, तनहूं में 37 और रसुवा में 24 मौतें दर्ज की गई हैं।

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चितवन में बड़ी संख्या में शव मिलने के बाद उनकी पहचान और सुरक्षित रखे जाने की समस्या सामने आई। अधिकारियों ने अज्ञात शवों के डीएनए नमूने लेना शुरू किया है। नमूने लेने के बाद कई शवों को देवघाट में दफनाया गया, ताकि भविष्य में डीएनए के जरिए उनकी पहचान की जा सके और परिवारों को अपने परिजनों के अंतिम संस्कार का अवसर मिल सके।

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4,247 लोग अब भी लापता

सरकारी आंकड़ों में 4,247 लोगों के अब तक संपर्क में नहीं आने की पुष्टि हुई है। इनमें स्थानीय निवासियों के अलावा विदेशी नागरिक, सुरक्षा एवं सरकारी कर्मचारी और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं।

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NDRRMA के अनुसार लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक और 933 जलविद्युत परियोजना कर्मी शामिल हैं। नुवाकोट और रसुवा जिलों में भी बड़ी संख्या में लोग अब तक लापता हैं।

अधिकारियों को आशंका है कि कुछ लोग बाढ़ के तेज बहाव में बहकर नेपाल के दक्षिणी हिस्सों तक पहुंच गए होंगे। कुछ शवों के दूर तक बह जाने की आशंका ने पहचान और बरामदगी के काम को और मुश्किल बना दिया है।

जलविद्युत सुरंगों में तलाश

बचाव अभियान का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे लोगों की तलाश है। कई परियोजनाओं में सुरंगें कीचड़, चट्टानों और मलबे से भर गई हैं।

नेपाल की सेना, इंजीनियरों और तकनीकी दलों ने प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में सुरंगों को खोलने का अभियान शुरू किया है। अपर त्रिशूली-3A समेत कई परियोजनाओं में फंसे कर्मचारियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। बचाव दल सुरंगों के प्रवेश मार्गों से मलबा हटाकर अंदर ऑक्सीजन और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाने पर काम कर रहे हैं।

भारत और चीन के तकनीकी विशेषज्ञ भी सुरंगों से जुड़े बचाव अभियान में नेपाली टीमों की मदद कर रहे हैं। लगातार बारिश, बढ़ते जलस्तर और अस्थिर जमीन के कारण अभियान में जोखिम बना हुआ है।

ग्लेशियर-चट्टान खिसकने से तबाही

प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार यह आपदा सामान्य बारिश से आई बाढ़ नहीं थी। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े पैमाने पर खिसकने से भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और पानी नीचे की ओर आया।

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, नेपाल के लिरुंग पीक के दक्षिणी हिस्से में ग्लेशियर के टूटने के बाद आइस-रॉक एवलांच हुआ। इससे पैदा हुआ मलबा 20 किलोमीटर से अधिक दूरी तक बहता हुआ तिब्बत के ग्यिरोंग सीमा क्षेत्र तक पहुंचा। इस घटना ने नदी तंत्र में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचा दिया।

इसके बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र के आसपास के इलाकों में भारी तबाही हुई। कई बस्तियां, सड़कें और पुल बह गए तथा महत्वपूर्ण जलविद्युत ढांचे क्षतिग्रस्त हुए।

दोबारा बाढ़ का खतरा

बचाव दलों के सामने अभी भी खतरा खत्म नहीं हुआ है। अस्थिर पहाड़ी ढलानों, लगातार बदलते मौसम और नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण अचानक दूसरी बाढ़ या भूस्खलन की आशंका बनी हुई है।

तिब्बत के प्रभावित हिस्सों में भी अतिरिक्त मलबे और पानी के जमा होने से खतरा पैदा हुआ है। चीन ने इस क्षेत्र में बचाव और निगरानी अभियान बढ़ाया है। तिब्बत में भी 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की सूचना है। नेपाल और तिब्बत के आंकड़ों को मिलाने पर इस आपदा में क्षेत्रीय स्तर पर मौतों और लापता लोगों की संख्या और अधिक हो जाती है।

नेपाल के अधिकारी नदी के जलस्तर और संभावित नए खतरे पर लगातार नजर रख रहे हैं।

20 हजार से ज्यादा जवान तैनात

नेपाल सरकार ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों को बचाव और राहत अभियान में लगाया है। NDRRMA के अनुसार 20,811 सुरक्षाकर्मी अभियान में शामिल हैं। इनमें नेपाली सेना के 8,722, नेपाल पुलिस के 7,894 और सशस्त्र पुलिस बल के 4,203 जवान शामिल हैं।

हेलीकॉप्टरों के जरिए भी लगातार लोगों को प्रभावित इलाकों से निकाला जा रहा है। अब तक 411 हेलीकॉप्टर उड़ानों के जरिए हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है। राहत सामग्री, भोजन, ईंधन, जनरेटर और चिकित्सा उपकरण भी दुर्गम इलाकों में पहुंचाए जा रहे हैं।

हालांकि, सड़क और पुलों के बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त होने के कारण कई प्रभावित क्षेत्रों तक जमीनी मदद पहुंचाना अभी भी चुनौती बना हुआ है।

लंबी होगी राहत और पुनर्वास की राह

नेपाल के सामने अब दोहरी चुनौती है। पहली प्राथमिकता नदी, मलबे और सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश कर उन्हें बचाना है। दूसरी चुनौती बरामद शवों की पहचान कर उन्हें सम्मानजनक अंतिम संस्कार दिलाना है।

बाढ़ ने आवासीय इलाकों के साथ-साथ सड़क, पुल और जलविद्युत बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। इसलिए बचाव अभियान समाप्त होने के बाद नेपाल को बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्यक्रम शुरू करना होगा।

अधिकारियों का कहना है कि अंतिम नुकसान का आकलन अभी संभव नहीं है। हजारों लोगों की तलाश जारी है और दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में नए शव मिलने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े में और बदलाव हो सकता है।

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