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मध्य प्रदेश के गांवों में अब संपत्ति कर की तैयारी, पक्के मकानों पर ₹500 से ₹1,000 सालाना तक लग सकता है शुल्क
मध्य प्रदेश
दिसंबर तक संपत्तियों की मैपिंग का लक्ष्य, जनवरी 2027 से लागू करने का प्रस्ताव; आदिवासी ब्लॉकों में कर शून्य रखने पर भी विचार
मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में आने वाले समय में संपत्ति कर लागू किया जा सकता है। ग्राम पंचायतों में संपत्तियों का सर्वे और मैपिंग शुरू हो चुकी है, जिसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद जनवरी 2027 से संपत्ति कर लागू करने का प्रस्ताव है। अंतिम दर और नियम अभी तय होना बाकी है। प्रस्तावित व्यवस्था में पक्के मकानों पर सालाना ₹500 से ₹1,000 तक कर लिया जा सकता है, जबकि कच्चे और कवेलू वाले घरों को छूट देने की योजना है। जनजातीय ब्लॉकों में संपत्ति कर शून्य रखने पर भी विचार किया जा रहा है। पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायक घरों और अन्य संपत्तियों की मैपिंग कर रहे हैं।
पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए संपत्ति कर के अलावा प्रकाश कर, सफाई कर और सीवेज शुल्क जैसे विकल्प भी देखे जा रहे हैं। समर्थ पंचायत पोर्टल पर अलग-अलग ग्राम पंचायतों में ऐसे कर और शुल्क के प्रस्ताव दर्ज किए जा रहे हैं। पंचायतों को स्थानीय स्तर पर आय बढ़ाने के नए तरीके तलाशने के लिए पन्ना के मडला गांव का उदाहरण भी दिया गया है। यहां वाहनों से शुल्क लिया जाता है, जिससे पंचायत को सालाना करीब ₹2.5 लाख से ₹3 लाख की आय होती है।
संपत्ति कर से पहले गांवों में जलकर व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। परिवारों से करीब ₹60 से ₹120 प्रतिमाह जलकर लिया जा रहा है, जबकि नए नल कनेक्शन के लिए अलग शुल्क निर्धारित है। अंत्योदय परिवारों, विधवा और दिव्यांगजन जैसे बेहद जरूरतमंद परिवारों के लिए जलकर में छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है। जलकर नहीं देने या पानी का गलत इस्तेमाल करने पर पानी समिति कार्रवाई कर सकती है। वाहन धोने, मवेशियों को नहलाने, कृषि कार्य में नल के पानी का इस्तेमाल करने या सीधे टुल्लू पंप जोड़ने पर जुर्माने और कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई का प्रावधान है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पानी, स्वच्छता और साफ-सफाई से जुड़े कामों के लिए ‘वॉश’ कमेटी भी काम करेगी। वहीं नल-जल योजनाओं की मरम्मत के लिए जनपद स्तर पर एजेंसियों की मदद ली जाएगी और जरूरी मरम्मत सामग्री की दरें निर्धारित की जाएंगी। जलकर व्यवस्था की निगरानी के लिए बनने वाली 20 सदस्यीय पानी समिति में 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी। इसका उद्देश्य गांवों में पेयजल व्यवस्था और उससे जुड़े फैसलों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
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