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पश्चिम बंगाल: BJP के जीतने के बाद आसनसोल में सालों से बंद दुर्गा मंदिर फिर खुला, लोगों ने जश्न का माहौल
नेशनल डेस्क
आसनसोल के बस्तिन बाजार में वर्षों से बंद दुर्गा मंदिर खुला। श्रद्धालुओं में खुशी की लहर, इलाके में धार्मिक उत्सव जैसा माहौल बन गया।
पश्चिम बंगाल के आसनसोल शहर में सोमवार को उस वक्त माहौल बदल गया जब बस्तिन बाजार इलाके में स्थित श्री-श्री दुर्गामाता चैरिटेबल ट्रस्ट के दुर्गा मंदिर के दरवाजे वर्षों बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, वहां मौजूद लोगों की आंखों में भावनाएं साफ झलक रही थीं। कई श्रद्धालु सीधे मंदिर परिसर में पहुंचे, मां दुर्गा के जयकारे लगाए और पूजा-अर्चना शुरू कर दी। लंबे समय से बंद पड़े इस धार्मिक स्थल के खुलने को लोगों ने एक भावनात्मक पल की तरह देखा और इसे स्थानीय आस्था की बड़ी जीत बताया।
इलाके में अचानक धार्मिक उत्साह का माहौल बन गया। कहीं ढोल-नगाड़ों की आवाज, तो कहीं लोग हाथ जोड़कर मां के सामने खड़े नजर आए। बताया जा रहा है कि यह मंदिर कई सालों से किसी न किसी विवाद या प्रशासनिक स्थिति के चलते नियमित रूप से नहीं खुल पा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि साल में सिर्फ दुर्गा पूजा और लक्ष्मी पूजा जैसे खास मौकों पर ही मंदिर के दरवाजे खोले जाते थे, बाकी समय यह बंद रहता था। इससे आसपास के श्रद्धालु लगातार असंतोष जताते रहे और लंबे समय से इसे पूरे साल खोलने की मांग भी उठती रही।
स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रम के बाद इस मामले को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में पश्चिम बर्धमान जिले में राजनीतिक बदलाव देखने को मिला, जिसके बाद मंदिर को लेकर भी नई गतिविधियां शुरू हुईं। जानकारी के मुताबिक, आसनसोल उत्तर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विजयी उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान यह आश्वासन दिया था कि अगर वे जीतते हैं तो मंदिर को साल भर श्रद्धालुओं के लिए खोलने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं और इसे लोग अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।
चुनाव परिणाम के बाद मंदिर खुलने की घटना को कई लोग एक संयोग मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे लंबे समय से चली आ रही मांगों के पूरा होने के रूप में देख रहे हैं। बताया यह भी जा रहा है कि जीत के बाद कृष्णेंदु मुखर्जी मंदिर पहुंचे और वहां पूजा-अर्चना कर कपाट खुलवाने की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद से ही इलाके में लोगों की भीड़ बढ़ने लगी और मंदिर परिसर में लगातार श्रद्धालुओं का आना-जाना शुरू हो गया। कई लोगों ने इसे अपने लिए भावनात्मक क्षण बताया और कहा कि वे इस दिन का वर्षों से इंतजार कर रहे थे।
मंदिर के खुलने के बाद बस्तिन बाजार इलाके में चहल-पहल भी बढ़ गई है। छोटे दुकानदारों से लेकर आसपास के व्यापारियों तक, सभी को उम्मीद है कि अब नियमित रूप से श्रद्धालुओं की आवाजाही से स्थानीय कारोबार को फायदा मिलेगा। पूजा सामग्री, फूल-मालाओं और प्रसाद की बिक्री में भी तेजी देखने को मिल रही है। वहीं, कुछ बुजुर्ग श्रद्धालुओं का कहना है कि यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थान नहीं बल्कि इलाके की पहचान भी रहा है, और इसके नियमित रूप से खुलने से समुदाय में जुड़ाव और मजबूत होगा।
हालांकि, पूरे घटनाक्रम पर प्रशासनिक स्तर से अभी विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर माहौल पूरी तरह धार्मिक उत्सव जैसा बना हुआ है। लोग इसे एक नई शुरुआत के रूप में देख रहे हैं, जहां आस्था और उम्मीद दोनों साथ नजर आ रही हैं।
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पश्चिम बंगाल: BJP के जीतने के बाद आसनसोल में सालों से बंद दुर्गा मंदिर फिर खुला, लोगों ने जश्न का माहौल
नेशनल डेस्क
पश्चिम बंगाल के आसनसोल शहर में सोमवार को उस वक्त माहौल बदल गया जब बस्तिन बाजार इलाके में स्थित श्री-श्री दुर्गामाता चैरिटेबल ट्रस्ट के दुर्गा मंदिर के दरवाजे वर्षों बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, वहां मौजूद लोगों की आंखों में भावनाएं साफ झलक रही थीं। कई श्रद्धालु सीधे मंदिर परिसर में पहुंचे, मां दुर्गा के जयकारे लगाए और पूजा-अर्चना शुरू कर दी। लंबे समय से बंद पड़े इस धार्मिक स्थल के खुलने को लोगों ने एक भावनात्मक पल की तरह देखा और इसे स्थानीय आस्था की बड़ी जीत बताया।
इलाके में अचानक धार्मिक उत्साह का माहौल बन गया। कहीं ढोल-नगाड़ों की आवाज, तो कहीं लोग हाथ जोड़कर मां के सामने खड़े नजर आए। बताया जा रहा है कि यह मंदिर कई सालों से किसी न किसी विवाद या प्रशासनिक स्थिति के चलते नियमित रूप से नहीं खुल पा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि साल में सिर्फ दुर्गा पूजा और लक्ष्मी पूजा जैसे खास मौकों पर ही मंदिर के दरवाजे खोले जाते थे, बाकी समय यह बंद रहता था। इससे आसपास के श्रद्धालु लगातार असंतोष जताते रहे और लंबे समय से इसे पूरे साल खोलने की मांग भी उठती रही।
स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रम के बाद इस मामले को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में पश्चिम बर्धमान जिले में राजनीतिक बदलाव देखने को मिला, जिसके बाद मंदिर को लेकर भी नई गतिविधियां शुरू हुईं। जानकारी के मुताबिक, आसनसोल उत्तर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विजयी उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान यह आश्वासन दिया था कि अगर वे जीतते हैं तो मंदिर को साल भर श्रद्धालुओं के लिए खोलने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं और इसे लोग अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।
चुनाव परिणाम के बाद मंदिर खुलने की घटना को कई लोग एक संयोग मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे लंबे समय से चली आ रही मांगों के पूरा होने के रूप में देख रहे हैं। बताया यह भी जा रहा है कि जीत के बाद कृष्णेंदु मुखर्जी मंदिर पहुंचे और वहां पूजा-अर्चना कर कपाट खुलवाने की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद से ही इलाके में लोगों की भीड़ बढ़ने लगी और मंदिर परिसर में लगातार श्रद्धालुओं का आना-जाना शुरू हो गया। कई लोगों ने इसे अपने लिए भावनात्मक क्षण बताया और कहा कि वे इस दिन का वर्षों से इंतजार कर रहे थे।
मंदिर के खुलने के बाद बस्तिन बाजार इलाके में चहल-पहल भी बढ़ गई है। छोटे दुकानदारों से लेकर आसपास के व्यापारियों तक, सभी को उम्मीद है कि अब नियमित रूप से श्रद्धालुओं की आवाजाही से स्थानीय कारोबार को फायदा मिलेगा। पूजा सामग्री, फूल-मालाओं और प्रसाद की बिक्री में भी तेजी देखने को मिल रही है। वहीं, कुछ बुजुर्ग श्रद्धालुओं का कहना है कि यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थान नहीं बल्कि इलाके की पहचान भी रहा है, और इसके नियमित रूप से खुलने से समुदाय में जुड़ाव और मजबूत होगा।
हालांकि, पूरे घटनाक्रम पर प्रशासनिक स्तर से अभी विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर माहौल पूरी तरह धार्मिक उत्सव जैसा बना हुआ है। लोग इसे एक नई शुरुआत के रूप में देख रहे हैं, जहां आस्था और उम्मीद दोनों साथ नजर आ रही हैं।
