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अमेरिका-इजराइल का दावा—अब तक 5000 ठिकानों को बनाया निशाना, जंग के 11वें दिन भी सैन्य कार्रवाई जारी
अंतराष्ट्रीय न्यूज
ईरान को ट्रम्प की चेतावनी: तेल सप्लाई रोकी तो 20 गुना ताकत से हमला
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष के 11वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रम्प ने कहा कि यदि ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के महत्वपूर्ण मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट डालने की कोशिश की तो अमेरिका उस पर “20 गुना ज्यादा ताकत से हमला” करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुश्मन के पूरी तरह खत्म होने तक सैन्य अभियान जारी रहेगा।
फ्लोरिडा के डोरल शहर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने दावा किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के 5000 से अधिक सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि कुछ अहम ठिकानों को फिलहाल जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई में उनका इस्तेमाल किया जा सके।
ट्रम्प के अनुसार अमेरिका और इजराइल ने इस सैन्य अभियान में “काफी बड़ी बढ़त” हासिल कर ली है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सैन्य ऑपरेशन अभी जारी रहेगा, लेकिन संभावना है कि यह संघर्ष अपेक्षाकृत जल्दी समाप्त हो सकता है।
इस बीच युद्ध के मैदान में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान ने सोमवार को कुवैत में स्थित अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाते हुए मिसाइल दागी। इसके जवाब में अमेरिकी नौसेना ने फारस की खाड़ी में तीन ईरानी जहाजों पर हमला किया। वहीं ईरान ने इजराइल पर भारी वारहेड वाली मिसाइलें दागीं और बहरीन की एक सरकारी तेल रिफाइनरी को ड्रोन से निशाना बनाया।
क्षेत्रीय स्तर पर भी इस संघर्ष का असर दिखाई देने लगा है। तुर्किये ने अपने हवाई क्षेत्र में पहुंची एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को नाटो के एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा मार गिराए जाने के बाद ईरान के राजदूत को तलब किया है। मिसाइल का मलबा तुर्किये के पूर्वी शहर गाजियांतेप के पास गिरा, हालांकि किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है।
संघर्ष का मानवीय असर भी सामने आने लगा है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) के मुताबिक लेबनान में अब तक 83 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 254 बच्चे घायल हुए हैं। संस्था ने चेतावनी दी है कि लगातार जारी हिंसा से बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। यूनीसेफ ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
इसी दौरान ट्रम्प ने एक अलग मानवीय मुद्दे पर भी बयान दिया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से अपील की कि वह ईरान की महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को शरण दे। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के दौरान इन खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान नहीं गाया था, जिसे ईरान में सरकार विरोधी कदम माना गया। ट्रम्प का कहना है कि यदि उन्हें ईरान वापस भेजा गया तो उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और अमेरिका उन्हें आश्रय देने के लिए तैयार है।
वैश्विक बाजारों पर भी इस संघर्ष का असर पड़ रहा है। ट्रम्प के इस बयान के बाद कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। एशियाई कारोबार में तेल की कीमत करीब 8 से 9 प्रतिशत तक गिर गई, जिससे जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिली।
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अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष के 11वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रम्प ने कहा कि यदि ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के महत्वपूर्ण मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट डालने की कोशिश की तो अमेरिका उस पर “20 गुना ज्यादा ताकत से हमला” करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुश्मन के पूरी तरह खत्म होने तक सैन्य अभियान जारी रहेगा।
फ्लोरिडा के डोरल शहर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने दावा किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के 5000 से अधिक सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि कुछ अहम ठिकानों को फिलहाल जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई में उनका इस्तेमाल किया जा सके।
ट्रम्प के अनुसार अमेरिका और इजराइल ने इस सैन्य अभियान में “काफी बड़ी बढ़त” हासिल कर ली है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सैन्य ऑपरेशन अभी जारी रहेगा, लेकिन संभावना है कि यह संघर्ष अपेक्षाकृत जल्दी समाप्त हो सकता है।
इस बीच युद्ध के मैदान में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान ने सोमवार को कुवैत में स्थित अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाते हुए मिसाइल दागी। इसके जवाब में अमेरिकी नौसेना ने फारस की खाड़ी में तीन ईरानी जहाजों पर हमला किया। वहीं ईरान ने इजराइल पर भारी वारहेड वाली मिसाइलें दागीं और बहरीन की एक सरकारी तेल रिफाइनरी को ड्रोन से निशाना बनाया।
क्षेत्रीय स्तर पर भी इस संघर्ष का असर दिखाई देने लगा है। तुर्किये ने अपने हवाई क्षेत्र में पहुंची एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को नाटो के एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा मार गिराए जाने के बाद ईरान के राजदूत को तलब किया है। मिसाइल का मलबा तुर्किये के पूर्वी शहर गाजियांतेप के पास गिरा, हालांकि किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है।
संघर्ष का मानवीय असर भी सामने आने लगा है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) के मुताबिक लेबनान में अब तक 83 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 254 बच्चे घायल हुए हैं। संस्था ने चेतावनी दी है कि लगातार जारी हिंसा से बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। यूनीसेफ ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
इसी दौरान ट्रम्प ने एक अलग मानवीय मुद्दे पर भी बयान दिया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से अपील की कि वह ईरान की महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को शरण दे। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के दौरान इन खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान नहीं गाया था, जिसे ईरान में सरकार विरोधी कदम माना गया। ट्रम्प का कहना है कि यदि उन्हें ईरान वापस भेजा गया तो उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और अमेरिका उन्हें आश्रय देने के लिए तैयार है।
वैश्विक बाजारों पर भी इस संघर्ष का असर पड़ रहा है। ट्रम्प के इस बयान के बाद कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। एशियाई कारोबार में तेल की कीमत करीब 8 से 9 प्रतिशत तक गिर गई, जिससे जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिली।
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