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अमेरिका ने 112 और अप्रवासी भारतीयों को किया डिपोर्ट, अमृतसर में विमान की लैंडिंग
JAGRAN DESK
अमेरिका से 112 अप्रवासी भारतीयों को लेकर तीसरा अमेरिकी विमान अमृतसर लैंड कर चुका है. इससे पहले अमेरिका से 116 निर्वासितों को लेकर एक अमेरिकी सैन्य विमान शनिवार देर रात अमृतसर एयरपोर्ट पर पहुंचा था. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अमृतसर एयरपोर्ट पर अमेरिकी विमानों के उतरने को लेकर केंद्र पर निशाना साध रहे हैं. उन्होंने कहा था, 'हमारे पवित्र शहर को निर्वासन केंद्र मत बनाइए.
अमेरिका से 112 अप्रवासी भारतीयों को लेकर तीसरा विमान अमृतसर एयरपोर्ट पर लैंड कर चुका है. जानकारी के मुताबिक इन 112 भारतीयों में 31 पंजाब, 44 हरियाणा, गुजरात के 33 और अन्य राज्यों के रहने वाले हैं. इन्हें अमेरिकी सरकार ने अवैध रूप से अमेरिका में रहने का दोषी पाया है, जिसके बाद से इनपर कार्रवाई की गई है.
अमेरिका से निर्वासित भारतीयों से पुलिस की ओर से बायोमेट्रिक और पूछताछ की जा रही है. इसके बाद इन लोगों को संबंधित पुलिस स्टेशनों के हवाले किया जाएगा. डिपोर्ट किये गए पंजाबियों में 2 महिलाएं भी शामिल हैं. अमेरिका ने 5 फरवरी को पहली बार 104 अप्रवासियों को भारत भेजा था. इनके हाथों में हथकड़ियों और पैरों में बेड़ियों बांधकर लाया गया था. वहीं अब तक की बात करें तो 332 अवैध अप्रवासी भारतीय देश पहुंच चुके हैं.
मेरिकी सैन्य विमान अमृतसर एयरपोर्ट पहुंचा
वहीं शनिवार देर रात अमेरिका से 116 निर्वासितों को लेकर एक अमेरिकी सैन्य विमान अमृतसर एयरपोर्ट पर पहुंचा था. शनिवार रात लगभग 11:35 बजे एयरपोर्ट पर उतरे सी-17 विमान के जरिए निर्वासित भारतीयों के दूसरे जत्थे को भारत लाया गया था. इनमें से 65 पंजाब से, 33 हरियाणा से, आठ गुजरात से, दो-दो उत्तर प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र और राजस्थान से और एक-एक हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से हैं. अमृतसर पहुंचने पर उन्हें भोजन उपलब्ध कराया गया, जिससे थकाऊ यात्रा के बाद उन्हें काफी राहत मिली. सूत्रों के अनुसार, दूसरे समूह के ज्यादातर निर्वासितों की उम्र 18 से 30 साल के बीच थी.
निर्वासित भारतीयों ने सुनाई आपबीती
वहीं शनिवार रात अमृतसर पहुंचे निर्वासितों ने अमेरिका तक की अपनी यात्रा के दौरान हुईं परेशानियों के बारे में बताया.पंजाब के फिरोजपुर जिले में अपने गांव चांदीवाला पहुंचे सौरव (20) ने बताया कि 27 जनवरी को जब वह सीमा पार कर देश (अमेरिका) में घुसने की कोशिश कर रहा था तो उसे अमेरिकी अधिकारियों ने पकड़ लिया था. वह पिछले साल 17 दिसंबर को घर से अमेरिका के लिए निकला था.
सौरव ने कहा कि हमें 18 दिनों तक एक शिविर (हिरासत केंद्र) में रखा गया. उन्होंने कहा कि उनके मोबाइल फोन ले लिए गए थे. सौरव ने कहा कि परसों हमें बताया गया कि हमें दूसरे शिविर में ले जाया जाएगा. जब हमें विमान में बिठाया गया तो उन्होंने कहा कि हमें भारत ले जाया जा रहा है. सौरव ने बताया कि उनके परिवार ने उन्हें विदेश भेजने के लिए 45-46 लाख रुपए खर्च किए. उन्होंने कहा, दो एकड़ कृषि भूमि बेची गई और कमीशन एजेंट से पैसे उधार लिए गए.
18 दिनों तक हिरासत में रखा गया
गुरदासपुर जिले के खानोवाल घुमन गांव के निवासी हरजीत सिंह को उनके चचेरे भाई के साथ अमेरिका से निर्वासित कर दिया गया. उन्होंने कहा कि हम रविवार सुबह करीब छह बजे घर पहुंचे.उन्होंने कहा, हमें 27 जनवरी को अमेरिकी सीमा पार करते समय पकड़ा गया और 18 दिनों तक हिरासत केंद्र में रखा गया. हमें 13 फरवरी को निर्वासित कर दिया गया और हमारे हाथों में हथकड़ी और पैरों में जंजीरें डाल दी गईं.
अमेरिका जाने पर 90 लाख रुपए खर्च
हरजीत ने बताया कि परिवार ने उनके और उनके चचेरे भाई के अमेरिका जाने पर 90 लाख रुपए खर्च किए. हरजीत ने कहा, ‘हमें आश्वासन दिया गया था कि हमें कानूनी तरीके से अमेरिका ले जाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.’ होशियारपुर जिले के बोदल गांव निवासी मंताज सिंह (22) ने बताया कि जैसे ही वह अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें अमेरिकी सीमा गश्ती दल ने पकड़ लिया. उन्होंने बताया कि ‘डंकी रूट’ के जरिए वहां ले जाया गया. ‘डंकी रूट’ अमेरिका में प्रवेश करने के लिए प्रवासियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक अवैध और जोखिम भरा रास्ता है.
मंत्री ने एयरपोर्ट पर की मुलाकात
पंजाब के एनआरआई मामलों के मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल और बिजली मंत्री हरभजन सिंह ने एयरपोर्ट पर कुछ निर्वासितों से मुलाकात की. धालीवाल ने उनसे कहा कि राज्य सरकार चट्टान की तरह उनके साथ खड़ी है. उन्होंने उनसे हिम्मत न हारने को कहा.निर्वासितों में से एक व्यक्ति ने धालीवाल को बताया कि उसने और उसके रिश्ते के भाई ने अमेरिका पहुंचने के लिए 40-40 लाख रुपए खर्च किए. दोनों पंजाब के गुरदासपुर जिले के कलानौर के पास एक गांव के रहने वाले हैं.
ट्रैवल एजेंट को सलाखों के पीछे भेजेगी सरकार
धालीवाल ने कहा कि सरकार युवाओं को ठगने वाले ट्रैवल एजेंट को सलाखों के पीछे भेजेगी और उन्होंने निर्वासितों से आगे आकर अपनी शिकायत दर्ज कराने का आग्रह किया.इससे पहले, पांच फरवरी को 104 अवैध भारतीय प्रवासियों को लेकर एक अमेरिकी सैन्य विमान अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरा था. इनमें से 33-33 हरियाणा और गुजरात से थे, जबकि 30 पंजाब से थे. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अमृतसर एयरपोर्ट पर निर्वासित लोगों को लाने वाले अमेरिकी विमानों के उतरने को लेकर केंद्र पर निशाना साध रहे हैं.उन्होंने कहा था, ‘हमारे पवित्र शहर को निर्वासन केंद्र मत बनाइए.
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अमेरिका ने 112 और अप्रवासी भारतीयों को किया डिपोर्ट, अमृतसर में विमान की लैंडिंग
JAGRAN DESK
अमेरिका से 112 अप्रवासी भारतीयों को लेकर तीसरा विमान अमृतसर एयरपोर्ट पर लैंड कर चुका है. जानकारी के मुताबिक इन 112 भारतीयों में 31 पंजाब, 44 हरियाणा, गुजरात के 33 और अन्य राज्यों के रहने वाले हैं. इन्हें अमेरिकी सरकार ने अवैध रूप से अमेरिका में रहने का दोषी पाया है, जिसके बाद से इनपर कार्रवाई की गई है.
अमेरिका से निर्वासित भारतीयों से पुलिस की ओर से बायोमेट्रिक और पूछताछ की जा रही है. इसके बाद इन लोगों को संबंधित पुलिस स्टेशनों के हवाले किया जाएगा. डिपोर्ट किये गए पंजाबियों में 2 महिलाएं भी शामिल हैं. अमेरिका ने 5 फरवरी को पहली बार 104 अप्रवासियों को भारत भेजा था. इनके हाथों में हथकड़ियों और पैरों में बेड़ियों बांधकर लाया गया था. वहीं अब तक की बात करें तो 332 अवैध अप्रवासी भारतीय देश पहुंच चुके हैं.
मेरिकी सैन्य विमान अमृतसर एयरपोर्ट पहुंचा
वहीं शनिवार देर रात अमेरिका से 116 निर्वासितों को लेकर एक अमेरिकी सैन्य विमान अमृतसर एयरपोर्ट पर पहुंचा था. शनिवार रात लगभग 11:35 बजे एयरपोर्ट पर उतरे सी-17 विमान के जरिए निर्वासित भारतीयों के दूसरे जत्थे को भारत लाया गया था. इनमें से 65 पंजाब से, 33 हरियाणा से, आठ गुजरात से, दो-दो उत्तर प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र और राजस्थान से और एक-एक हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से हैं. अमृतसर पहुंचने पर उन्हें भोजन उपलब्ध कराया गया, जिससे थकाऊ यात्रा के बाद उन्हें काफी राहत मिली. सूत्रों के अनुसार, दूसरे समूह के ज्यादातर निर्वासितों की उम्र 18 से 30 साल के बीच थी.
निर्वासित भारतीयों ने सुनाई आपबीती
वहीं शनिवार रात अमृतसर पहुंचे निर्वासितों ने अमेरिका तक की अपनी यात्रा के दौरान हुईं परेशानियों के बारे में बताया.पंजाब के फिरोजपुर जिले में अपने गांव चांदीवाला पहुंचे सौरव (20) ने बताया कि 27 जनवरी को जब वह सीमा पार कर देश (अमेरिका) में घुसने की कोशिश कर रहा था तो उसे अमेरिकी अधिकारियों ने पकड़ लिया था. वह पिछले साल 17 दिसंबर को घर से अमेरिका के लिए निकला था.
सौरव ने कहा कि हमें 18 दिनों तक एक शिविर (हिरासत केंद्र) में रखा गया. उन्होंने कहा कि उनके मोबाइल फोन ले लिए गए थे. सौरव ने कहा कि परसों हमें बताया गया कि हमें दूसरे शिविर में ले जाया जाएगा. जब हमें विमान में बिठाया गया तो उन्होंने कहा कि हमें भारत ले जाया जा रहा है. सौरव ने बताया कि उनके परिवार ने उन्हें विदेश भेजने के लिए 45-46 लाख रुपए खर्च किए. उन्होंने कहा, दो एकड़ कृषि भूमि बेची गई और कमीशन एजेंट से पैसे उधार लिए गए.
18 दिनों तक हिरासत में रखा गया
गुरदासपुर जिले के खानोवाल घुमन गांव के निवासी हरजीत सिंह को उनके चचेरे भाई के साथ अमेरिका से निर्वासित कर दिया गया. उन्होंने कहा कि हम रविवार सुबह करीब छह बजे घर पहुंचे.उन्होंने कहा, हमें 27 जनवरी को अमेरिकी सीमा पार करते समय पकड़ा गया और 18 दिनों तक हिरासत केंद्र में रखा गया. हमें 13 फरवरी को निर्वासित कर दिया गया और हमारे हाथों में हथकड़ी और पैरों में जंजीरें डाल दी गईं.
अमेरिका जाने पर 90 लाख रुपए खर्च
हरजीत ने बताया कि परिवार ने उनके और उनके चचेरे भाई के अमेरिका जाने पर 90 लाख रुपए खर्च किए. हरजीत ने कहा, ‘हमें आश्वासन दिया गया था कि हमें कानूनी तरीके से अमेरिका ले जाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.’ होशियारपुर जिले के बोदल गांव निवासी मंताज सिंह (22) ने बताया कि जैसे ही वह अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें अमेरिकी सीमा गश्ती दल ने पकड़ लिया. उन्होंने बताया कि ‘डंकी रूट’ के जरिए वहां ले जाया गया. ‘डंकी रूट’ अमेरिका में प्रवेश करने के लिए प्रवासियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक अवैध और जोखिम भरा रास्ता है.
मंत्री ने एयरपोर्ट पर की मुलाकात
पंजाब के एनआरआई मामलों के मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल और बिजली मंत्री हरभजन सिंह ने एयरपोर्ट पर कुछ निर्वासितों से मुलाकात की. धालीवाल ने उनसे कहा कि राज्य सरकार चट्टान की तरह उनके साथ खड़ी है. उन्होंने उनसे हिम्मत न हारने को कहा.निर्वासितों में से एक व्यक्ति ने धालीवाल को बताया कि उसने और उसके रिश्ते के भाई ने अमेरिका पहुंचने के लिए 40-40 लाख रुपए खर्च किए. दोनों पंजाब के गुरदासपुर जिले के कलानौर के पास एक गांव के रहने वाले हैं.
ट्रैवल एजेंट को सलाखों के पीछे भेजेगी सरकार
धालीवाल ने कहा कि सरकार युवाओं को ठगने वाले ट्रैवल एजेंट को सलाखों के पीछे भेजेगी और उन्होंने निर्वासितों से आगे आकर अपनी शिकायत दर्ज कराने का आग्रह किया.इससे पहले, पांच फरवरी को 104 अवैध भारतीय प्रवासियों को लेकर एक अमेरिकी सैन्य विमान अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरा था. इनमें से 33-33 हरियाणा और गुजरात से थे, जबकि 30 पंजाब से थे. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अमृतसर एयरपोर्ट पर निर्वासित लोगों को लाने वाले अमेरिकी विमानों के उतरने को लेकर केंद्र पर निशाना साध रहे हैं.उन्होंने कहा था, ‘हमारे पवित्र शहर को निर्वासन केंद्र मत बनाइए.
