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अरक्कोनम-रेनिगुंटा रेल विस्तार से आंध्र प्रदेश में विकास को मिलेगी रफ्तार
Digital Desk
पवन कल्याण ने अरक्कोनम-रेनिगुंटा तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना का स्वागत करते हुए कहा कि इससे आंध्र प्रदेश में पर्यटन, व्यापार और लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा मिलेगा।
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने केंद्र सरकार की ओर से अरक्कोनम-रेनिगुंटा के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के निर्माण को मंजूरी दिए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आंध्र प्रदेश में पर्यटन, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
करीब 77 किलोमीटर लंबी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना 9 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति द्वारा मंजूर पांच रेलवे परियोजनाओं के पैकेज का हिस्सा है। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत करीब ₹10,021 करोड़ है और इनके जरिए आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में करीब 540 किलोमीटर अतिरिक्त रेल क्षमता विकसित होगी।
पवन कल्याण ने जताई खुशी
पवन कल्याण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर परियोजना को आंध्र प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे तिरुपति और रायलसीमा क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि अतिरिक्त रेल लाइन बनने से मौजूदा मार्ग पर भीड़ और ट्रैफिक का दबाव कम होगा। इससे यात्रियों की आवाजाही सुगम होने के साथ माल परिवहन की क्षमता भी बढ़ेगी।
उपमुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का भी आभार जताया। उन्होंने इसे राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
77 किलोमीटर का रेल विस्तार
अरक्कोनम-रेनिगुंटा परियोजना के तहत मौजूदा रेल कॉरिडोर में दो नई लाइनें जोड़ी जाएंगी। यह मार्ग तमिलनाडु को आंध्र प्रदेश से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क का हिस्सा है।
रेल मंत्रालय ने इसे रेल क्षमता बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल किया है। पहले के योजना दस्तावेजों में इसकी लंबाई करीब 76.56 किलोमीटर बताई गई थी, जबकि मंत्रिमंडल की मंजूरी में इसे 77 किलोमीटर की परियोजना के रूप में दर्ज किया गया है।
नई लाइनों से यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
तिरुपति की कनेक्टिविटी होगी बेहतर
परियोजना का सबसे बड़ा लाभ तिरुपति जैसे प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र को मिलने की संभावना है।
रेलवे के अनुसार, मंजूर की गई मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से तिरुपति, तिरुत्तनी और तिरुचनूर स्थित श्री पद्मावती अम्मावारी मंदिर जैसे प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
रेनिगुंटा के आसपास रेल क्षमता बढ़ने से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकती है। इससे तिरुपति के साथ-साथ पूरे रायलसीमा क्षेत्र के पर्यटन कारोबार को फायदा मिलने की उम्मीद है।
व्यापार और माल ढुलाई को फायदा
पवन कल्याण ने परियोजना की व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षमता पर भी जोर दिया।
रेल मंत्रालय के अनुसार, व्यापक मल्टी-ट्रैकिंग कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना है। इसे PM Gati Shakti के तहत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करने से भी जोड़ा गया है।
अरक्कोनम-रेनिगुंटा कॉरिडोर आंध्र प्रदेश और उसके आसपास के क्षेत्रों में माल परिवहन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अतिरिक्त रेल क्षमता से बढ़ती माल ढुलाई की मांग को संभालने और औद्योगिक तथा परिवहन केंद्रों के बीच संपर्क बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
52 लाख लोगों को लाभ
केंद्र द्वारा मंजूर पांच रेलवे परियोजनाएं आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों को कवर करेंगी।
सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से करीब 2,121 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इन गांवों की संयुक्त आबादी लगभग 52 लाख बताई गई है।
परियोजनाओं को रोजगार सृजन, क्षेत्रीय विकास और बेहतर परिवहन व्यवस्था से भी जोड़ा गया है।
बेहतर रेल संपर्क से आर्थिक केंद्रों और बाजारों के बीच आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है, जिससे नियमित यात्री और माल परिवहन पर निर्भर कारोबार को फायदा हो सकता है।
47 MTPA बढ़ेगी माल क्षमता
पूरे मल्टी-ट्रैकिंग पैकेज से करीब 47 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता पैदा होने का अनुमान है।
रेल मंत्रालय के मुताबिक, कोयला, सीमेंट, लौह एवं इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, खाद्यान्न, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक जैसे सामानों के परिवहन को अतिरिक्त क्षमता से फायदा मिल सकता है।
माल ढुलाई में रेल की हिस्सेदारी बढ़ने से लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और सड़कों पर मालवाहक वाहनों का दबाव घटाने में भी मदद मिल सकती है।
सरकार ने रेल क्षमता बढ़ने से तेल की खपत और कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की संभावना भी जताई है।
बड़े रेल विस्तार का हिस्सा
अरक्कोनम-रेनिगुंटा विस्तार दक्षिण भारत में चल रहे व्यापक रेलवे बुनियादी ढांचा विकास का हिस्सा है। पांचों परियोजनाओं की संयुक्त अनुमानित लागत करीब ₹10,021 करोड़ है।
अन्य मंजूर परियोजनाओं में व्हाइटफील्ड-बैंगारपेट तीसरी और चौथी लाइन, होसुर-ओमलूर डबलिंग, सलेम-करूर-दिंडीगुल डबलिंग और सिकंदराबाद-काजीपेट मल्टी-ट्रैकिंग शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश के लिए अरक्कोनम-रेनिगुंटा परियोजना विशेष रूप से पर्यटन और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।
अब मुख्य चुनौती परियोजना का समय पर निर्माण और मौजूदा रेल नेटवर्क के साथ उसका प्रभावी एकीकरण होगी। यदि काम निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो अतिरिक्त रेल क्षमता तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों तथा आर्थिक केंद्रों के बीच अधिक भरोसेमंद संपर्क तैयार कर सकती है।
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