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अमेरिका में B-52 विमान हादसा, आठ लोगों की मौत
Digital Desk
कैलिफोर्निया के एडवर्ड्स एयरबेस पर टेकऑफ के तुरंत बाद भीषण दुर्घटना, रूस में भी समान दिन Tu-22M3 क्रैश
कैलिफोर्निया के एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर सोमवार की सुबह एक बड़ा सैन्य हादसा सामने आया, जब अमेरिकी वायुसेना का B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर टेकऑफ के कुछ ही पलों बाद अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक विमान एक नियमित परीक्षण मिशन पर था और उड़ान भरते ही वह संतुलन खो बैठा और रनवे के करीब ही आग के गोले में बदल गया। हादसा इतना तेज था कि आसपास मौजूद कर्मचारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अमेरिकी वायुसेना ने बाद में पुष्टि की कि विमान में सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई है। यह घटना दक्षिणी कैलिफोर्निया के मोजावे रेगिस्तान क्षेत्र में स्थित इस महत्वपूर्ण एयरबेस पर हुई, जहां आमतौर पर परीक्षण और प्रशिक्षण उड़ानें होती रहती हैं। हादसे के तुरंत बाद पूरे इलाके में धुएं का घना गुबार उठता देखा गया, जो कई किलोमीटर दूर से भी दिखाई दे रहा था। स्थानीय लोगों और सैन्य कर्मियों के अनुसार विस्फोट के बाद रनवे के आसपास का हिस्सा पूरी तरह जलकर काले मलबे में तब्दील हो गया। कुछ वीडियो फुटेज में देखा गया कि आग इतनी भीषण थी कि विमान का लगभग कोई बड़ा ढांचा पहचान में नहीं आ रहा था। अधिकारियों ने तुरंत क्षेत्र को सील कर दिया और सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। एयर फोर्स के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह हादसा बेहद गंभीर था और इसे “unsurvivable” यानी बचाव की कोई संभावना नहीं वाला हादसा माना गया है। इस घटना ने अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठानों में सुरक्षा व्यवस्था और पुराने रणनीतिक विमानों की स्थिति पर फिर से बहस छेड़ दी है।
विमान में मौजूद आठ लोगों में सैन्य अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और रक्षा ठेकेदार शामिल थे। इनमें विमान निर्माता कंपनी बोइंग के दो कर्मचारी भी बताए जा रहे हैं, जो परीक्षण प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। एयरबेस प्रशासन के मुताबिक यह उड़ान रडार मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के तहत की जा रही थी, जिसका उद्देश्य पुराने बमवर्षक विमानों की तकनीकी क्षमता को अपडेट करना था। लेकिन टेकऑफ के तुरंत बाद ही कुछ तकनीकी गड़बड़ी या परिचालन त्रुटि के कारण विमान नीचे गिर गया। फिलहाल जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह हादसा तकनीकी खराबी, इंजन फेल्योर या किसी अन्य कारण से हुआ है। अभी तक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। घटना के बाद एडवर्ड्स एयरबेस पर सभी गतिविधियां रोक दी गईं और रनवे को भारी नुकसान के चलते बंद कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि जांच टीमों को मलबे के निरीक्षण के लिए भेजा गया है, लेकिन आग की तीव्रता के कारण कई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो चुके हैं। यह भी सामने आया है कि B-52 विमान अमेरिकी वायुसेना का एक पुराना लेकिन बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक बमवर्षक है, जिसे दशकों से लगातार अपग्रेड किया जाता रहा है। यह विमान भारी मात्रा में हथियार ले जाने की क्षमता रखता है और लंबी दूरी तक बिना रुके उड़ान भर सकता है। इसके बावजूद इसकी उम्र और तकनीकी संरचना को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
इसी दिन दुनिया के दूसरे हिस्से में रूस से भी एक समान सैन्य घटना की खबर आई, जहां Tu-22M3 रणनीतिक बॉम्बर विमान साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार विमान में सवार चालक दल ने समय रहते पैराशूट से बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली और उन्हें किसी गंभीर चोट की सूचना नहीं है। यह विमान एक घने जंगल वाले इलाके के पास गिरा, जहां स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाएं तुरंत पहुंचीं। राहत की बात यह रही कि जमीन पर किसी नागरिक या बुनियादी ढांचे को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। रूसी अधिकारियों ने बताया कि विमान बिना किसी युद्धक भार के नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में विमान को तेजी से नीचे गिरते और फिर आग के बड़े गुबार में बदलते देखा गया, हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है। इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और राहत कार्य तेजी से चल रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि दुर्घटना स्थल के आसपास सुरक्षा घेरा बना दिया गया है ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न फैले।
एक ही दिन अमेरिका और रूस के रणनीतिक बमवर्षक विमानों से जुड़ी घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय सैन्य विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। दोनों ही विमान अपने-अपने देशों की रणनीतिक ताकत के प्रतीक माने जाते हैं और दशकों से सेवा में हैं। B-52 अमेरिकी वायुसेना की रीढ़ माना जाता है, जबकि Tu-22M3 रूस की लंबी दूरी की हवाई हमले की क्षमता का अहम हिस्सा है। हालांकि दोनों देशों ने पिछले कई वर्षों से इन विमानों को आधुनिक बनाने की कोशिश की है, फिर भी इनके पुराने डिजाइन और लगातार बढ़ते परिचालन दबाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। ऐसे हादसे न केवल तकनीकी खामियों की ओर इशारा करते हैं बल्कि यह भी दिखाते हैं कि पुराने प्लेटफॉर्म्स पर निर्भरता कितनी जोखिमभरी हो सकती है।
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अमेरिका में B-52 विमान हादसा, आठ लोगों की मौत
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कैलिफोर्निया के एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर सोमवार की सुबह एक बड़ा सैन्य हादसा सामने आया, जब अमेरिकी वायुसेना का B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर टेकऑफ के कुछ ही पलों बाद अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक विमान एक नियमित परीक्षण मिशन पर था और उड़ान भरते ही वह संतुलन खो बैठा और रनवे के करीब ही आग के गोले में बदल गया। हादसा इतना तेज था कि आसपास मौजूद कर्मचारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अमेरिकी वायुसेना ने बाद में पुष्टि की कि विमान में सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई है। यह घटना दक्षिणी कैलिफोर्निया के मोजावे रेगिस्तान क्षेत्र में स्थित इस महत्वपूर्ण एयरबेस पर हुई, जहां आमतौर पर परीक्षण और प्रशिक्षण उड़ानें होती रहती हैं। हादसे के तुरंत बाद पूरे इलाके में धुएं का घना गुबार उठता देखा गया, जो कई किलोमीटर दूर से भी दिखाई दे रहा था। स्थानीय लोगों और सैन्य कर्मियों के अनुसार विस्फोट के बाद रनवे के आसपास का हिस्सा पूरी तरह जलकर काले मलबे में तब्दील हो गया। कुछ वीडियो फुटेज में देखा गया कि आग इतनी भीषण थी कि विमान का लगभग कोई बड़ा ढांचा पहचान में नहीं आ रहा था। अधिकारियों ने तुरंत क्षेत्र को सील कर दिया और सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। एयर फोर्स के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह हादसा बेहद गंभीर था और इसे “unsurvivable” यानी बचाव की कोई संभावना नहीं वाला हादसा माना गया है। इस घटना ने अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठानों में सुरक्षा व्यवस्था और पुराने रणनीतिक विमानों की स्थिति पर फिर से बहस छेड़ दी है।
विमान में मौजूद आठ लोगों में सैन्य अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और रक्षा ठेकेदार शामिल थे। इनमें विमान निर्माता कंपनी बोइंग के दो कर्मचारी भी बताए जा रहे हैं, जो परीक्षण प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। एयरबेस प्रशासन के मुताबिक यह उड़ान रडार मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के तहत की जा रही थी, जिसका उद्देश्य पुराने बमवर्षक विमानों की तकनीकी क्षमता को अपडेट करना था। लेकिन टेकऑफ के तुरंत बाद ही कुछ तकनीकी गड़बड़ी या परिचालन त्रुटि के कारण विमान नीचे गिर गया। फिलहाल जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह हादसा तकनीकी खराबी, इंजन फेल्योर या किसी अन्य कारण से हुआ है। अभी तक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। घटना के बाद एडवर्ड्स एयरबेस पर सभी गतिविधियां रोक दी गईं और रनवे को भारी नुकसान के चलते बंद कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि जांच टीमों को मलबे के निरीक्षण के लिए भेजा गया है, लेकिन आग की तीव्रता के कारण कई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो चुके हैं। यह भी सामने आया है कि B-52 विमान अमेरिकी वायुसेना का एक पुराना लेकिन बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक बमवर्षक है, जिसे दशकों से लगातार अपग्रेड किया जाता रहा है। यह विमान भारी मात्रा में हथियार ले जाने की क्षमता रखता है और लंबी दूरी तक बिना रुके उड़ान भर सकता है। इसके बावजूद इसकी उम्र और तकनीकी संरचना को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
इसी दिन दुनिया के दूसरे हिस्से में रूस से भी एक समान सैन्य घटना की खबर आई, जहां Tu-22M3 रणनीतिक बॉम्बर विमान साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार विमान में सवार चालक दल ने समय रहते पैराशूट से बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली और उन्हें किसी गंभीर चोट की सूचना नहीं है। यह विमान एक घने जंगल वाले इलाके के पास गिरा, जहां स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाएं तुरंत पहुंचीं। राहत की बात यह रही कि जमीन पर किसी नागरिक या बुनियादी ढांचे को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। रूसी अधिकारियों ने बताया कि विमान बिना किसी युद्धक भार के नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में विमान को तेजी से नीचे गिरते और फिर आग के बड़े गुबार में बदलते देखा गया, हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है। इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और राहत कार्य तेजी से चल रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि दुर्घटना स्थल के आसपास सुरक्षा घेरा बना दिया गया है ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न फैले।
एक ही दिन अमेरिका और रूस के रणनीतिक बमवर्षक विमानों से जुड़ी घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय सैन्य विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। दोनों ही विमान अपने-अपने देशों की रणनीतिक ताकत के प्रतीक माने जाते हैं और दशकों से सेवा में हैं। B-52 अमेरिकी वायुसेना की रीढ़ माना जाता है, जबकि Tu-22M3 रूस की लंबी दूरी की हवाई हमले की क्षमता का अहम हिस्सा है। हालांकि दोनों देशों ने पिछले कई वर्षों से इन विमानों को आधुनिक बनाने की कोशिश की है, फिर भी इनके पुराने डिजाइन और लगातार बढ़ते परिचालन दबाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। ऐसे हादसे न केवल तकनीकी खामियों की ओर इशारा करते हैं बल्कि यह भी दिखाते हैं कि पुराने प्लेटफॉर्म्स पर निर्भरता कितनी जोखिमभरी हो सकती है।
