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फालता में भाजपा की बड़ी बढ़त, देबांग्शु 99 हजार वोट आगे, TMC के उम्मीदवार चौथे नंबर पर आए
नेशनल डेस्क
पश्चिम बंगाल की फालता सीट पर भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु मंडल 91 हजार वोटों से आगे चल रहे हैं। TMC उम्मीदवार जहांगीर चौथे नंबर पर हैं।
पश्चिम बंगाल के फालता विधानसभा सीट पर मतगणना के दौरान भाजपा के उम्मीदवार देबांग्शु मंडल की जीत लगभग तय मानी जा रही है। दोपहर करीब 3:30 बजे तक 19 राउंड की गिनती पूरी हो चुकी थी, और शुरुआती रुझानों के मुताबिक भाजपा ने यहां अच्छी खासी बढ़त बना ली है। देबांग्शु को अब तक 1.30 लाख से ज्यादा वोट मिल चुके हैं, जबकि सीपीएम के उम्मीदवार शंभूनाथ कुर्मी करीब 37 हजार वोटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। सबसे ज्यादा चर्चा टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान को लेकर हो रही है। उन्होंने चुनाव से पीछे हटने का ऐलान तो कर दिया था, लेकिन उनकी नाम और चुनाव चिन्ह अभी भी ईवीएम पर मौजूद हैं। फिलहाल वे चौथे स्थान पर चल रहे हैं और उन्हें 5 हजार से ज्यादा वोट मिले हैं। फालता सीट पर कुल 21 राउंड की गिनती होनी है और अब कुछ राउंड ही बाकी हैं।
फालता सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान कराया गया था। चुनाव आयोग के अनुसार रीपोलिंग में 88.13 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जो पहले हुए मतदान से करीब 2 प्रतिशत ज्यादा था। इससे पहले 29 अप्रैल को यहां 86.71 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। दोबारा मतदान की नौबत ईवीएम में कथित छेड़छाड़ और बूथों पर गड़बड़ी की शिकायतों के बाद आई थी। भाजपा ने आरोप लगाया था कि कई बूथों पर ईवीएम में भाजपा के बटन पर टेप चिपका दिया गया था, जिससे वोट डालने में मुश्किल हो रही थी। मामला बढ़ने के बाद चुनाव अधिकारियों ने जांच की और कई बूथों में गड़बड़ी के संकेत मिलने की बात सामने आई। सूत्रों के अनुसार कुछ मतदान केंद्रों के वेब कैमरा फुटेज में भी छेड़छाड़ की कोशिश की गई थी। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने 285 बूथों पर दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया।
फालता सीट का राजनीतिक इतिहास भी इस बार चर्चा में है। कभी यह इलाका सीपीएम का मजबूत गढ़ था, लेकिन पिछले कई चुनावों से यहां तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा है। 2011 के बाद से लगातार टीएमसी ने यहां जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा ने कभी भी इस सीट पर जीत नहीं पाई। अगर अंतिम नतीजों में देबांग्शु की बढ़त कायम रहती है, तो यह भाजपा के लिए प्रतीकात्मक रूप से एक बड़ी जीत मानी जाएगी। फालता दक्षिण 24 परगना जिले का हिस्सा है, जहां इस बार भाजपा ने कई सीटों पर बढ़त बनाई है। जादवपुर, टॉलीगंज और बेहला जैसे इलाकों में भी पार्टी को फायदा मिला है। दूसरी तरफ, टीएमसी ने बासंती और कुलतली जैसी सीटों पर अपनी पकड़ बनाए रखी है।
इस चुनाव का सबसे उलझा हुआ पहलू टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान के बारे में रहा। उन्होंने मतदान से पहले सार्वजनिक रूप से चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया था, लेकिन चुनाव आयोग को औपचारिक रूप से नाम वापसी का आवेदन नहीं दिया। इसी वजह से ईवीएम पर उनका नाम और पार्टी का चुनाव चिन्ह बना रहा। मतदान वाले दिन भी वे कहीं नजर नहीं आए। कानूनी जानकारों का कहना है कि अगर किसी उम्मीदवार ने सिर्फ मौखिक तौर पर चुनाव से हटने की बात कही हो और आयोग ने उनकी उम्मीदवारी समाप्त नहीं की हो, तो ज्यादा वोट मिलने की स्थिति में वह जीत का दावा कर सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में होगा।
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फालता में भाजपा की बड़ी बढ़त, देबांग्शु 99 हजार वोट आगे, TMC के उम्मीदवार चौथे नंबर पर आए
नेशनल डेस्क
पश्चिम बंगाल के फालता विधानसभा सीट पर मतगणना के दौरान भाजपा के उम्मीदवार देबांग्शु मंडल की जीत लगभग तय मानी जा रही है। दोपहर करीब 3:30 बजे तक 19 राउंड की गिनती पूरी हो चुकी थी, और शुरुआती रुझानों के मुताबिक भाजपा ने यहां अच्छी खासी बढ़त बना ली है। देबांग्शु को अब तक 1.30 लाख से ज्यादा वोट मिल चुके हैं, जबकि सीपीएम के उम्मीदवार शंभूनाथ कुर्मी करीब 37 हजार वोटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। सबसे ज्यादा चर्चा टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान को लेकर हो रही है। उन्होंने चुनाव से पीछे हटने का ऐलान तो कर दिया था, लेकिन उनकी नाम और चुनाव चिन्ह अभी भी ईवीएम पर मौजूद हैं। फिलहाल वे चौथे स्थान पर चल रहे हैं और उन्हें 5 हजार से ज्यादा वोट मिले हैं। फालता सीट पर कुल 21 राउंड की गिनती होनी है और अब कुछ राउंड ही बाकी हैं।
फालता सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान कराया गया था। चुनाव आयोग के अनुसार रीपोलिंग में 88.13 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जो पहले हुए मतदान से करीब 2 प्रतिशत ज्यादा था। इससे पहले 29 अप्रैल को यहां 86.71 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। दोबारा मतदान की नौबत ईवीएम में कथित छेड़छाड़ और बूथों पर गड़बड़ी की शिकायतों के बाद आई थी। भाजपा ने आरोप लगाया था कि कई बूथों पर ईवीएम में भाजपा के बटन पर टेप चिपका दिया गया था, जिससे वोट डालने में मुश्किल हो रही थी। मामला बढ़ने के बाद चुनाव अधिकारियों ने जांच की और कई बूथों में गड़बड़ी के संकेत मिलने की बात सामने आई। सूत्रों के अनुसार कुछ मतदान केंद्रों के वेब कैमरा फुटेज में भी छेड़छाड़ की कोशिश की गई थी। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने 285 बूथों पर दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया।
फालता सीट का राजनीतिक इतिहास भी इस बार चर्चा में है। कभी यह इलाका सीपीएम का मजबूत गढ़ था, लेकिन पिछले कई चुनावों से यहां तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा है। 2011 के बाद से लगातार टीएमसी ने यहां जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा ने कभी भी इस सीट पर जीत नहीं पाई। अगर अंतिम नतीजों में देबांग्शु की बढ़त कायम रहती है, तो यह भाजपा के लिए प्रतीकात्मक रूप से एक बड़ी जीत मानी जाएगी। फालता दक्षिण 24 परगना जिले का हिस्सा है, जहां इस बार भाजपा ने कई सीटों पर बढ़त बनाई है। जादवपुर, टॉलीगंज और बेहला जैसे इलाकों में भी पार्टी को फायदा मिला है। दूसरी तरफ, टीएमसी ने बासंती और कुलतली जैसी सीटों पर अपनी पकड़ बनाए रखी है।
इस चुनाव का सबसे उलझा हुआ पहलू टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान के बारे में रहा। उन्होंने मतदान से पहले सार्वजनिक रूप से चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया था, लेकिन चुनाव आयोग को औपचारिक रूप से नाम वापसी का आवेदन नहीं दिया। इसी वजह से ईवीएम पर उनका नाम और पार्टी का चुनाव चिन्ह बना रहा। मतदान वाले दिन भी वे कहीं नजर नहीं आए। कानूनी जानकारों का कहना है कि अगर किसी उम्मीदवार ने सिर्फ मौखिक तौर पर चुनाव से हटने की बात कही हो और आयोग ने उनकी उम्मीदवारी समाप्त नहीं की हो, तो ज्यादा वोट मिलने की स्थिति में वह जीत का दावा कर सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में होगा।
