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बांग्लादेश: उस्मान हादी की हत्या पर भाई का आरोप- यूनुस सरकार ही पीछे
अंतराष्ट्रीय
“भाई उमर का आरोप- यूनुस सरकार ने हादी की हत्या कर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की; इंकलाब मंच ने 30 दिनों में गिरफ्तारी की मांग की”
बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उस्मान हादी की हत्या को लेकर उनके भाई शरीफ उमर हादी ने मंगलवार को यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार के भीतर कुछ ताकतें ही हादी की हत्या के पीछे हैं और इसका मकसद आगामी राष्ट्रीय चुनाव को प्रभावित करना है।
उमर हादी ने यह बयान शाहबाग में आयोजित इंकलाब मंच के ‘शहीदी शपथ’ कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने कहा, “तुम्हीं लोगों ने उस्मान हादी को मरवाया और अब इसे चुनाव रोकने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।”
हादी को 12 दिसंबर को ढाका में गोली मारी गई थी। गंभीर हालत में उन्हें सिंगापुर भेजा गया, जहां 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। बांग्लादेश में अगले राष्ट्रीय चुनाव 12 फरवरी 2026 को होने हैं, जिसके मद्देनजर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।
उमर हादी ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि हत्यारों पर मुकदमा चलाया जाए, ताकि चुनावी माहौल सुरक्षित रहे। उन्होंने दावा किया कि उनका भाई किसी विदेशी या एजेंसी के दबाव में नहीं झुका, इसी कारण उसे निशाना बनाया गया।
इंकलाब मंच के सचिव अब्दुल्लाह अल जाबेर ने भी 30 दिनों की समयसीमा तय कर हत्यारों की पहचान और गिरफ्तारी की मांग दोहराई। जाबेर ने आरोप लगाया कि हत्या के पीछे एक बड़ा सिंडिकेट है और सरकार की संप्रभुता को कमजोर करने की साजिश चल रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल संदेह से ऊपर नहीं है।
हादी के अंतिम संस्कार के बाद शनिवार को शाहबाग चौराहे पर आयोजित रैली में हजारों लोग शामिल हुए। उन्होंने ‘शहीदी शपथ’ ली कि न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
12 दिसंबर को ढाका में बाइक सवार हमलावर ने हादी पर हमला किया था। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हमले से कुछ घंटे पहले हादी ने ग्रेटर बांग्लादेश का एक मैप साझा किया था, जिसमें भारतीय क्षेत्र (7 सिस्टर्स) भी शामिल थे।
उस्मान हादी इंकलाब मंच के प्रवक्ता थे और ढाका से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव में भाग लेने वाले थे। इंकलाब मंच 2024 के छात्र आंदोलन के बाद सक्रिय हुआ और यह अवामी लीग की सरकार के खिलाफ खड़ा रहा।
इस घटना ने बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और चुनावी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हादी हत्याकांड की निष्पक्ष जांच और दोषियों की गिरफ्तारी को लेकर देशभर में दबाव लगातार बढ़ रहा है।
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बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उस्मान हादी की हत्या को लेकर उनके भाई शरीफ उमर हादी ने मंगलवार को यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार के भीतर कुछ ताकतें ही हादी की हत्या के पीछे हैं और इसका मकसद आगामी राष्ट्रीय चुनाव को प्रभावित करना है।
उमर हादी ने यह बयान शाहबाग में आयोजित इंकलाब मंच के ‘शहीदी शपथ’ कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने कहा, “तुम्हीं लोगों ने उस्मान हादी को मरवाया और अब इसे चुनाव रोकने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।”
हादी को 12 दिसंबर को ढाका में गोली मारी गई थी। गंभीर हालत में उन्हें सिंगापुर भेजा गया, जहां 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। बांग्लादेश में अगले राष्ट्रीय चुनाव 12 फरवरी 2026 को होने हैं, जिसके मद्देनजर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।
उमर हादी ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि हत्यारों पर मुकदमा चलाया जाए, ताकि चुनावी माहौल सुरक्षित रहे। उन्होंने दावा किया कि उनका भाई किसी विदेशी या एजेंसी के दबाव में नहीं झुका, इसी कारण उसे निशाना बनाया गया।
इंकलाब मंच के सचिव अब्दुल्लाह अल जाबेर ने भी 30 दिनों की समयसीमा तय कर हत्यारों की पहचान और गिरफ्तारी की मांग दोहराई। जाबेर ने आरोप लगाया कि हत्या के पीछे एक बड़ा सिंडिकेट है और सरकार की संप्रभुता को कमजोर करने की साजिश चल रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल संदेह से ऊपर नहीं है।
हादी के अंतिम संस्कार के बाद शनिवार को शाहबाग चौराहे पर आयोजित रैली में हजारों लोग शामिल हुए। उन्होंने ‘शहीदी शपथ’ ली कि न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
12 दिसंबर को ढाका में बाइक सवार हमलावर ने हादी पर हमला किया था। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हमले से कुछ घंटे पहले हादी ने ग्रेटर बांग्लादेश का एक मैप साझा किया था, जिसमें भारतीय क्षेत्र (7 सिस्टर्स) भी शामिल थे।
उस्मान हादी इंकलाब मंच के प्रवक्ता थे और ढाका से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव में भाग लेने वाले थे। इंकलाब मंच 2024 के छात्र आंदोलन के बाद सक्रिय हुआ और यह अवामी लीग की सरकार के खिलाफ खड़ा रहा।
इस घटना ने बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और चुनावी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हादी हत्याकांड की निष्पक्ष जांच और दोषियों की गिरफ्तारी को लेकर देशभर में दबाव लगातार बढ़ रहा है।
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