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कर्नाटक में सत्ता बदलाव तय, डीके शिवकुमार बन सकते हैं नए मुख्यमंत्री
नेशनल डेस्क
सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद दिल्ली में तेज हुई हलचल, कांग्रेस 4 डिप्टी सीएम फॉर्मूले पर कर रही मंथन
कर्नाटक की राजनीति में पिछले तीन दिनों से चल रही हलचल अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद ही सिद्धारमैया शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। करीब आधे घंटे चली इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान अब राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को अंतिम रूप देने में जुटा है और अगले हफ्ते डीके शिवकुमार नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं।
दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान सिद्धारमैया ने हाईकमान के सामने अपनी कई राजनीतिक मांगें रखीं। इनमें उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को नई कैबिनेट में अहम मंत्रालय देने की मांग भी शामिल बताई जा रही है। चर्चा यह भी है कि नई सरकार में सिद्धारमैया गुट का प्रभाव बरकरार रहेगा और कैबिनेट गठन में उनकी राय को अहमियत दी जाएगी। यही वजह है कि इस्तीफे के तुरंत बाद उनका दिल्ली पहुंचना काफी अहम माना जा रहा है।
उधर कांग्रेस पार्टी के भीतर अब 4 डिप्टी सीएम बनाने का फॉर्मूला तेजी से चर्चा में है। पार्टी सूत्रों के अनुसार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए यह रणनीति तैयार की जा रही है। बताया जा रहा है कि डीके शिवकुमार के साथ अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और मौजूदा मंत्री प्रियंक खड़गे का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है।
नई कैबिनेट में बड़े फेरबदल की भी संभावना जताई जा रही है। खबरें हैं कि मौजूदा सरकार के करीब 10 मंत्रियों को हटाया जा सकता है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि नई टीम के जरिए सरकार के खिलाफ बन रही नाराजगी को कम किया जाए। पिछले कुछ महीनों में वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन घोटाले जैसे मामलों ने सरकार को घेरा था। कांग्रेस हाईकमान को लग रहा है कि समय रहते नेतृत्व बदलने से एंटी-इंकम्बेंसी का असर कम किया जा सकता है।
दिल्ली में बैठकों के समानांतर बेंगलुरु में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। इस्तीफे से पहले सिद्धारमैया ने अपने आवास पर मंत्रियों की ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई थी। इस दौरान एक तस्वीर सबसे ज्यादा चर्चा में रही, जिसमें डीके शिवकुमार सिद्धारमैया के पैर छूते नजर आए। बाद में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया और साथ बैठकर नाश्ता किया। राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन और समझौते का संकेत मान रहे हैं।
दरअसल कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की अटकलें नई नहीं हैं। 2023 विधानसभा चुनाव के बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में लंबी खींचतान चली थी। चुनाव में कांग्रेस ने AHINDA फॉर्मूले के सहारे बड़ी जीत हासिल की थी। AHINDA यानी अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित वोट बैंक। सिद्धारमैया खुद कुरुबा समुदाय से आते हैं, जिसका असर चुनावी नतीजों में भी दिखाई दिया था। दूसरी तरफ डीके शिवकुमार ने दावा किया था कि उन्होंने पार्टी को मुश्किल दौर से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।
दोनों नेताओं की दावेदारी के चलते कांग्रेस हाईकमान को मुख्यमंत्री तय करने में करीब एक हफ्ता लग गया था। उस समय यह चर्चा भी चली कि दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री रहने का फॉर्मूला तय हुआ है, हालांकि कांग्रेस ने इसे कभी आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया। अब तीन साल बाद वही फॉर्मूला फिर चर्चा में है और सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद माना जा रहा है कि समझौते का दूसरा चरण लागू किया जा रहा है।
26 मई को कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों को दिल्ली बुलाया था। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। सूत्रों के मुताबिक शुरुआती दौर में सिद्धारमैया पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। यहां तक कि उन्होंने समर्थक विधायकों के साथ अलग रुख अपनाने के संकेत भी दिए थे। हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने उन्हें संगठन में बड़ी भूमिका और सम्मानजनक राजनीतिक स्पेस देने का भरोसा दिया।
इधर डीके शिवकुमार का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए लगभग तय माना जा रहा है। कर्नाटक कांग्रेस में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले डीके की पहचान संकटमोचक नेता के तौर पर रही है। पार्टी विधायकों को टूटने से बचाने से लेकर चुनाव प्रबंधन तक में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। हालांकि उनके खिलाफ कई आपराधिक और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच भी चल रही है। 2019 में उन्हें ईडी ने गिरफ्तार भी किया था और उन्हें करीब 50 दिन तिहाड़ जेल में बिताने पड़े थे।
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कर्नाटक में सत्ता बदलाव तय, डीके शिवकुमार बन सकते हैं नए मुख्यमंत्री
नेशनल डेस्क
कर्नाटक की राजनीति में पिछले तीन दिनों से चल रही हलचल अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद ही सिद्धारमैया शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। करीब आधे घंटे चली इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान अब राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को अंतिम रूप देने में जुटा है और अगले हफ्ते डीके शिवकुमार नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं।
दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान सिद्धारमैया ने हाईकमान के सामने अपनी कई राजनीतिक मांगें रखीं। इनमें उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को नई कैबिनेट में अहम मंत्रालय देने की मांग भी शामिल बताई जा रही है। चर्चा यह भी है कि नई सरकार में सिद्धारमैया गुट का प्रभाव बरकरार रहेगा और कैबिनेट गठन में उनकी राय को अहमियत दी जाएगी। यही वजह है कि इस्तीफे के तुरंत बाद उनका दिल्ली पहुंचना काफी अहम माना जा रहा है।
उधर कांग्रेस पार्टी के भीतर अब 4 डिप्टी सीएम बनाने का फॉर्मूला तेजी से चर्चा में है। पार्टी सूत्रों के अनुसार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए यह रणनीति तैयार की जा रही है। बताया जा रहा है कि डीके शिवकुमार के साथ अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और मौजूदा मंत्री प्रियंक खड़गे का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है।
नई कैबिनेट में बड़े फेरबदल की भी संभावना जताई जा रही है। खबरें हैं कि मौजूदा सरकार के करीब 10 मंत्रियों को हटाया जा सकता है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि नई टीम के जरिए सरकार के खिलाफ बन रही नाराजगी को कम किया जाए। पिछले कुछ महीनों में वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन घोटाले जैसे मामलों ने सरकार को घेरा था। कांग्रेस हाईकमान को लग रहा है कि समय रहते नेतृत्व बदलने से एंटी-इंकम्बेंसी का असर कम किया जा सकता है।
दिल्ली में बैठकों के समानांतर बेंगलुरु में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। इस्तीफे से पहले सिद्धारमैया ने अपने आवास पर मंत्रियों की ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई थी। इस दौरान एक तस्वीर सबसे ज्यादा चर्चा में रही, जिसमें डीके शिवकुमार सिद्धारमैया के पैर छूते नजर आए। बाद में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया और साथ बैठकर नाश्ता किया। राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन और समझौते का संकेत मान रहे हैं।
दरअसल कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की अटकलें नई नहीं हैं। 2023 विधानसभा चुनाव के बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में लंबी खींचतान चली थी। चुनाव में कांग्रेस ने AHINDA फॉर्मूले के सहारे बड़ी जीत हासिल की थी। AHINDA यानी अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित वोट बैंक। सिद्धारमैया खुद कुरुबा समुदाय से आते हैं, जिसका असर चुनावी नतीजों में भी दिखाई दिया था। दूसरी तरफ डीके शिवकुमार ने दावा किया था कि उन्होंने पार्टी को मुश्किल दौर से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।
दोनों नेताओं की दावेदारी के चलते कांग्रेस हाईकमान को मुख्यमंत्री तय करने में करीब एक हफ्ता लग गया था। उस समय यह चर्चा भी चली कि दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री रहने का फॉर्मूला तय हुआ है, हालांकि कांग्रेस ने इसे कभी आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया। अब तीन साल बाद वही फॉर्मूला फिर चर्चा में है और सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद माना जा रहा है कि समझौते का दूसरा चरण लागू किया जा रहा है।
26 मई को कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों को दिल्ली बुलाया था। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। सूत्रों के मुताबिक शुरुआती दौर में सिद्धारमैया पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। यहां तक कि उन्होंने समर्थक विधायकों के साथ अलग रुख अपनाने के संकेत भी दिए थे। हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने उन्हें संगठन में बड़ी भूमिका और सम्मानजनक राजनीतिक स्पेस देने का भरोसा दिया।
इधर डीके शिवकुमार का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए लगभग तय माना जा रहा है। कर्नाटक कांग्रेस में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले डीके की पहचान संकटमोचक नेता के तौर पर रही है। पार्टी विधायकों को टूटने से बचाने से लेकर चुनाव प्रबंधन तक में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। हालांकि उनके खिलाफ कई आपराधिक और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच भी चल रही है। 2019 में उन्हें ईडी ने गिरफ्तार भी किया था और उन्हें करीब 50 दिन तिहाड़ जेल में बिताने पड़े थे।
