भारतीय संग्रहालय में खिल उठे वसंत उत्सव के रंग

Digital Desk

प्रभा खेतान फाउंडेशन द्वारा आयोजित वसंत उत्सव में संदीप भूतोड़िया द्वारा महाकवि जयदेव की कृति "गीत गोविंदम्" आधारित प्रस्तुति

ऐतिहासिक भारतीय संग्रहालय के भव्य प्रांगण में आयोजित वसंत उत्सव इस वर्ष महाकवि जयदेव की अमर कृति “गीत गोविंदम्” को समर्पित रहा। “रंग, रस और राधा-कृष्ण प्रेम” शीर्षक से सजी इस सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भारतीय संग्रहालय, जो भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संगठन है, तथा प्रभा खेतान फाउंडेशन के तत्वावधान में किया गया।

वसंत की मृदुल बयार के बीच आयोजित यह कार्यक्रम रंग, राग और भक्ति के अद्भुत संगम का साक्षी बना।

कार्यक्रम में संस्कृतिकर्मी एवं लेखक संदीप भूतोड़िया की काव्यात्मक प्रस्तुति ने श्रोताओं को वृंदावन की आध्यात्मिक अनुभूति से जोड़ दिया। उनके शब्दों के माध्यम से राधा-कृष्ण के पवित्र प्रेम की अनंत संवेदनाएँ सजीव हो उठीं और पूरी संध्या का भावपूर्ण वातावरण निर्मित हुआ।

सुप्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना और कोलकाता की अहसास वूमेन डोना गांगुली तथा उनकी संस्था ‘दीक्षामंजरी’ की नृत्यांगनाओं ने “बसंत पल्लवी” और “ललित लवंग लता” जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रेम की विविध अवस्थाओं को साकार किया। ओडिसी नृत्य की लयात्मक मुद्राओं और भावाभिव्यक्ति की सूक्ष्मता ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

संगीत की स्वर-लहरियों ने वातावरण को और अधिक भाव-विभोर बना दिया। दक्षिणायन (यूके) समूह के डॉ. आनन्दो गुप्ता द्वारा प्रस्तुत रवीन्द्र संगीत — “ओ रे गृहवासी”, “नील दिगंते”, “ओ रे भाई फागुन” और “दक्षिण हवा जागो” — ने वसंत के सौंदर्य को सुरों में पिरो दिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रेम की विभिन्न अवस्थाओं — चिंता, स्मृति, उद्वेग, उन्माद और मिलन — का नृत्यात्मक और काव्यात्मक चित्रण अत्यंत प्रभावशाली रहा। राधा के विरह की व्याकुलता से लेकर कृष्ण के आगमन के उल्लास तक की भावनात्मक यात्रा ने दर्शकों को भाव-सागर में डुबो दिया।

“स्मर-गरल-खण्डनं मम शिरसि मण्डनं” और “ललित-लवंग-लता परिशीलन कोमल मलय समीरे” जैसी पंक्तियों के साथ विरह और मिलन का अद्भुत संतुलन मंच पर जीवंत हो उठा।

कार्यक्रम की समापन प्रस्तुतियाँ — “जय हो”, “देश रंगीला”, “वंदे मातरम्” और “रंग दिए जाओ” — ने उत्सव को राष्ट्रीय भावना से भी ओतप्रोत कर दिया।

प्रभा खेतान फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी और लेखक-संस्कृतिकर्मी संदीप भूतोड़िया ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह कार्यक्रम एक संदेश देता है कि वृंदावन की होली से लेकर शांतिनिकेतन की बसंती होली तक भारत की विविध परंपराएँ एक ही सूत्र में पिरोई हुई हैं।

उन्होंने कहा, “रंग भले अलग हों, पर भाव एक है — प्रेम; राग भले भिन्न हों, पर लय एक है — भक्ति।”

इस अवसर पर भारतीय संग्रहालय के निदेशक डॉ. सायन भट्टाचार्य ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए संदीप भूतोड़िया और डोना गांगुली को सम्मानित किया।

ऐतिहासिक परिवेश, आध्यात्मिक संवेदनाओं और उत्सवी उल्लास के समागम ने इस वसंत उत्सव को एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बना दिया।

कार्यक्रम में कोलकाता के प्रबुद्ध नागरिकों, फिल्मी कलाकारों और कई देशों के वाणिज्य दूतावासों के प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे यह सांस्कृतिक संध्या और भी विशेष बन गई।



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