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बकरीद की तारीख पर कन्फ्यूजन? यहां जानें 27 या 28 मई कब है ईद अल-अधा
नेशनल डेस्क
बकरीद 2026 की तारीख को लेकर भ्रम खत्म हो गया है। देश के ज्यादातर राज्यों में 28 मई को ईद अल-अधा मनाई जाएगी, जबकि जम्मू-कश्मीर में 27 मई को त्योहार होगा।
ईद अल-अधा, जिसे हम बकरीद के नाम से भी जानते हैं, इस बार देशभर में काफी कन्फ्यूज़न की वजह बन गया था। कहीं 27 मई की बात चल रही थी तो कहीं लोग 28 मई को मनाने की चर्चा कर रहे थे। असल में, ये पूरा माजरा धुल-हिज्जा के चांद से जुड़ा रहा। कई राज्यों में तय समय पर चाँद नजर नहीं आया, जिसके बाद धार्मिक संगठनों और स्थानीय समितियों ने तारीख में बदलाव का ऐलान किया। अब तो ज्यादातर राज्यों में 28 मई 2026 को बकरीद मनाए जाने की पुष्टि हो गई है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में स्थानीय परंपरा के अनुसार 27 मई को ही ईद अल-अधा मनाई जाएगी।
इस बार चाँद दिखने को लेकर अलग-अलग जगहों पर हालात भिन्न थे। कुछ स्थानों पर धुल-हिज्जा का चाँद नजर नहीं आया, जिससे महीने की शुरुआत एक दिन आगे मानी गई। यही कारण था कि पहले से घोषित छुट्टियों और त्योहार की तारीखों में बदलाव करना पड़ा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में अब 28 मई को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई है। कई सरकारी विभागों, स्कूलों, अदालतों और निजी संस्थानों ने भी संशोधित अवकाश सूची जारी की है।
बात करें जम्मू-कश्मीर की, तो वहाँ की स्थानीय धार्मिक समितियों ने चाँद दिखने की पुष्टि के आधार पर पहले से तय 27 मई की तारीख को बरकरार रखा है। भारत में अक्सर ईद और बकरीद अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दिनों में मनाई जाती हैं। इसका कारण स्थानीय चाँद देखने की परंपरा और धार्मिक बोर्डों के भिन्न फैसले होते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। सोशल मीडिया पर भी तारीख को लेकर चर्चा चलती रही, और कई लोगों ने मजाक करते हुए लिखा कि चाँद ने आखिरी वक्त में सब कुछ बदल दिया।
अब जब तारीख साफ हो गई है, तो बाजारों में भी रौनक लौटने लगी है। पशु बाजारों, कपड़ों की दुकानों और मिठाई के बाजारों में लोगों की भीड़ बढ़ गई है। दिल्ली, लखनऊ, भोपाल और अन्य बड़े शहरों में कुर्बानी के जानवरों की खरीददारी तेज़ हो गई है। दुकानदारों का कहना है कि शुरुआत में लोगों में कन्फ्यूज़न था, लेकिन अब त्योहार की तैयारी जोर पकड़ रही है।
ईद अल-अधा को त्याग और कुर्बानी का पर्व माना जाता है। इस दिन मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करता है और कुर्बानी की रस्म निभाता है। साथ ही जरूरतमंदों में खाना और मदद बांटने की परंपरा भी निभाई जाती है। धार्मिक जानकारों के अनुसार, यह त्योहार सिर्फ धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि इंसानियत, बराबरी और त्याग का संदेश भी देता है।
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बकरीद की तारीख पर कन्फ्यूजन? यहां जानें 27 या 28 मई कब है ईद अल-अधा
नेशनल डेस्क
ईद अल-अधा, जिसे हम बकरीद के नाम से भी जानते हैं, इस बार देशभर में काफी कन्फ्यूज़न की वजह बन गया था। कहीं 27 मई की बात चल रही थी तो कहीं लोग 28 मई को मनाने की चर्चा कर रहे थे। असल में, ये पूरा माजरा धुल-हिज्जा के चांद से जुड़ा रहा। कई राज्यों में तय समय पर चाँद नजर नहीं आया, जिसके बाद धार्मिक संगठनों और स्थानीय समितियों ने तारीख में बदलाव का ऐलान किया। अब तो ज्यादातर राज्यों में 28 मई 2026 को बकरीद मनाए जाने की पुष्टि हो गई है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में स्थानीय परंपरा के अनुसार 27 मई को ही ईद अल-अधा मनाई जाएगी।
इस बार चाँद दिखने को लेकर अलग-अलग जगहों पर हालात भिन्न थे। कुछ स्थानों पर धुल-हिज्जा का चाँद नजर नहीं आया, जिससे महीने की शुरुआत एक दिन आगे मानी गई। यही कारण था कि पहले से घोषित छुट्टियों और त्योहार की तारीखों में बदलाव करना पड़ा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत देश के कई हिस्सों में अब 28 मई को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई है। कई सरकारी विभागों, स्कूलों, अदालतों और निजी संस्थानों ने भी संशोधित अवकाश सूची जारी की है।
बात करें जम्मू-कश्मीर की, तो वहाँ की स्थानीय धार्मिक समितियों ने चाँद दिखने की पुष्टि के आधार पर पहले से तय 27 मई की तारीख को बरकरार रखा है। भारत में अक्सर ईद और बकरीद अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दिनों में मनाई जाती हैं। इसका कारण स्थानीय चाँद देखने की परंपरा और धार्मिक बोर्डों के भिन्न फैसले होते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। सोशल मीडिया पर भी तारीख को लेकर चर्चा चलती रही, और कई लोगों ने मजाक करते हुए लिखा कि चाँद ने आखिरी वक्त में सब कुछ बदल दिया।
अब जब तारीख साफ हो गई है, तो बाजारों में भी रौनक लौटने लगी है। पशु बाजारों, कपड़ों की दुकानों और मिठाई के बाजारों में लोगों की भीड़ बढ़ गई है। दिल्ली, लखनऊ, भोपाल और अन्य बड़े शहरों में कुर्बानी के जानवरों की खरीददारी तेज़ हो गई है। दुकानदारों का कहना है कि शुरुआत में लोगों में कन्फ्यूज़न था, लेकिन अब त्योहार की तैयारी जोर पकड़ रही है।
ईद अल-अधा को त्याग और कुर्बानी का पर्व माना जाता है। इस दिन मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करता है और कुर्बानी की रस्म निभाता है। साथ ही जरूरतमंदों में खाना और मदद बांटने की परंपरा भी निभाई जाती है। धार्मिक जानकारों के अनुसार, यह त्योहार सिर्फ धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि इंसानियत, बराबरी और त्याग का संदेश भी देता है।
