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कांग्रेस की ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली में विवादित नारे, भाजपा ने साधा तीखा निशाना
National
रामलीला मैदान की रैली में पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे सामने आए, भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाया
दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को आयोजित कांग्रेस की ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली उस समय विवादों में आ गई, जब रैली से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। इन वीडियो में कथित तौर पर कांग्रेस कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और हिंसक आशय वाले नारे लगाते दिखाई दिए। घटना के सामने आते ही भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
यह रैली कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में आयोजित की गई थी, जिसमें पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद थे। कांग्रेस का कहना है कि रैली का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाना था। हालांकि नारेबाजी के वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया।
भाजपा सांसद और राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने नारेबाजी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कांग्रेस एक बार फिर अपने चरित्र को उजागर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता प्रधानमंत्री की मृत्यु की कामना जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। त्रिवेदी ने कांग्रेस की तुलना मुगल शासकों से करते हुए कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी का भविष्य भी उसी दिशा में जा रहा है, जैसा औरंगजेब के बाद मुगल साम्राज्य का हुआ था।
भाजपा का दावा है कि नारे लगाने वालों में जयपुर की महिला कांग्रेस नेता मंजू लता मीणा भी शामिल थीं, जो जयपुर महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंजू लता मीणा ने कहा कि उन्होंने केवल “वोट चोरी” को लेकर जनता के गुस्से को स्वर दिया। उनके मुताबिक, चुनाव में धांधली और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना कांग्रेस का अधिकार है।
रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का आत्मविश्वास कमजोर हो चुका है और चुनाव आयोग भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस सत्ता में आई तो चुनाव से जुड़े कानूनों में बदलाव किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भावनात्मक भाषण में कहा कि निजी संकट के बावजूद वे देश के मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने वर्षों में बनाए गए संस्थागत ढांचे को कमजोर किया है और जनता का भरोसा खो दिया है।
फिलहाल यह विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है, लेकिन आने वाले दिनों में चुनाव आयोग और कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में भाषाई मर्यादा और राजनीतिक संवाद की सीमा पर एक नई बहस छेड़ सकता है।
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कांग्रेस की ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली में विवादित नारे, भाजपा ने साधा तीखा निशाना
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दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को आयोजित कांग्रेस की ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली उस समय विवादों में आ गई, जब रैली से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। इन वीडियो में कथित तौर पर कांग्रेस कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और हिंसक आशय वाले नारे लगाते दिखाई दिए। घटना के सामने आते ही भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
यह रैली कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में आयोजित की गई थी, जिसमें पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद थे। कांग्रेस का कहना है कि रैली का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाना था। हालांकि नारेबाजी के वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया।
भाजपा सांसद और राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने नारेबाजी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कांग्रेस एक बार फिर अपने चरित्र को उजागर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता प्रधानमंत्री की मृत्यु की कामना जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। त्रिवेदी ने कांग्रेस की तुलना मुगल शासकों से करते हुए कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी का भविष्य भी उसी दिशा में जा रहा है, जैसा औरंगजेब के बाद मुगल साम्राज्य का हुआ था।
भाजपा का दावा है कि नारे लगाने वालों में जयपुर की महिला कांग्रेस नेता मंजू लता मीणा भी शामिल थीं, जो जयपुर महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंजू लता मीणा ने कहा कि उन्होंने केवल “वोट चोरी” को लेकर जनता के गुस्से को स्वर दिया। उनके मुताबिक, चुनाव में धांधली और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना कांग्रेस का अधिकार है।
रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का आत्मविश्वास कमजोर हो चुका है और चुनाव आयोग भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस सत्ता में आई तो चुनाव से जुड़े कानूनों में बदलाव किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भावनात्मक भाषण में कहा कि निजी संकट के बावजूद वे देश के मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने वर्षों में बनाए गए संस्थागत ढांचे को कमजोर किया है और जनता का भरोसा खो दिया है।
फिलहाल यह विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है, लेकिन आने वाले दिनों में चुनाव आयोग और कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में भाषाई मर्यादा और राजनीतिक संवाद की सीमा पर एक नई बहस छेड़ सकता है।
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