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केरल में बना देश का पहला AI मंत्रालय, जानें कैसे काम करेगी यह मिनिस्ट्री
नेशनल डेस्क
केरल देश का पहला राज्य बना जहां AI के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया। पी. के. कुन्हालीकुट्टी को AI विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
भारत में पहली बार किसी राज्य सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया है। यह कदम केंद्रीय सरकार की बजाय केरल सरकार ने उठाया है। नई सरकार में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता पी. के. कुन्हालीकुट्टी को AI विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह केरल देश का पहला राज्य बन गया है, जहां AI के लिए न केवल एक मंत्रालय बल्कि एक मंत्री भी बनाया गया है। यह निर्णय तकनीकी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि आने वाले समय में प्रशासनिक और आर्थिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि AI अब सिर्फ मोबाइल ऐप या चैटबॉट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, ट्रैफिक, सरकारी सेवाओं और रोजगार पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, AI मंत्रालय का काम विभिन्न विभागों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को एक नीति के तहत लाना होगा। पहले टेक्नोलॉजी से जुड़े फैसले अलग-अलग विभाग अपने तरीके से लेते थे, लेकिन अब AI से संबंधित कार्यों के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था बनाई जाएगी। खबर है कि अस्पतालों में बीमारियों की जल्दी पहचान, ट्रैफिक सिस्टम को स्मार्ट बनाने, सरकारी शिकायतों के निपटारे और ऑनलाइन सेवाओं को तेज करने में AI का उपयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। राज्य सरकार इस दिशा में रिसर्च और टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ भी सहयोग कर सकती है।
केरल हमेशा से शिक्षा और डिजिटल साक्षरता में अग्रणी रहा है। अब AI मंत्रालय की स्थापना के बाद, राज्य स्टार्टअप, रिसर्च सेंटर और निवेश आकर्षित करने का प्रयास करेगा। सूत्रों के मुताबिक, AI आधारित उद्योग आने वाले वर्षों में एक बड़ा रोजगार क्षेत्र बन सकती है। इसीलिए सरकार कॉलेजों, स्कूलों और प्रोफेशनल संस्थानों में AI और डिजिटल स्किल्स से जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरु करने की योजना बना रही है। ऐसा माना जा रहा है कि पारंपरिक नौकरियों में बदलाव के खतरे को देखते हुए, सरकार नए तकनीक के मुताबिक लोगों को तैयार करना चाहती है।
केरल के इस कदम से पड़ोसी राज्य तमिलनाडु पर भी प्रभाव पड़ा है। चुनावी प्रचार के दौरान टीवीके प्रमुख थलपति विजय ने भी अलग AI मंत्रालय या AI गवर्नेंस सिस्टम बनाने का वादा किया था। राजनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है कि तमिलनाडु सरकार भी जल्द इस दिशा में कोई महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अन्य राज्य भी AI को लेकर अपनी नीतियाँ बना सकते हैं। अब AI को केवल टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि प्रशासन और अर्थव्यवस्था का नया इंजन माना जा रहा है।
अगर हम दुनिया के दूसरे देशों पर नजर डालें तो संयुक्त अरब अमीरात ने 2017 में ही AI मंत्री नियुक्त कर लिया था। UAE आज स्मार्ट सिटी, ऑटोमेशन और AI रिसर्च में भारी निवेश कर रहा है। वहीं सऊदी अरब और सिंगापुर भी AI नीति और सुरक्षा ढांचे पर तेजी से काम कर रहे हैं। ऐसे में, केरल का यह कदम भारत में AI गवर्नेंस की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
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केरल में बना देश का पहला AI मंत्रालय, जानें कैसे काम करेगी यह मिनिस्ट्री
नेशनल डेस्क
भारत में पहली बार किसी राज्य सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया है। यह कदम केंद्रीय सरकार की बजाय केरल सरकार ने उठाया है। नई सरकार में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता पी. के. कुन्हालीकुट्टी को AI विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह केरल देश का पहला राज्य बन गया है, जहां AI के लिए न केवल एक मंत्रालय बल्कि एक मंत्री भी बनाया गया है। यह निर्णय तकनीकी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि आने वाले समय में प्रशासनिक और आर्थिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि AI अब सिर्फ मोबाइल ऐप या चैटबॉट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, ट्रैफिक, सरकारी सेवाओं और रोजगार पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, AI मंत्रालय का काम विभिन्न विभागों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को एक नीति के तहत लाना होगा। पहले टेक्नोलॉजी से जुड़े फैसले अलग-अलग विभाग अपने तरीके से लेते थे, लेकिन अब AI से संबंधित कार्यों के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था बनाई जाएगी। खबर है कि अस्पतालों में बीमारियों की जल्दी पहचान, ट्रैफिक सिस्टम को स्मार्ट बनाने, सरकारी शिकायतों के निपटारे और ऑनलाइन सेवाओं को तेज करने में AI का उपयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। राज्य सरकार इस दिशा में रिसर्च और टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ भी सहयोग कर सकती है।
केरल हमेशा से शिक्षा और डिजिटल साक्षरता में अग्रणी रहा है। अब AI मंत्रालय की स्थापना के बाद, राज्य स्टार्टअप, रिसर्च सेंटर और निवेश आकर्षित करने का प्रयास करेगा। सूत्रों के मुताबिक, AI आधारित उद्योग आने वाले वर्षों में एक बड़ा रोजगार क्षेत्र बन सकती है। इसीलिए सरकार कॉलेजों, स्कूलों और प्रोफेशनल संस्थानों में AI और डिजिटल स्किल्स से जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरु करने की योजना बना रही है। ऐसा माना जा रहा है कि पारंपरिक नौकरियों में बदलाव के खतरे को देखते हुए, सरकार नए तकनीक के मुताबिक लोगों को तैयार करना चाहती है।
केरल के इस कदम से पड़ोसी राज्य तमिलनाडु पर भी प्रभाव पड़ा है। चुनावी प्रचार के दौरान टीवीके प्रमुख थलपति विजय ने भी अलग AI मंत्रालय या AI गवर्नेंस सिस्टम बनाने का वादा किया था। राजनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है कि तमिलनाडु सरकार भी जल्द इस दिशा में कोई महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अन्य राज्य भी AI को लेकर अपनी नीतियाँ बना सकते हैं। अब AI को केवल टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि प्रशासन और अर्थव्यवस्था का नया इंजन माना जा रहा है।
अगर हम दुनिया के दूसरे देशों पर नजर डालें तो संयुक्त अरब अमीरात ने 2017 में ही AI मंत्री नियुक्त कर लिया था। UAE आज स्मार्ट सिटी, ऑटोमेशन और AI रिसर्च में भारी निवेश कर रहा है। वहीं सऊदी अरब और सिंगापुर भी AI नीति और सुरक्षा ढांचे पर तेजी से काम कर रहे हैं। ऐसे में, केरल का यह कदम भारत में AI गवर्नेंस की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
