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24 साल से लंबित वेतन–पेंशन के मुद्दे पर NTPC मुख्यालय के बाहर 96 पूर्व सैनिकों का प्रदर्शन
डिजिटल डेस्क
प्रेस क्लब ब्रीफिंग के बाद तेज हुआ आंदोलन, समयबद्ध समाधान न होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी
दाभोल पावर प्रोजेक्ट, एनटीपीसी और रत्नागिरी गैस एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 96 पूर्व सैनिकों ने शनिवार को लोधी रोड स्थित स्कोप कॉम्प्लेक्स में एनटीपीसी मुख्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का उद्देश्य पिछले 24 वर्षों से लंबित वेतन और पेंशन बकाया के शीघ्र निपटारे की मांग को दोहराना था।
यह विरोध प्रदर्शन एक दिन पहले प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस वार्ता के बाद हुआ, जिसमें पूर्व सैनिकों ने संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। प्रेस ब्रीफिंग में उन्होंने दावा किया था कि संवैधानिक, कानूनी और प्रशासनिक सभी विकल्प अपनाने के बावजूद अब तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली है।
प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिकों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही देरी के कारण वे गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कई पूर्व कर्मी अब वृद्धावस्था में हैं और उनके सामने इलाज, आवास और दैनिक जरूरतों को पूरा करने की चुनौती खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि यह मामला अब केवल व्यक्तिगत बकाया का नहीं, बल्कि 96 परिवारों की आजीविका और सम्मान से जुड़ा हुआ है।
प्रदर्शन के दौरान एनटीपीसी के अधिकारियों ने पूर्व सैनिकों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। एनटीपीसी की ओर से बीट अधिकारी राजेश चौधरी सहित दो अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि सोमवार को उनकी शिकायतों को औपचारिक रूप से सुना जाएगा और संबंधित विभागों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी।
पूर्व सैनिकों की ओर से वी. एस. सालुंखे ने कहा कि दो दशक से अधिक समय तक सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद अब धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिया गया आश्वासन तभी स्वीकार्य होगा, जब वह समयबद्ध और ठोस कार्रवाई में बदलेगा।
सुरेश पचपुटे ने कहा कि इस लंबे विवाद पर सार्वजनिक चुप्पी समाज और व्यवस्था दोनों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है। वहीं चंद्रकांत शिंदे ने इसे केवल प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि सामूहिक गरिमा और न्याय से जुड़ा विषय बताया।
आगे की रणनीति को लेकर विजय निकम ने कहा कि यदि एनटीपीसी और संबंधित एजेंसियां जल्द समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठातीं, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, जिसमें अनिश्चितकालीन धरना भी शामिल हो सकता है।
पूर्व सैनिकों ने दोहराया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और एनटीपीसी प्रबंधन से अपील की कि लंबे समय से लंबित वेतन और पेंशन बकाया का स्पष्ट और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
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दाभोल पावर प्रोजेक्ट, एनटीपीसी और रत्नागिरी गैस एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 96 पूर्व सैनिकों ने शनिवार को लोधी रोड स्थित स्कोप कॉम्प्लेक्स में एनटीपीसी मुख्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का उद्देश्य पिछले 24 वर्षों से लंबित वेतन और पेंशन बकाया के शीघ्र निपटारे की मांग को दोहराना था।
यह विरोध प्रदर्शन एक दिन पहले प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस वार्ता के बाद हुआ, जिसमें पूर्व सैनिकों ने संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। प्रेस ब्रीफिंग में उन्होंने दावा किया था कि संवैधानिक, कानूनी और प्रशासनिक सभी विकल्प अपनाने के बावजूद अब तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली है।
प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिकों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही देरी के कारण वे गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कई पूर्व कर्मी अब वृद्धावस्था में हैं और उनके सामने इलाज, आवास और दैनिक जरूरतों को पूरा करने की चुनौती खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि यह मामला अब केवल व्यक्तिगत बकाया का नहीं, बल्कि 96 परिवारों की आजीविका और सम्मान से जुड़ा हुआ है।
प्रदर्शन के दौरान एनटीपीसी के अधिकारियों ने पूर्व सैनिकों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। एनटीपीसी की ओर से बीट अधिकारी राजेश चौधरी सहित दो अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि सोमवार को उनकी शिकायतों को औपचारिक रूप से सुना जाएगा और संबंधित विभागों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी।
पूर्व सैनिकों की ओर से वी. एस. सालुंखे ने कहा कि दो दशक से अधिक समय तक सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद अब धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिया गया आश्वासन तभी स्वीकार्य होगा, जब वह समयबद्ध और ठोस कार्रवाई में बदलेगा।
सुरेश पचपुटे ने कहा कि इस लंबे विवाद पर सार्वजनिक चुप्पी समाज और व्यवस्था दोनों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है। वहीं चंद्रकांत शिंदे ने इसे केवल प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि सामूहिक गरिमा और न्याय से जुड़ा विषय बताया।
आगे की रणनीति को लेकर विजय निकम ने कहा कि यदि एनटीपीसी और संबंधित एजेंसियां जल्द समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठातीं, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, जिसमें अनिश्चितकालीन धरना भी शामिल हो सकता है।
पूर्व सैनिकों ने दोहराया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और एनटीपीसी प्रबंधन से अपील की कि लंबे समय से लंबित वेतन और पेंशन बकाया का स्पष्ट और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
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