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नेशनल अर्बन कॉन्क्लेव में यूपी मॉडल की गूंज — ए.के. शर्मा बोले, “हमारे नगर बनेंगे विकसित भारत का चेहरा”
नई दिल्ली में चल रहे नेशनल अर्बन कॉन्क्लेव के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री श्री ए.के. शर्मा ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से सबका ध्यान खींचा।
इस कॉन्क्लेव में केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में देश-विदेश के सैकड़ों विशेषज्ञ, बैंकर और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
मंत्री श्री शर्मा ने अपने संबोधन में बताया कि उत्तर प्रदेश आज शहरी विकास का एक नया मॉडल बनकर उभर रहा है, जहाँ मनुष्य, मशीन, तकनीक और जनभागीदारी के अद्भुत समन्वय से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के सपने में नगरों की भूमिका सबसे अहम है, और यूपी उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।”

कूड़े के पहाड़ से पार्क तक — लखनऊ मॉडल बना उदाहरण
श्री शर्मा ने अपने वक्तव्य में लखनऊ में हुए ऐतिहासिक बदलावों का उदाहरण देते हुए बताया कि शिवरी कूड़ा प्रोसेसिंग प्लांट आज एक वैश्विक प्रेरणा बन गया है।
जहाँ कभी 60 वर्षों का 20 लाख टन कचरा इकट्ठा था, वहाँ अब 75% से अधिक अपशिष्ट को प्रोसेस कर उपयोगी वस्तुएँ बनाई जा चुकी हैं।
इससे 21 एकड़ ज़मीन खाली कर वहाँ आधुनिक पार्क, कार्यालय और मीटिंग हॉल तैयार किए गए हैं।

इसी तरह घैला क्षेत्र में जमा 7 लाख टन कचरे को हटाकर “अटल प्रेरणा पार्क” का निर्माण किया गया, जबकि उससे प्राप्त सामग्री से ‘यूपी दर्शन पार्क’ का निर्माण किया गया — जो अब एक अंतरराष्ट्रीय उदाहरण बन चुका है।
जीरो वेस्ट सिटी की दिशा में कदम
मंत्री ने कहा कि लखनऊ अब “जीरो डेली वेस्ट सिटी” बनने की दिशा में अग्रसर है, जहाँ रोजाना निकलने वाले 2100 टन कचरे को प्रतिदिन प्रोसेस किया जा रहा है।
यह प्रयास सुनिश्चित करेगा कि आने वाले समय में शहर में फिर कभी “कूड़े के पहाड़” न बनें।
प्रयागराज और आगरा में भी नए प्रयोग
उन्होंने बताया कि प्रयागराज और आगरा में भी अपशिष्ट प्रबंधन के अभिनव प्रयोग किए गए हैं। प्रयागराज में तो पुराने डंप यार्ड की जगह “शिवालय पार्क” का निर्माण किया गया है। इन स्थानों पर मियावाकी वनों और स्मार्ट पार्कों के रूप में नई हरियाली उभरी है।
पीपीपी मॉडल से मिल रहा नया आयाम
श्री शर्मा ने कहा कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के ज़रिए उत्तर प्रदेश में नगरीय विकास को नई दिशा मिल रही है।
उनके अनुसार, “जनभागीदारी और तकनीक के मेल से ही सशक्त और आत्मनिर्भर नगर बन सकते हैं।”
कॉनक्लेव में सराहा गया यूपी मॉडल
कॉनक्लेव में उपस्थित विशेषज्ञों, केंद्रीय मंत्रियों और अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश में हो रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि “यूपी का शहरी मॉडल पूरे देश के लिए मार्गदर्शक बन सकता है।”
मंत्री के वित्तीय सुधारों, तकनीक आधारित प्रबंधन और नवाचारों को भी व्यापक रूप से सराहा गया।
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इस कॉन्क्लेव में केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में देश-विदेश के सैकड़ों विशेषज्ञ, बैंकर और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
मंत्री श्री शर्मा ने अपने संबोधन में बताया कि उत्तर प्रदेश आज शहरी विकास का एक नया मॉडल बनकर उभर रहा है, जहाँ मनुष्य, मशीन, तकनीक और जनभागीदारी के अद्भुत समन्वय से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के सपने में नगरों की भूमिका सबसे अहम है, और यूपी उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।”

कूड़े के पहाड़ से पार्क तक — लखनऊ मॉडल बना उदाहरण
श्री शर्मा ने अपने वक्तव्य में लखनऊ में हुए ऐतिहासिक बदलावों का उदाहरण देते हुए बताया कि शिवरी कूड़ा प्रोसेसिंग प्लांट आज एक वैश्विक प्रेरणा बन गया है।
जहाँ कभी 60 वर्षों का 20 लाख टन कचरा इकट्ठा था, वहाँ अब 75% से अधिक अपशिष्ट को प्रोसेस कर उपयोगी वस्तुएँ बनाई जा चुकी हैं।
इससे 21 एकड़ ज़मीन खाली कर वहाँ आधुनिक पार्क, कार्यालय और मीटिंग हॉल तैयार किए गए हैं।

इसी तरह घैला क्षेत्र में जमा 7 लाख टन कचरे को हटाकर “अटल प्रेरणा पार्क” का निर्माण किया गया, जबकि उससे प्राप्त सामग्री से ‘यूपी दर्शन पार्क’ का निर्माण किया गया — जो अब एक अंतरराष्ट्रीय उदाहरण बन चुका है।
जीरो वेस्ट सिटी की दिशा में कदम
मंत्री ने कहा कि लखनऊ अब “जीरो डेली वेस्ट सिटी” बनने की दिशा में अग्रसर है, जहाँ रोजाना निकलने वाले 2100 टन कचरे को प्रतिदिन प्रोसेस किया जा रहा है।
यह प्रयास सुनिश्चित करेगा कि आने वाले समय में शहर में फिर कभी “कूड़े के पहाड़” न बनें।
प्रयागराज और आगरा में भी नए प्रयोग
उन्होंने बताया कि प्रयागराज और आगरा में भी अपशिष्ट प्रबंधन के अभिनव प्रयोग किए गए हैं। प्रयागराज में तो पुराने डंप यार्ड की जगह “शिवालय पार्क” का निर्माण किया गया है। इन स्थानों पर मियावाकी वनों और स्मार्ट पार्कों के रूप में नई हरियाली उभरी है।
पीपीपी मॉडल से मिल रहा नया आयाम
श्री शर्मा ने कहा कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के ज़रिए उत्तर प्रदेश में नगरीय विकास को नई दिशा मिल रही है।
उनके अनुसार, “जनभागीदारी और तकनीक के मेल से ही सशक्त और आत्मनिर्भर नगर बन सकते हैं।”
कॉनक्लेव में सराहा गया यूपी मॉडल
कॉनक्लेव में उपस्थित विशेषज्ञों, केंद्रीय मंत्रियों और अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश में हो रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि “यूपी का शहरी मॉडल पूरे देश के लिए मार्गदर्शक बन सकता है।”
मंत्री के वित्तीय सुधारों, तकनीक आधारित प्रबंधन और नवाचारों को भी व्यापक रूप से सराहा गया।
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