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सूरत से ‘इको क्रांति’ का आगाज़: रविशंकर के नेतृत्व में आर्ट ऑफ लिविंग का प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान शुरू
Jagran Desk
सूरत महानगरपालिका और आर्ट ऑफ लिविंग के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता, ‘Eco Kranti’ के तहत सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर रोक और हरित नवाचारों को मिलेगा बढ़ावा।
भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में शुमार सूरत अब “भारत का सर्वाधिक हरित नगर” बनने की दिशा में अग्रसर है। आर्ट ऑफ लिविंग के Sri Sri Rural Development Programme & Sustainability (SSRDP) और सूरत महानगरपालिका (SMC) के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते (MoU) के साथ रविवार को यहां ‘इको क्रांति (Eco Kranti)’ अभियान की औपचारिक शुरुआत हुई।
यह मिशन आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव रविशंकर के प्रेरणादायक नेतृत्व में शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य देश को सिंगल यूज़ प्लास्टिक से मुक्त कर स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भारत का निर्माण करना है।

क्या है ‘इको क्रांति’ का उद्देश्य
‘इको क्रांति’ मिशन का प्रमुख लक्ष्य सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को समाप्त करना और नागरिकों में पर्यावरण हितैषी जीवनशैली को प्रोत्साहित करना है। SSRDP और SMC के सहयोग से शहर में वेस्ट रीसाइक्लिंग, ग्रीन इनोवेशन, और सस्टेनेबल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा।
इस अभियान का दृष्टिकोण साफ़ है — विकास और पर्यावरण का संतुलन। आर्ट ऑफ लिविंग का कहना है कि आधुनिक भारत को ऐसा मॉडल अपनाना होगा, जहां प्रकृति और प्रगति एक साथ चलें, न कि एक-दूसरे के विरोध में।
क्यों जरूरी है यह पहल
विशेषज्ञों के अनुसार, सिंगल यूज़ प्लास्टिक आज पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। ये प्लास्टिक सूक्ष्म कणों में टूटकर हवा, जल और भोजन में घुल जाते हैं। शोधों के मुताबिक, हर व्यक्ति प्रति सप्ताह एक क्रेडिट कार्ड के आकार जितना माइक्रोप्लास्टिक निगल रहा है, जो कैंसर, हार्मोनल असंतुलन, और प्रजनन विकारों जैसी बीमारियों का कारण बन रहा है।
गुरुदेव रविशंकर ने कहा है, “प्लास्टिक केवल पर्यावरण नहीं, यह हमारे शरीर के लिए भी विष है। हमें अब प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।”
सूरत बना उदाहरण
अभियान के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सूरत नगर भाजपा अध्यक्ष परेश पटेल, महापौर दाक्षेश मावाणी, SMC स्थायी समिति अध्यक्ष राजन पटेल, SSRDP के निदेशक देवेग वोरा (जो गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के प्रतिनिधि थे), तथा आर्ट ऑफ लिविंग शिक्षक सी.ए. हरी अरोरा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान सूरत की उन अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों में ‘इको क्रांति’ उत्पाद वितरित किए गए जहां प्लास्टिक उपयोग की मात्रा अधिक है। लॉन्च के पहले ही दिन ₹10 लाख से अधिक मूल्य के उत्पाद सूरत के 50 से अधिक स्थानों पर निःशुल्क बांटे गए।
क्या हैं ‘इको क्रांति’ उत्पाद
आर्ट ऑफ लिविंग ने इस मिशन के अंतर्गत ऐसी पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद श्रृंखला विकसित की है, जो 9 महीनों में प्राकृतिक रूप से विघटित होकर खाद बन जाती है। जबकि पारंपरिक प्लास्टिक को विघटित होने में हजारों वर्ष लगते हैं। ये उत्पाद अब Amazon और Blinkit जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हैं, जिससे नागरिकों के लिए टिकाऊ विकल्प अपनाना और भी आसान हो गया है।
आगे की दिशा
‘इको क्रांति’ का उद्देश्य केवल सूरत तक सीमित नहीं रहेगा। SSRDP आने वाले महीनों में इस पहल को अन्य महानगरों और राज्यों में भी विस्तार देने की योजना बना रहा है। अभियान का दीर्घकालिक लक्ष्य भारत को प्लास्टिक मुक्त राष्ट्र बनाना और प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण का सहभागी बनाना है।
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Jagran Desk
भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में शुमार सूरत अब “भारत का सर्वाधिक हरित नगर” बनने की दिशा में अग्रसर है। आर्ट ऑफ लिविंग के Sri Sri Rural Development Programme & Sustainability (SSRDP) और सूरत महानगरपालिका (SMC) के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते (MoU) के साथ रविवार को यहां ‘इको क्रांति (Eco Kranti)’ अभियान की औपचारिक शुरुआत हुई।
यह मिशन आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव रविशंकर के प्रेरणादायक नेतृत्व में शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य देश को सिंगल यूज़ प्लास्टिक से मुक्त कर स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भारत का निर्माण करना है।

क्या है ‘इको क्रांति’ का उद्देश्य
‘इको क्रांति’ मिशन का प्रमुख लक्ष्य सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को समाप्त करना और नागरिकों में पर्यावरण हितैषी जीवनशैली को प्रोत्साहित करना है। SSRDP और SMC के सहयोग से शहर में वेस्ट रीसाइक्लिंग, ग्रीन इनोवेशन, और सस्टेनेबल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा।
इस अभियान का दृष्टिकोण साफ़ है — विकास और पर्यावरण का संतुलन। आर्ट ऑफ लिविंग का कहना है कि आधुनिक भारत को ऐसा मॉडल अपनाना होगा, जहां प्रकृति और प्रगति एक साथ चलें, न कि एक-दूसरे के विरोध में।
क्यों जरूरी है यह पहल
विशेषज्ञों के अनुसार, सिंगल यूज़ प्लास्टिक आज पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। ये प्लास्टिक सूक्ष्म कणों में टूटकर हवा, जल और भोजन में घुल जाते हैं। शोधों के मुताबिक, हर व्यक्ति प्रति सप्ताह एक क्रेडिट कार्ड के आकार जितना माइक्रोप्लास्टिक निगल रहा है, जो कैंसर, हार्मोनल असंतुलन, और प्रजनन विकारों जैसी बीमारियों का कारण बन रहा है।
गुरुदेव रविशंकर ने कहा है, “प्लास्टिक केवल पर्यावरण नहीं, यह हमारे शरीर के लिए भी विष है। हमें अब प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।”
सूरत बना उदाहरण
अभियान के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सूरत नगर भाजपा अध्यक्ष परेश पटेल, महापौर दाक्षेश मावाणी, SMC स्थायी समिति अध्यक्ष राजन पटेल, SSRDP के निदेशक देवेग वोरा (जो गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के प्रतिनिधि थे), तथा आर्ट ऑफ लिविंग शिक्षक सी.ए. हरी अरोरा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान सूरत की उन अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों में ‘इको क्रांति’ उत्पाद वितरित किए गए जहां प्लास्टिक उपयोग की मात्रा अधिक है। लॉन्च के पहले ही दिन ₹10 लाख से अधिक मूल्य के उत्पाद सूरत के 50 से अधिक स्थानों पर निःशुल्क बांटे गए।
क्या हैं ‘इको क्रांति’ उत्पाद
आर्ट ऑफ लिविंग ने इस मिशन के अंतर्गत ऐसी पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद श्रृंखला विकसित की है, जो 9 महीनों में प्राकृतिक रूप से विघटित होकर खाद बन जाती है। जबकि पारंपरिक प्लास्टिक को विघटित होने में हजारों वर्ष लगते हैं। ये उत्पाद अब Amazon और Blinkit जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हैं, जिससे नागरिकों के लिए टिकाऊ विकल्प अपनाना और भी आसान हो गया है।
आगे की दिशा
‘इको क्रांति’ का उद्देश्य केवल सूरत तक सीमित नहीं रहेगा। SSRDP आने वाले महीनों में इस पहल को अन्य महानगरों और राज्यों में भी विस्तार देने की योजना बना रहा है। अभियान का दीर्घकालिक लक्ष्य भारत को प्लास्टिक मुक्त राष्ट्र बनाना और प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण का सहभागी बनाना है।
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