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उत्तराखंड में ‘जन-जन की सरकार’ का असर: 83 हजार से अधिक नागरिकों तक पहुँची सेवाएं, 10 हजार से ज्यादा समस्याओं का समाधान
डिजिटल डेस्क
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चला जनसंपर्क अभियान, 144 शिविरों के जरिए गांव-गांव तक पहुँची सरकार
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम राज्य प्रशासन की कार्यशैली में बड़ा बदलाव लेकर आया है। इस अभियान के तहत सरकार न केवल लोगों की शिकायतें सुन रही है, बल्कि तय समय में समाधान सुनिश्चित कर रही है। राज्य के सभी 13 जिलों में आयोजित शिविरों के माध्यम से अब तक 83,852 नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाया गया है, जिससे यह कार्यक्रम जनहित की एक प्रभावी पहल बनकर उभरा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अभियान के तहत कुल 144 समाधान शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में नागरिकों से 13,900 से अधिक आवेदन और शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 10,478 मामलों का मौके पर या तय अवधि में निस्तारण किया गया। शेष मामलों को संबंधित विभागों को सौंपते हुए समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि यह पहल पारंपरिक फाइल आधारित प्रक्रिया से आगे बढ़कर त्वरित निर्णय और परिणाम देने की दिशा में अहम कदम है।
इन शिविरों के दौरान 14,920 से अधिक प्रमाण पत्र मौके पर वितरित किए गए, जिनमें जाति, निवास, आय और अन्य जरूरी दस्तावेज शामिल हैं। इसके अलावा, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से 52,617 से अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया। पेंशन, स्वास्थ्य सहायता, स्वरोजगार, दिव्यांग सहायता और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सीधे पात्र नागरिकों तक पहुंचाया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को लेकर कहा कि सरकार का उद्देश्य जनता को दफ्तरों के चक्कर से मुक्त करना है। उनका कहना है कि प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह खुद लोगों तक पहुंचे, उनकी समस्याओं को समझे और समाधान सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शिविरों में प्राप्त हर शिकायत का निस्तारण केवल औपचारिकता न हो, बल्कि गुणवत्ता और संवेदनशीलता के साथ किया जाए।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का खास फोकस उन वर्गों पर रहा है, जो सामान्यतः सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाते। बुजुर्ग, दिव्यांग, दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्राथमिकता दी गई। कई मामलों में अधिकारी स्वयं लाभार्थियों के घर तक पहुंचे और आवश्यक दस्तावेज व सहायता उपलब्ध कराई।
विश्लेषकों का मानना है कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम ने उत्तराखंड में विश्वास आधारित शासन को मजबूत किया है। पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सेवा वितरण इस पहल की प्रमुख विशेषताएं बनकर सामने आई हैं। इससे न केवल शिकायतों का समाधान हुआ, बल्कि योजनाओं की जानकारी भी अंतिम व्यक्ति तक पहुंची।
आने वाले महीनों में सरकार इस मॉडल को और विस्तार देने की तैयारी में है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र नागरिक सरकारी लाभ से वंचित न रहे। मौजूदा आंकड़े संकेत देते हैं कि यह अभियान उत्तराखंड में सुशासन की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार कर चुका है।
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डिजिटल डेस्क
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम राज्य प्रशासन की कार्यशैली में बड़ा बदलाव लेकर आया है। इस अभियान के तहत सरकार न केवल लोगों की शिकायतें सुन रही है, बल्कि तय समय में समाधान सुनिश्चित कर रही है। राज्य के सभी 13 जिलों में आयोजित शिविरों के माध्यम से अब तक 83,852 नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाया गया है, जिससे यह कार्यक्रम जनहित की एक प्रभावी पहल बनकर उभरा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अभियान के तहत कुल 144 समाधान शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में नागरिकों से 13,900 से अधिक आवेदन और शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 10,478 मामलों का मौके पर या तय अवधि में निस्तारण किया गया। शेष मामलों को संबंधित विभागों को सौंपते हुए समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि यह पहल पारंपरिक फाइल आधारित प्रक्रिया से आगे बढ़कर त्वरित निर्णय और परिणाम देने की दिशा में अहम कदम है।
इन शिविरों के दौरान 14,920 से अधिक प्रमाण पत्र मौके पर वितरित किए गए, जिनमें जाति, निवास, आय और अन्य जरूरी दस्तावेज शामिल हैं। इसके अलावा, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से 52,617 से अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया। पेंशन, स्वास्थ्य सहायता, स्वरोजगार, दिव्यांग सहायता और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सीधे पात्र नागरिकों तक पहुंचाया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को लेकर कहा कि सरकार का उद्देश्य जनता को दफ्तरों के चक्कर से मुक्त करना है। उनका कहना है कि प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह खुद लोगों तक पहुंचे, उनकी समस्याओं को समझे और समाधान सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शिविरों में प्राप्त हर शिकायत का निस्तारण केवल औपचारिकता न हो, बल्कि गुणवत्ता और संवेदनशीलता के साथ किया जाए।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का खास फोकस उन वर्गों पर रहा है, जो सामान्यतः सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाते। बुजुर्ग, दिव्यांग, दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्राथमिकता दी गई। कई मामलों में अधिकारी स्वयं लाभार्थियों के घर तक पहुंचे और आवश्यक दस्तावेज व सहायता उपलब्ध कराई।
विश्लेषकों का मानना है कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम ने उत्तराखंड में विश्वास आधारित शासन को मजबूत किया है। पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सेवा वितरण इस पहल की प्रमुख विशेषताएं बनकर सामने आई हैं। इससे न केवल शिकायतों का समाधान हुआ, बल्कि योजनाओं की जानकारी भी अंतिम व्यक्ति तक पहुंची।
आने वाले महीनों में सरकार इस मॉडल को और विस्तार देने की तैयारी में है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र नागरिक सरकारी लाभ से वंचित न रहे। मौजूदा आंकड़े संकेत देते हैं कि यह अभियान उत्तराखंड में सुशासन की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार कर चुका है।
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