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अलवर के सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहाल, स्टाफ की हुई भारी कमी
नेशनल डेस्क
अलवर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में 146 में से 97 पैरामेडिकल पद खाली हैं। स्वास्थ्य सेवाएं 650 से ज्यादा ठेका कर्मचारियों के भरोसे चल रही हैं।
अलवर जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं इस वक्त गंभीर स्टाफ संकट के बीच चल रही हैं। हालत यह है कि अस्पताल की रोजमर्रा की व्यवस्था से लेकर कई तकनीकी सेवाएं तक ठेका कर्मचारियों के भरोसे चल रही हैं। अलवर सरकारी अस्पताल में स्टाफ संकट का असर अब साफ तौर पर मरीजों की सुविधाओं पर भी दिखने लगा है। रिकॉर्ड के मुताबिक अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ के 146 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 97 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। सबसे ज्यादा कमी वार्ड ब्वॉय, सफाईकर्मी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की है। वार्ड ब्वॉय के 83 स्वीकृत पदों में 60 खाली हैं, जबकि स्वीपर के 37 पदों में से 28 पर नियुक्ति नहीं है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 10 पदों में 6 खाली पड़े हैं। ऐसे में अस्पताल का बड़ा हिस्सा अस्थायी कर्मचारियों के सहारे चल रहा है और स्थायी स्टाफ की कमी लगातार दबाव बढ़ा रही है।
अस्पताल में सिर्फ सामान्य कामकाज ही नहीं, कई तकनीकी जिम्मेदारियां भी अब ठेका व्यवस्था पर टिकी हुई हैं। डेंटल टेक्नीशियन के दो पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक पद खाली है। सीनियर डेंटल टेक्नीशियन, ऑप्टोमेट्रिस्ट और ऑप्टोमेट्रिस्ट ग्रेड-1 के एक-एक पद भी लंबे समय से रिक्त बताए जा रहे हैं। ऑप्टोमेट्रिस्ट असिस्टेंट के दोनों स्वीकृत पद खाली हैं, जिससे आंखों से जुड़ी जांच और सेवाओं पर असर पड़ रहा है। फिजियोथेरेपिस्ट का केवल एक पद स्वीकृत है, लेकिन अस्पताल में दो फिजियोथेरेपिस्ट काम कर रहे हैं। यह स्थिति भी व्यवस्था की असंतुलित तस्वीर दिखाती है। बताया जा रहा है कि जिन सेवाओं के लिए नियमित और प्रशिक्षित स्थायी स्टाफ होना चाहिए, वहां भी अब ठेका कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार स्वीकृत पदों के मुकाबले नई भर्तियां नहीं होने से यह संकट लगातार गहराता गया है।
अस्पताल की व्यवस्था फिलहाल चार ठेका कंपनियों के जरिए चल रही है, जिनके माध्यम से 650 से ज्यादा कर्मचारी विभिन्न सेवाओं में लगे हुए हैं। इनमें लैब टेक्नीशियन, नर्सिंगकर्मी, सफाईकर्मी, सुरक्षा गार्ड और तकनीकी स्टाफ तक शामिल हैं। दंत रोग विभाग में दो डेंटल टेक्नीशियन कार्यरत हैं, जबकि 15 लैब टेक्नीशियन और एक लैब असिस्टेंट सेवाएं दे रहे हैं। ब्लड बैंक में एक काउंसलर तैनात है। इसके अलावा 6 इलेक्ट्रिशियन, 6 प्लंबर, एक गार्डनर, एक टेलर, 12 ड्राइवर, 6 एलडीसी और 42 गार्ड भी ठेका प्रणाली के तहत काम कर रहे हैं। अस्पताल में 3-3 लिफ्ट ऑपरेटर और ट्रॉलीमैन, 20 फार्मासिस्ट और 8 ऑक्सीजन ऑपरेटर भी इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं। नर्सिंग सेवाओं की बात करें तो 100 से अधिक नर्सिंगकर्मी काम कर रहे हैं, जबकि स्वीकृत पद 87 ही हैं। यानी कुछ विभागों में जरूरत से ज्यादा ठेका स्टाफ है और कई अहम स्थायी पद खाली पड़े हैं।
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अलवर के सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहाल, स्टाफ की हुई भारी कमी
नेशनल डेस्क
अलवर जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं इस वक्त गंभीर स्टाफ संकट के बीच चल रही हैं। हालत यह है कि अस्पताल की रोजमर्रा की व्यवस्था से लेकर कई तकनीकी सेवाएं तक ठेका कर्मचारियों के भरोसे चल रही हैं। अलवर सरकारी अस्पताल में स्टाफ संकट का असर अब साफ तौर पर मरीजों की सुविधाओं पर भी दिखने लगा है। रिकॉर्ड के मुताबिक अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ के 146 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 97 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। सबसे ज्यादा कमी वार्ड ब्वॉय, सफाईकर्मी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की है। वार्ड ब्वॉय के 83 स्वीकृत पदों में 60 खाली हैं, जबकि स्वीपर के 37 पदों में से 28 पर नियुक्ति नहीं है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 10 पदों में 6 खाली पड़े हैं। ऐसे में अस्पताल का बड़ा हिस्सा अस्थायी कर्मचारियों के सहारे चल रहा है और स्थायी स्टाफ की कमी लगातार दबाव बढ़ा रही है।
अस्पताल में सिर्फ सामान्य कामकाज ही नहीं, कई तकनीकी जिम्मेदारियां भी अब ठेका व्यवस्था पर टिकी हुई हैं। डेंटल टेक्नीशियन के दो पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक पद खाली है। सीनियर डेंटल टेक्नीशियन, ऑप्टोमेट्रिस्ट और ऑप्टोमेट्रिस्ट ग्रेड-1 के एक-एक पद भी लंबे समय से रिक्त बताए जा रहे हैं। ऑप्टोमेट्रिस्ट असिस्टेंट के दोनों स्वीकृत पद खाली हैं, जिससे आंखों से जुड़ी जांच और सेवाओं पर असर पड़ रहा है। फिजियोथेरेपिस्ट का केवल एक पद स्वीकृत है, लेकिन अस्पताल में दो फिजियोथेरेपिस्ट काम कर रहे हैं। यह स्थिति भी व्यवस्था की असंतुलित तस्वीर दिखाती है। बताया जा रहा है कि जिन सेवाओं के लिए नियमित और प्रशिक्षित स्थायी स्टाफ होना चाहिए, वहां भी अब ठेका कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार स्वीकृत पदों के मुकाबले नई भर्तियां नहीं होने से यह संकट लगातार गहराता गया है।
अस्पताल की व्यवस्था फिलहाल चार ठेका कंपनियों के जरिए चल रही है, जिनके माध्यम से 650 से ज्यादा कर्मचारी विभिन्न सेवाओं में लगे हुए हैं। इनमें लैब टेक्नीशियन, नर्सिंगकर्मी, सफाईकर्मी, सुरक्षा गार्ड और तकनीकी स्टाफ तक शामिल हैं। दंत रोग विभाग में दो डेंटल टेक्नीशियन कार्यरत हैं, जबकि 15 लैब टेक्नीशियन और एक लैब असिस्टेंट सेवाएं दे रहे हैं। ब्लड बैंक में एक काउंसलर तैनात है। इसके अलावा 6 इलेक्ट्रिशियन, 6 प्लंबर, एक गार्डनर, एक टेलर, 12 ड्राइवर, 6 एलडीसी और 42 गार्ड भी ठेका प्रणाली के तहत काम कर रहे हैं। अस्पताल में 3-3 लिफ्ट ऑपरेटर और ट्रॉलीमैन, 20 फार्मासिस्ट और 8 ऑक्सीजन ऑपरेटर भी इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं। नर्सिंग सेवाओं की बात करें तो 100 से अधिक नर्सिंगकर्मी काम कर रहे हैं, जबकि स्वीकृत पद 87 ही हैं। यानी कुछ विभागों में जरूरत से ज्यादा ठेका स्टाफ है और कई अहम स्थायी पद खाली पड़े हैं।
