- Hindi News
- देश विदेश
- हिमाचल CM ने केंद्र से मांगी अतिरिक्त मदद, बढ़ी Borrowing Limit
हिमाचल CM ने केंद्र से मांगी अतिरिक्त मदद, बढ़ी Borrowing Limit
Digital Desk
हिमाचल CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र से अतिरिक्त वित्तीय सहायता और borrowing limit 3 से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने की मांग की।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति, बढ़ते खर्च और पहाड़ी राज्य में बुनियादी ढांचे के रखरखाव की ऊंची लागत को देखते हुए केंद्र से अतिरिक्त आर्थिक सहायता की मांग की।
सुक्खू ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत Revenue Deficit Grant (RDG) बंद होने के बाद वित्त वर्ष 2026-27 से हिमाचल प्रदेश को हर साल करीब 8,000 करोड़ रुपये के वित्तीय अंतर का सामना करना पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने राज्य की उधारी सीमा को मौजूदा GSDP के 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने की मांग भी रखी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्य की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिया।
8,000 करोड़ का वित्तीय अंतर
बैठक के दौरान सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश की मौजूदा वित्तीय स्थिति और सरकार के सामने मौजूद चुनौतियों से वित्त मंत्री को अवगत कराया।
मुख्यमंत्री ने वित्तीय दबाव के प्रमुख कारणों में 2026-27 से RDG के बंद होने को बताया। राज्य सरकार के आकलन के अनुसार, इस बदलाव के बाद हर साल करीब 8,000 करोड़ रुपये का वित्तीय अंतर पैदा हो सकता है।
सुक्खू ने कहा कि पिछले वर्षों में RDG में हुई कमी ने भी राज्य के वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ाया है।
राज्य की सीमित राजस्व क्षमता के बीच वेतन, पेंशन, आवश्यक सेवाओं और विकास कार्यों के खर्च को पूरा करना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।
उधारी सीमा बढ़ाने की मांग
मुख्यमंत्री ने केंद्र से हिमाचल प्रदेश की borrowing ceiling को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत GSDP करने का अनुरोध किया।
सुक्खू के अनुसार, अतिरिक्त उधारी की अनुमति मिलने से राज्य को अपनी प्रतिबद्ध वित्तीय देनदारियों को पूरा करने और जरूरी सार्वजनिक सेवाओं को जारी रखने में अधिक वित्तीय गुंजाइश मिलेगी।
इससे विकास परियोजनाओं के लिए भी अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।
यह मांग ऐसे समय आई है जब हिमाचल सरकार सीमित राजस्व क्षमता के बावजूद बढ़ते खर्च और वित्तीय प्रतिबद्धताओं को संभालने की कोशिश कर रही है।
पहाड़ी राज्य की लागत का मुद्दा
सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को राज्य की वित्तीय चुनौतियों का एक प्रमुख कारण बताया।
पहाड़ी इलाकों में सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण और रखरखाव मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक महंगा होता है। दूरदराज के क्षेत्रों तक सार्वजनिक सेवाएं पहुंचाने की लागत भी अधिक रहती है।
इसके अलावा, राज्य को भूस्खलन, बादल फटने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बार-बार नुकसान उठाना पड़ता है। सुक्खू ने हाल की आपदाओं से हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया।
EAP फंडिंग बढ़ाने की मांग
मुख्यमंत्री ने Externally Aided Projects (EAPs) के तहत हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली सहायता बढ़ाने का अनुरोध भी किया।
उन्होंने राज्य की बुनियादी ढांचा जरूरतों और पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक निर्माण लागत को देखते हुए EAP के तहत उपलब्ध सहायता को दोगुना करने का प्रस्ताव रखा।
सुक्खू ने Special Assistance to States for Capital Investment (SASCI) योजना के तहत आपूर्ति और वेंडर भुगतान को SNA-SPARSH मॉडल से छूट देने की मांग भी रखी।
राज्य सरकार का कहना है कि इन उपायों से बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाओं पर खर्च करने में अधिक वित्तीय लचीलापन मिल सकता है।
केंद्र ने दिया मदद का भरोसा
निर्मला सीतारमण ने हिमाचल प्रदेश सरकार की मांगों पर राज्य की वित्तीय जरूरतों और विकास प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए विचार करने का आश्वासन दिया।
उन्होंने हिमाचल के लिए Special Central Assistance के तहत अतिरिक्त वित्तीय सहायता पर विचार करने की बात भी कही।
हालांकि, बैठक के दौरान राज्य की borrowing limit को तत्काल 4 प्रतिशत करने या अतिरिक्त राशि जारी करने की कोई अंतिम मंजूरी नहीं दी गई।
अब राज्य सरकार को केंद्र की ओर से इन मांगों पर आगे की कार्रवाई और निर्णय का इंतजार रहेगा।
सुधारों की जानकारी भी दी
सुक्खू ने बैठक में राज्य सरकार की ओर से वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।
उन्होंने कहा कि सीमित संसाधन आधार के बावजूद सरकार राजस्व बढ़ाने और वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़ी पहलों का भी उल्लेख किया।
इनमें प्राकृतिक खेती से पैदा होने वाली फसलों के लिए Minimum Support Price देने की हिमाचल प्रदेश की नीति शामिल है। राज्य सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर और लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना तथा ग्रामीण आय को मजबूत करना है।
वित्तीय दबाव बना रहेगा
केंद्र से अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग हिमाचल प्रदेश की लगातार बनी हुई वित्तीय चुनौतियों को दर्शाती है।
राज्य को केंद्रीय हस्तांतरण में बदलाव के साथ-साथ बुनियादी ढांचे की ऊंची लागत और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का भी सामना करना पड़ रहा है।
अब आगे की दिशा केंद्र के फैसले पर निर्भर करेगी। खासतौर पर उधारी सीमा बढ़ाने, Special Central Assistance और EAP फंडिंग को लेकर केंद्र की प्रतिक्रिया हिमाचल की वित्तीय योजना के लिए महत्वपूर्ण होगी।
सुक्खू सरकार का तर्क है कि अतिरिक्त वित्तीय गुंजाइश से राज्य आवश्यक सेवाओं, विकास परियोजनाओं और आपदा प्रभावित बुनियादी ढांचे पर खर्च को बेहतर तरीके से संभाल सकेगा।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

