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ट्रंप का दावा: ईरान युद्ध जीतने पर 2 डॉलर से नीचे जाएगी गैस
Sandeep Patel
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान युद्ध में अमेरिका की जीत के बाद अमेरिकी गैस की कीमत 2 डॉलर प्रति गैलन से नीचे जा सकती है। जानें पूरा मामला।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच तेल और गैसोलीन की कीमतों को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि जब अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध में जीत हासिल करेगा, तब तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आएगी और अमेरिकी पेट्रोल की कीमत अंततः 2 डॉलर प्रति गैलन से नीचे पहुंच सकती है।
ट्रंप ने यह दावा सोमवार स्थानीय समय के अनुसार अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में किया। उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद ऊर्जा बाजार तेजी से स्थिर होंगे।
ट्रंप ने किया बड़ा दावा
ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की जीत के बाद तेल की कीमतों में "तेजी से" गिरावट आएगी। उन्होंने संकेत दिया कि गैसोलीन की कीमत पहले 3 डॉलर प्रति गैलन तक आ सकती है और इसके बाद यह 2 डॉलर प्रति गैलन से नीचे चली जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यह बदलाव तेजी से होगा। ट्रंप ने अपने बयान में दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
हालांकि, राष्ट्रपति ने इस अनुमान के लिए कोई निश्चित समयसीमा या ऐसी विशिष्ट आर्थिक परिस्थितियां नहीं बताईं जिनके आधार पर पेट्रोल की कीमत 2 डॉलर से नीचे पहुंचने की संभावना तय की जा सके।
अमेरिका में महंगा हुआ पेट्रोल
ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, लेबर डे सप्ताहांत के दौरान अमेरिकी पेट्रोल की राष्ट्रीय औसत कीमत करीब 4.14 डॉलर प्रति गैलन रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1 डॉलर अधिक है।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास जारी तनाव भी वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण चिंता बना हुआ है। इस मार्ग से दुनिया के तेल और गैस कारोबार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
ईरान ने दी जवाबी चेतावनी
ट्रंप के बयान के बीच ईरान की ओर से भी अमेरिकी ऊर्जा प्रतिष्ठानों को लेकर कड़ी चेतावनी सामने आई है।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ ने अमेरिका को ईरान के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमला करने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान का तेल और गैस उत्पादन ढांचा व्यापक है और इसकी पहुंच संभव है।
ग़ालिबाफ ने चेतावनी दी कि यदि ईरान के ऊर्जा परिसंपत्तियों को निशाना बनाया गया तो अमेरिकी तेल और गैस कंपनियों के हित भी प्रभावित हो सकते हैं।
इस बयान से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र को लेकर तनाव और बढ़ सकता है।
अमेरिकी सेना की भी चेतावनी
ईरान की चेतावनी से पहले अमेरिकी रक्षा अधिकारियों की ओर से भी ईरानी तेल टैंकरों को लेकर कड़ा रुख सामने आया था।
अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि यदि ईरान अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमला करता है तो अमेरिका ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बना सकता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी दावा किया है कि जिन तीन ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों को अमेरिकी कार्रवाई में निशाना बनाया गया, उनका संबंध ऐसे नेटवर्क से था जो कथित तौर पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को वित्तीय मदद देता है।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर ईरान के तेल बेड़े के खिलाफ और कार्रवाई की जा सकती है।
तेल बाजार पर बढ़ा दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। हालिया बाजार आंकड़ों में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत करीब 97 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट करीब 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करती बताई गई।
विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल आपूर्ति बाधित रहती है तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
इसके उलट, यदि युद्ध समाप्त होता है और मध्य पूर्व में तेल परिवहन तथा आपूर्ति सामान्य होती है तो कीमतों पर नीचे की ओर दबाव आ सकता है। हालांकि, पेट्रोल की अंतिम कीमत पर कच्चे तेल के अलावा रिफाइनिंग लागत, कर, परिवहन और स्थानीय बाजार की परिस्थितियों का भी असर होता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नजर
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में बना हुआ है।
ईरान के पास इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को प्रभावित करने की क्षमता है और यहां किसी भी बड़े व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने समुद्री गतिविधियों और संभावित नए आर्थिक दबाव को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है।
इसलिए तेल बाजार फिलहाल युद्ध की दिशा, समुद्री परिवहन और ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रख रहा है।
क्या 2 डॉलर से नीचे जाएगी कीमत?
ट्रंप का 2 डॉलर से कम पेट्रोल का अनुमान फिलहाल एक राजनीतिक और आर्थिक दावा है, निश्चित बाजार पूर्वानुमान नहीं।
अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 2 डॉलर से नीचे जाने के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी और टिकाऊ गिरावट के साथ-साथ आपूर्ति, रिफाइनिंग क्षमता, परिवहन लागत और करों में अनुकूल परिस्थितियां जरूरी होंगी।
यदि ईरान संघर्ष समाप्त होता है और तेल आपूर्ति सामान्य होती है तो कीमतों में गिरावट संभव है। लेकिन यह कितनी तेजी से होगी और पेट्रोल की राष्ट्रीय औसत कीमत 2 डॉलर से नीचे पहुंचेगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
फिलहाल ट्रंप का दावा ऐसे समय आया है जब अमेरिकी उपभोक्ता ऊंची ईंधन कीमतों का सामना कर रहे हैं और मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
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