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RTE दाखिलों पर हाईकोर्ट सख्त, छत्तीसगढ़ के हर स्कूल से खाली सीटों का मांगा रिकॉर्ड
बिलासपुर (छ.ग.)
चीफ जस्टिस महापात्र की बेंच ने सरकार से 3 हफ्ते में हलफनामा मांगा, बताना होगा कितनी सीटें भरीं और कितनी बचीं
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत बच्चों के प्रवेश की स्थिति को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि प्रदेश के सभी स्कूलों में RTE की आरक्षित सीटों, दाखिलों और खाली सीटों का पूरा रिकॉर्ड पेश किया जाए।
नए चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कार्यभार संभालने के बाद हुई सुनवाई में इस मामले पर निर्देश जारी किए। कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।
स्कूलवार देनी होगी जानकारी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि RTE अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) को लागू करने के लिए वर्तमान में कौन सी प्रक्रिया या SOP अपनाई जा रही है। कोर्ट ने सरकार से एक विस्तृत चार्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें प्रदेश के प्रत्येक स्कूल में RTE के तहत आरक्षित सीटों की संख्या, हुए प्रवेश और बची हुई सीटों की जानकारी शामिल हो। सरकार को यह भी बताना होगा कि कितने बच्चों को RTE के तहत प्रवेश मिला और कितनी सीटें अभी खाली हैं।
जनहित याचिकाओं पर चल रही सुनवाई
RTE व्यवस्था को लेकर सीवी भगवंत राव, विकास तिवारी समेत अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर की हैं। इन मामलों में स्कूलों में कानून के प्रभावी पालन और बच्चों को प्रवेश दिलाने से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। इन याचिकाओं पर लगातार सुनवाई हो रही है। मंगलवार को नए चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने भी इन मामलों पर सुनवाई की।
सरकार ने मांगा समय
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से अगली सुनवाई तक समय देने का अनुरोध किया। सरकार की ओर से कहा गया कि कोर्ट के निर्देशों के अनुसार जरूरी जानकारी तैयार कर पेश की जाएगी। इसके बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से सात दिन पहले हलफनामा और संबंधित दस्तावेज कोर्ट में जमा किए जाएं। साथ ही इसकी प्रति याचिकाकर्ताओं के वकीलों को भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
पहले दिन 13 मामलों पर सुनवाई
चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र ने डिवीजन बेंच में अपने पहले दिन 13 मामलों की सुनवाई की। इनमें जनहित याचिकाएं भी शामिल थीं। RTE से जुड़े मामले में कोर्ट ने स्कूलों में बच्चों के प्रवेश और कानून के पालन को लेकर जानकारी मांगी है। अब सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले हलफनामे में प्रदेश के स्कूलों में RTE सीटों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
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