- Hindi News
- देश विदेश
- भारत ने शेख हसीना के भाषण पर रोक से किया इनकार, बोला- यह निजी कार्यक्रम है
भारत ने शेख हसीना के भाषण पर रोक से किया इनकार, बोला- यह निजी कार्यक्रम है
Digital Desk
बांग्लादेश की रोक लगाने की मांग खारिज, दो साल बाद सार्वजनिक रूप से ऑनलाइन संबोधित करेंगी पूर्व प्रधानमंत्री; BRICS से पहले बढ़ी कूटनीतिक हलचल
भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक स्तर पर एक नया विवाद सामने आया है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रस्तावित ऑनलाइन संबोधन को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चा तेज हो गई है। बांग्लादेश सरकार ने भारत से आग्रह किया था कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी भी राजनीतिक गतिविधि या भाषण के लिए न होने दिया जाए, लेकिन भारत ने इस मांग से साफ इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जिस कार्यक्रम में शेख हसीना हिस्सा लेने जा रही हैं, वह पूरी तरह एक निजी संस्था द्वारा आयोजित किया जा रहा है और भारत सरकार का उससे कोई संबंध नहीं है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCCSA) एक स्वतंत्र मीडिया संस्था है और उसके कार्यक्रमों से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि मंच पर रखे जाने वाले विचार आयोजकों और वक्ताओं के निजी विचार हैं, उनका भारत सरकार समर्थन नहीं करती।
यह कार्यक्रम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश छोड़ने के बाद यह पहली बार होगा जब शेख हसीना किसी सार्वजनिक मंच पर दिखाई देंगी। वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम को संबोधित करेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संबोधन उनके राजनीतिक भविष्य और बांग्लादेश की मौजूदा राजनीति के लिए अहम संकेत दे सकता है।
फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया नई दिल्ली का एक प्रतिष्ठित पत्रकार संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1958 में हुई थी। यह संस्था समय-समय पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर चर्चा के लिए प्रमुख नेताओं और विशेषज्ञों को आमंत्रित करती रही है। जानकारी के मुताबिक, शेख हसीना का संबोधन शाम छह बजे से शुरू होगा और लगभग डेढ़ घंटे तक चलेगा।
उधर, बांग्लादेश सरकार ने इस कार्यक्रम पर आपत्ति जताते हुए भारत से अनुरोध किया था कि किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जो बांग्लादेश की राजनीति से जुड़ा हो या प्रतिबंधित संगठनों से संबंध रखता हो, भारतीय भूमि से राजनीतिक बयान देने की अनुमति न दी जाए। ढाका का कहना है कि इससे दोनों देशों के संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और बांग्लादेश के भीतर राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो सकती है। यह मुद्दा हाल ही में ढाका में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी उठा था। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भारत के उच्चायुक्त से इस विषय पर चर्चा की और अपनी चिंता व्यक्त की। हालांकि भारत ने स्पष्ट कर दिया कि निजी संस्थाओं के कार्यक्रमों में सरकार का हस्तक्षेप उचित नहीं है।
शेख हसीना ने अपने संबोधन के लिए 5 अगस्त की तारीख का चयन भी विशेष रणनीति के तहत किया है। इसी दिन वर्ष 2024 में छात्र आंदोलन के बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़कर बांग्लादेश से भारत आना पड़ा था। प्रदर्शनकारियों के सरकारी आवास तक पहुंचने के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और सेना के विमान से नई दिल्ली पहुंची थीं। अब ठीक दो वर्ष बाद उसी तारीख को सार्वजनिक रूप से सामने आना राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में शेख हसीना के साथ उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय और अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी ऑनलाइन जुड़ेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान वह अपने राजनीतिक भविष्य, बांग्लादेश लौटने की संभावनाओं और मौजूदा हालात पर विस्तार से अपनी बात रखेंगी। हाल ही में शेख हसीना ने संकेत दिया था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटकर अदालत के समक्ष पेश होने की योजना बना रही हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि स्वदेश लौटने पर उनकी गिरफ्तारी हो सकती है और उनकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर खतरे मौजूद हैं। इसके बावजूद उन्होंने कहा था कि वह कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर भी नजर बनी हुई है। अगले महीने नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS सम्मेलन में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान के शामिल होने की संभावना है। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। ऐसे समय में शेख हसीना का सार्वजनिक संबोधन दोनों देशों के कूटनीतिक समीकरणों को और संवेदनशील बना सकता है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि भारत ने प्रधानमंत्री तारीक रहमान को BRICS सम्मेलन के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा है। बांग्लादेश वर्तमान में BIMSTEC का अध्यक्ष भी है, इसलिए उसे सम्मेलन के विशेष आउटरीच सत्र में आमंत्रित किया गया है। माना जा रहा है कि सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
शेख हसीना अगस्त 2024 से भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश सरकार कई बार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी है, लेकिन भारत ने अब तक इस पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है। भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से यह भी स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें राजनीतिक शरण दी गई है। उनकी भारत में मौजूदगी को मानवीय आधार पर स्वीकार किया गया है। भारत में शरणार्थियों के लिए कोई अलग कानून नहीं है। देश ने संयुक्त राष्ट्र के 1951 शरणार्थी कन्वेंशन और 1967 प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर भी नहीं किए हैं। इसलिए भारत प्रत्येक मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और मानवीय आधार को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग निर्णय लेता है।
Recommended for You
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
भारत ने शेख हसीना के भाषण पर रोक से किया इनकार, बोला- यह निजी कार्यक्रम है
Digital Desk
भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक स्तर पर एक नया विवाद सामने आया है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रस्तावित ऑनलाइन संबोधन को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चा तेज हो गई है। बांग्लादेश सरकार ने भारत से आग्रह किया था कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी भी राजनीतिक गतिविधि या भाषण के लिए न होने दिया जाए, लेकिन भारत ने इस मांग से साफ इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जिस कार्यक्रम में शेख हसीना हिस्सा लेने जा रही हैं, वह पूरी तरह एक निजी संस्था द्वारा आयोजित किया जा रहा है और भारत सरकार का उससे कोई संबंध नहीं है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCCSA) एक स्वतंत्र मीडिया संस्था है और उसके कार्यक्रमों से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि मंच पर रखे जाने वाले विचार आयोजकों और वक्ताओं के निजी विचार हैं, उनका भारत सरकार समर्थन नहीं करती।
यह कार्यक्रम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश छोड़ने के बाद यह पहली बार होगा जब शेख हसीना किसी सार्वजनिक मंच पर दिखाई देंगी। वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम को संबोधित करेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संबोधन उनके राजनीतिक भविष्य और बांग्लादेश की मौजूदा राजनीति के लिए अहम संकेत दे सकता है।
फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया नई दिल्ली का एक प्रतिष्ठित पत्रकार संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1958 में हुई थी। यह संस्था समय-समय पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर चर्चा के लिए प्रमुख नेताओं और विशेषज्ञों को आमंत्रित करती रही है। जानकारी के मुताबिक, शेख हसीना का संबोधन शाम छह बजे से शुरू होगा और लगभग डेढ़ घंटे तक चलेगा।
उधर, बांग्लादेश सरकार ने इस कार्यक्रम पर आपत्ति जताते हुए भारत से अनुरोध किया था कि किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जो बांग्लादेश की राजनीति से जुड़ा हो या प्रतिबंधित संगठनों से संबंध रखता हो, भारतीय भूमि से राजनीतिक बयान देने की अनुमति न दी जाए। ढाका का कहना है कि इससे दोनों देशों के संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और बांग्लादेश के भीतर राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो सकती है। यह मुद्दा हाल ही में ढाका में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी उठा था। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भारत के उच्चायुक्त से इस विषय पर चर्चा की और अपनी चिंता व्यक्त की। हालांकि भारत ने स्पष्ट कर दिया कि निजी संस्थाओं के कार्यक्रमों में सरकार का हस्तक्षेप उचित नहीं है।
शेख हसीना ने अपने संबोधन के लिए 5 अगस्त की तारीख का चयन भी विशेष रणनीति के तहत किया है। इसी दिन वर्ष 2024 में छात्र आंदोलन के बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़कर बांग्लादेश से भारत आना पड़ा था। प्रदर्शनकारियों के सरकारी आवास तक पहुंचने के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और सेना के विमान से नई दिल्ली पहुंची थीं। अब ठीक दो वर्ष बाद उसी तारीख को सार्वजनिक रूप से सामने आना राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में शेख हसीना के साथ उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय और अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी ऑनलाइन जुड़ेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान वह अपने राजनीतिक भविष्य, बांग्लादेश लौटने की संभावनाओं और मौजूदा हालात पर विस्तार से अपनी बात रखेंगी। हाल ही में शेख हसीना ने संकेत दिया था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटकर अदालत के समक्ष पेश होने की योजना बना रही हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि स्वदेश लौटने पर उनकी गिरफ्तारी हो सकती है और उनकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर खतरे मौजूद हैं। इसके बावजूद उन्होंने कहा था कि वह कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर भी नजर बनी हुई है। अगले महीने नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS सम्मेलन में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान के शामिल होने की संभावना है। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। ऐसे समय में शेख हसीना का सार्वजनिक संबोधन दोनों देशों के कूटनीतिक समीकरणों को और संवेदनशील बना सकता है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि भारत ने प्रधानमंत्री तारीक रहमान को BRICS सम्मेलन के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा है। बांग्लादेश वर्तमान में BIMSTEC का अध्यक्ष भी है, इसलिए उसे सम्मेलन के विशेष आउटरीच सत्र में आमंत्रित किया गया है। माना जा रहा है कि सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
शेख हसीना अगस्त 2024 से भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश सरकार कई बार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी है, लेकिन भारत ने अब तक इस पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है। भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से यह भी स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें राजनीतिक शरण दी गई है। उनकी भारत में मौजूदगी को मानवीय आधार पर स्वीकार किया गया है। भारत में शरणार्थियों के लिए कोई अलग कानून नहीं है। देश ने संयुक्त राष्ट्र के 1951 शरणार्थी कन्वेंशन और 1967 प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर भी नहीं किए हैं। इसलिए भारत प्रत्येक मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और मानवीय आधार को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग निर्णय लेता है।
