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मणिपुर के तीन सीमावर्ती गांवों पर हमले की जांच जारी
Digital Desk
मणिपुर के कामजोंग में तीन सीमावर्ती गांवों पर 7 मई के हमले की पुलिस जांच जारी है। घटना में 23 मकान जले और नुकसान 5 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया।
मणिपुर पुलिस कामजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित तीन गांवों पर 7 मई को हुए सशस्त्र हमले की जांच कर रही है। राज्य के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने सोमवार को मणिपुर विधानसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि घटना में एक व्यक्ति घायल हुआ और 23 मकान जला दिए गए। राज्य सरकार ने तीनों गांवों में हुए नुकसान का आकलन किया है, जिसकी कुल कीमत 5 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
गृह मंत्री के अनुसार, प्रभावित मकानों का पुनर्निर्माण शुरू हो चुका है और हमले के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। उन्होंने यह जानकारी कांग्रेस विधायक के. रंजीत सिंह के सवाल के जवाब में विधानसभा में दी।
तीन गांवों पर हुआ हमला
7 मई 2026 को कामजोंग जिले के जेड चोरो, नामली और वांगली गांवों को सशस्त्र हमलावरों ने निशाना बनाया था। ये गांव म्यांमार की सीमा के बेहद करीब स्थित हैं।
गृह मंत्री ने विधानसभा में बताया कि हमले के दौरान एक व्यक्ति घायल हुआ और 23 घरों को आग लगा दी गई। घटना के बाद राज्य सरकार ने प्रभावित गांवों में हुए संपत्ति नुकसान का आकलन कराया। कुल नुकसान 5 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है।
सीमावर्ती और दूरदराज क्षेत्र में स्थित होने के कारण इन गांवों की सुरक्षा को लेकर घटना के बाद गंभीर चिंताएं सामने आई थीं।
पुलिस कर रही मामले की जांच
गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच अभी जारी है। इसलिए हमले के लिए किसी विशेष संगठन को जिम्मेदार ठहराना अभी जल्दबाजी होगी।
विधानसभा में जब उनसे म्यांमार स्थित कुकी नेशनल फ्रंट (बी) यानी केएनएफ(बी) की कथित भूमिका के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। इसलिए इस स्तर पर यह कहना उचित नहीं होगा कि संगठन हमले में शामिल था या नहीं।
इस बयान से यह स्पष्ट है कि सरकार फिलहाल जांच पूरी होने का इंतजार कर रही है और किसी संगठन की भूमिका पर आधिकारिक निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
पांच करोड़ से ज्यादा नुकसान
राज्य सरकार ने तीनों प्रभावित गांवों में हुए नुकसान का आकलन किया है। गृह मंत्री के अनुसार, संपत्ति का कुल नुकसान 5 करोड़ रुपये से अधिक है।
हमले में क्षतिग्रस्त मकानों का पुनर्निर्माण शुरू हो चुका है। सरकार की ओर से प्रभावित लोगों को राहत सामग्री भी पहुंचाई गई थी।
गोविंदास कोंथौजम ने बताया कि उन्होंने कुछ विधायकों के साथ हमले के तुरंत बाद सीमावर्ती गांवों का दौरा किया था और प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई थी।
सीमा क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ी
कामजोंग के ये गांव म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा के बहुत करीब स्थित हैं। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और सीमा की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था एक प्रमुख चिंता बनी हुई है।
गृह मंत्री ने विधानसभा को बताया कि हमले के बाद इलाके में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सरकार का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की आशंका को कम करना है।
मणिपुर के पांच जिले म्यांमार के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं, जिससे सीमा सुरक्षा राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
पुनर्निर्माण का काम शुरू
हमले में क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण का काम शुरू हो चुका है। सरकार के अनुसार, प्रभावित परिवारों को दोबारा सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
हालांकि, पुनर्निर्माण के साथ-साथ प्रभावित ग्रामीणों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। सरकार ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत किए जाने की जानकारी दी है।
इस घटना ने सीमावर्ती गांवों में बुनियादी ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। दूरदराज के गांवों तक राहत और सुरक्षा बलों की पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
विस्थापितों के पुनर्वास पर भी चर्चा
विधानसभा में चर्चा के दौरान आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों यानी आईडीपी के पुनर्वास का मुद्दा भी उठा।
गृह मंत्री ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर होने के बाद विस्थापित लोगों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि विस्थापित लोगों की चल संपत्तियों के नुकसान के लिए अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया है।
सरकार ने कहा है कि पुनर्वास और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चल संपत्तियों के नुकसान के लिए मुआवजे के मुद्दे पर विचार किया जाएगा।
आगे क्या होगा?
फिलहाल कामजोंग के तीन सीमावर्ती गांवों पर 7 मई को हुए हमले की पुलिस जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही हमले के पीछे जिम्मेदार लोगों या किसी संगठन की भूमिका को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
सरकार ने फिलहाल किसी विशेष संगठन को आधिकारिक तौर पर हमले के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है। केएनएफ(बी) की कथित भूमिका पर भी गृह मंत्री ने जांच पूरी होने से पहले टिप्पणी करने से इनकार किया है।
आने वाले समय में जांच की प्रगति, पुनर्निर्माण कार्य और सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था इस मामले के प्रमुख पहलू होंगे। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे से जुड़े फैसले पर भी नजर रहेगी।
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