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EU ने ब्राजील के मांस पर लगाई रोक, 1.84 अरब डॉलर का कारोबार प्रभावित
Digital Desk
EU ने ब्राजील के बीफ, चिकन और अन्य पशु उत्पादों के आयात पर रोक लगाई है। एंटीमाइक्रोबियल नियमों के कारण 1.84 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित हुआ।
यूरोपीय संघ की नई पाबंदी से ब्राजील के करीब 1.84 अरब डॉलर के सालाना पशु-उत्पाद निर्यात पर असर पड़ा है। बीफ और चिकन सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
यूरोपीय संघ (EU) ने ब्राजील से आने वाले कई पशु-उत्पादों के आयात पर रोक लागू कर दी है। यह फैसला 3 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ। इससे ब्राजील के करीब 1.84 अरब डॉलर (लगभग 16,900 करोड़ रुपये) के सालाना निर्यात पर असर पड़ने का अनुमान है। प्रभावित उत्पादों में मुख्य रूप से बीफ और चिकन शामिल हैं, जबकि अंडे, शहद और कुछ अन्य पशु-उत्पाद भी नई व्यवस्था के दायरे में आते हैं।
EU का कहना है कि ब्राजील फिलहाल यह पर्याप्त गारंटी उपलब्ध नहीं करा पाया है कि उसके पशु-उत्पादन में ऐसे एंटीमाइक्रोबियल पदार्थों का इस्तेमाल नहीं हो रहा, जिन्हें यूरोपीय नियमों के तहत प्रतिबंधित किया गया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब यूरोप एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और खाद्य सुरक्षा को लेकर अपने नियमों को और सख्त कर रहा है।
बीफ और चिकन पर सबसे बड़ा असर
ब्राजील के कृषि मंत्रालय के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, EU की नई पाबंदी से प्रभावित निर्यात में करीब 1.05 अरब डॉलर का बीफ और 76.3 करोड़ डॉलर का चिकन मांस शामिल है। दोनों मिलकर प्रभावित कारोबार का सबसे बड़ा हिस्सा बनाते हैं।
EU ब्राजील के मांस उद्योग के लिए महत्वपूर्ण बाजार है। खासकर बीफ के कुछ उच्च-मूल्य वाले कट यूरोपीय बाजार में बेहतर कीमत हासिल करते हैं।
पोल्ट्री क्षेत्र भी प्रभावित हुआ है। ब्राजील दुनिया के सबसे बड़े बीफ और चिकन निर्यातकों में शामिल है, इसलिए यूरोपीय बाजार में पहुंच पर लगी रोक का असर उत्पादन और निर्यात रणनीति पर पड़ सकता है।
EU ने एंटीमाइक्रोबियल पर उठाए सवाल
विवाद का केंद्र एंटीमाइक्रोबियल दवाओं का इस्तेमाल है। EU के नियमों के तहत खाद्य उत्पादन करने वाले पशुओं में विकास बढ़ाने के लिए एंटीमाइक्रोबियल के इस्तेमाल पर रोक है। इसके अलावा कुछ ऐसे एंटीमाइक्रोबियल भी प्रतिबंधित हैं, जिन्हें यूरोप में मनुष्यों में कुछ संक्रमणों के इलाज के लिए सुरक्षित रखा गया है।
EU ने स्पष्ट किया है कि मुद्दा केवल आयातित मांस में प्रतिबंधित पदार्थ पाए जाने का नहीं है। मुख्य चिंता यह है कि निर्यातक देश की सरकारी निगरानी, परीक्षण, प्रमाणन और ट्रेसबिलिटी व्यवस्था यूरोपीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त गारंटी देती है या नहीं।
यूरोपीय आयोग के अनुसार, नए नियमों के तहत तीसरे देशों से आने वाले पशु उत्पादों के लिए आधिकारिक प्रमाण और पूरे उत्पादन चक्र में अनुपालन की गारंटी जरूरी है।
ब्राजील समाधान की कोशिश में
ब्राजील सरकार और मांस उद्योग ने यूरोपीय अधिकारियों के साथ बातचीत तेज कर दी है। उनका लक्ष्य यह साबित करना है कि देश की उत्पादन और नियंत्रण व्यवस्था EU की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है।
यूरोपीय आयोग ने बताया है कि ब्राजील की पोल्ट्री और शहद उत्पादन व्यवस्था को लेकर एक ऑडिट चल रहा है। आयोग के मुताबिक ऑडिट सप्ताह के अंत तक पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन अंतिम निष्कर्ष तैयार करने में उसके बाद भी समय लगेगा।
EU ने यह भी संकेत दिया है कि ब्राजील के अनुपालन से जुड़े पर्याप्त प्रमाण मिलने पर भविष्य में देश को अधिकृत देशों की सूची में वापस शामिल किया जा सकता है। यानी मौजूदा व्यवस्था को स्थायी प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जा रहा है।
पोल्ट्री उद्योग ने जताई असहमति
ब्राजील के पोल्ट्री उद्योग ने EU की चिंताओं पर असहमति जताई है। उद्योग का कहना है कि उसके निर्यातक यूरोपीय बाजार के लिए लागू स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करते हैं।
पोल्ट्री क्षेत्र के लिए विवाद का जल्द समाधान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चिकन का उत्पादन चक्र बीफ की तुलना में काफी छोटा होता है। इससे उत्पादन व्यवस्था और अनुपालन में बदलाव अपेक्षाकृत तेजी से लागू किए जा सकते हैं।
उद्योग संगठन सरकार के साथ मिलकर यूरोपीय अधिकारियों को अतिरिक्त दस्तावेज और नियंत्रण संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं।
बीफ उद्योग ने बढ़ाए सुरक्षा उपाय
ब्राजील के बीफ उद्योग ने भी यूरोपीय चिंताओं को दूर करने के लिए अतिरिक्त नियंत्रण उपाय अपनाए हैं।
बीफ निर्यात उद्योग से जुड़े संगठनों के अनुसार, EU को निर्यात करने वाली कंपनियों ने एंटीमाइक्रोबियल इस्तेमाल की निगरानी के लिए निजी प्रोटोकॉल लागू किया है। इन उपायों को सरकारी निर्यात गारंटी व्यवस्था के साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।
हालांकि बीफ उत्पादन का चक्र पोल्ट्री की तुलना में काफी लंबा होता है। इसलिए उत्पादन से लेकर प्रमाणन और ट्रेसबिलिटी तक बदलाव लागू करने में ज्यादा समय लग सकता है।
बड़ी कंपनियों पर दबाव
EU की पाबंदी से ब्राजील की बड़ी मांस कंपनियों पर भी दबाव बढ़ सकता है। देश के प्रमुख निर्यातकों की यूरोपीय बाजार में मौजूदगी है, हालांकि किसी कंपनी पर असर उसकी उत्पाद श्रेणी, निर्यात बाजार और वैकल्पिक खरीदारों तक पहुंच पर निर्भर करेगा।
EU बाजार का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि कुछ प्रीमियम मांस उत्पाद यहां बेहतर कीमत हासिल करते हैं। लंबे समय तक निर्यात बाधित रहने पर कंपनियों को माल दूसरे बाजारों की ओर मोड़ना पड़ सकता है।
इससे आपूर्ति श्रृंखला, कीमत और निर्यात आय पर दबाव पड़ने की आशंका है।
व्यापार संबंधों की बड़ी परीक्षा
ब्राजील के लिए चुनौती केवल EU के बदले दूसरे खरीदार तलाशना नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि वह यूरोपीय नियामकों को अपने नियंत्रण, परीक्षण और ट्रेसबिलिटी सिस्टम पर भरोसा दिला पाता है या नहीं।
ब्राजील सरकार ने EU के फैसले पर असंतोष जताया है और प्रतिबंध हटाने के लिए कूटनीतिक तथा कानूनी विकल्पों पर विचार किया है। कुछ ब्राजीलियाई कृषि संगठनों ने जवाबी कार्रवाई की मांग भी की है।
EU के लिए यह मामला खाद्य सुरक्षा और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के खिलाफ उसकी नीति की परीक्षा भी है। यूरोपीय नियमों के तहत 3 सितंबर 2026 से तीसरे देशों से आने वाले पशु और पशु-उत्पादों पर नए एंटीमाइक्रोबियल अनुपालन नियम लागू हुए हैं।
इसलिए आने वाले दिनों में ब्राजील की पोल्ट्री और शहद उत्पादन व्यवस्था के ऑडिट के नतीजे महत्वपूर्ण होंगे। यदि पर्याप्त गारंटी मिलती है तो कुछ उत्पादों के लिए आयात बहाल होने का रास्ता खुल सकता है। वहीं बीफ जैसे क्षेत्र में समाधान के लिए अधिक विस्तृत अनुपालन प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।
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