ईरान फिर जंग की तैयारी में जुटा, होर्मुज स्ट्रेट को बताया बड़ा हथियार

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रिपोर्ट में दावा- अमेरिका पर भरोसा नहीं, सैन्य तैयारी और रणनीतिक दबाव बढ़ाने में लगा तेहरान

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव गहराता दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान संभावित नए युद्ध की तैयारी में जुट गया है और उसने साफ संकेत दिए हैं कि उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार तेहरान होर्मुज स्ट्रेट को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मान रहा है और जरूरत पड़ने पर इसे अमेरिका तथा उसके सहयोगियों के खिलाफ दबाव के बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है।

ईरानी नेतृत्व इस समय तीन स्तरों पर रणनीति तैयार कर रहा है— सैन्य तैयारी, घरेलू समर्थन मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समीकरणों को साधना। हालांकि ईरान ने बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए हैं, लेकिन सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की गतिविधियों ने क्षेत्रीय हालात को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में तेहरान अपनी सुरक्षा रणनीति को मजबूत करने के साथ समुद्री मार्गों पर नियंत्रण की क्षमता भी बढ़ा रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला कच्चा तेल एशिया, यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों तक इसी मार्ग के जरिए पहुंचता है। यही वजह है कि ईरान इसे अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मानता है। यदि होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह का सैन्य तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यही कारण है कि अमेरिका और पश्चिमी देश इस समुद्री मार्ग को लेकर लगातार सतर्क रहते हैं।

ईरान की सैन्य तैयारी तेज

ईरानी सेना और IRGC ने हाल के दिनों में समुद्री और मिसाइल क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर बढ़ाया है। ईरानी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिका की ओर से कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो जवाब पहले से ज्यादा आक्रामक होगा।

कुछ दिन पहले IRGC ने बयान जारी कर कहा था कि किसी भी नए अमेरिकी हमले का जवाब ऐसा होगा जिसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अपने मिसाइल नेटवर्क, ड्रोन क्षमताओं और नौसैनिक रणनीति को भी मजबूत कर रहा है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि संभावित संघर्ष की स्थिति में अमेरिकी सैन्य ठिकाने, ऊर्जा ढांचा और उससे जुड़े हित निशाने पर आ सकते हैं। हालांकि तेहरान लगातार यह भी कह रहा है कि वह सीधे युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी दबाव का जवाब देने के लिए तैयार है।

ड्रोन और हवाई गतिविधियों पर तनाव

पिछले 24 घंटों में कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं जिन्होंने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान ने दावा किया कि उसकी सुरक्षा बलों ने अमेरिकी MQ-9B और RQ-4 ड्रोन को निशाना बनाया। इसके अलावा ईरानी हवाई क्षेत्र में कथित रूप से घुसे F-35 लड़ाकू विमान पर भी फायरिंग किए जाने का दावा किया गया। हालांकि अमेरिका की ओर से इन दावों की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में दोनों देशों की सैन्य गतिविधियां पहले के मुकाबले काफी बढ़ी हैं।

अमेरिका ने भी हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट और खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य निगरानी मजबूत की है। अमेरिकी सेंटकॉम के मुताबिक कुछ संदिग्ध नौसैनिक गतिविधियों पर कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिका ने बंदर अब्बास के पास कुछ मिसाइल ठिकानों और समुद्री गतिविधियों को निशाना बनाया।

इंटरनेट बहाली और आंतरिक हालात

इसी बीच ईरान में 88 दिनों बाद इंटरनेट सेवाओं की आंशिक बहाली भी चर्चा में है। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स ने इसे आधुनिक इतिहास के सबसे लंबे राष्ट्रीय इंटरनेट ब्लैकआउट में से एक बताया है। लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से कारोबार, बैंकिंग, ऑनलाइन सेवाएं और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई। सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाए थे।

ईरान एक तरफ बाहरी दबाव से निपटने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर घरेलू स्तर पर स्थिरता बनाए रखने की भी कोशिश कर रहा है। सरकार आंतरिक विरोध और आर्थिक दबाव को नियंत्रित रखने के लिए लगातार रणनीतिक कदम उठा रही है।

इजराइल भी अलर्ट मोड में

मिडिल ईस्ट के हालात को देखते हुए इजराइल ने भी सुरक्षा गतिविधियां तेज कर दी हैं। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रक्षा अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में उत्तरी सीमा और लेबनान की स्थिति पर चर्चा हुई। हिजबुल्लाह के ठिकानों पर इजराइली हमले भी बढ़ाए गए हैं। इजराइल को आशंका है कि क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में ईरान समर्थित संगठन सक्रिय हो सकते हैं।

वैश्विक बाजार पर असर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। ऊर्जा बाजार से जुड़े होर्मुज स्ट्रेट में अस्थिरता बढ़ने पर तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। भारत समेत कई देश खाड़ी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं। ऐसे में यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर ईंधन कीमतों, व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

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www.dainikjagranmpcg.com
27 May 2026 By Vaishnavi.J

ईरान फिर जंग की तैयारी में जुटा, होर्मुज स्ट्रेट को बताया बड़ा हथियार

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मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव गहराता दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान संभावित नए युद्ध की तैयारी में जुट गया है और उसने साफ संकेत दिए हैं कि उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार तेहरान होर्मुज स्ट्रेट को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मान रहा है और जरूरत पड़ने पर इसे अमेरिका तथा उसके सहयोगियों के खिलाफ दबाव के बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है।

ईरानी नेतृत्व इस समय तीन स्तरों पर रणनीति तैयार कर रहा है— सैन्य तैयारी, घरेलू समर्थन मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समीकरणों को साधना। हालांकि ईरान ने बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए हैं, लेकिन सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की गतिविधियों ने क्षेत्रीय हालात को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में तेहरान अपनी सुरक्षा रणनीति को मजबूत करने के साथ समुद्री मार्गों पर नियंत्रण की क्षमता भी बढ़ा रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला कच्चा तेल एशिया, यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों तक इसी मार्ग के जरिए पहुंचता है। यही वजह है कि ईरान इसे अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मानता है। यदि होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह का सैन्य तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यही कारण है कि अमेरिका और पश्चिमी देश इस समुद्री मार्ग को लेकर लगातार सतर्क रहते हैं।

ईरान की सैन्य तैयारी तेज

ईरानी सेना और IRGC ने हाल के दिनों में समुद्री और मिसाइल क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर बढ़ाया है। ईरानी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिका की ओर से कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो जवाब पहले से ज्यादा आक्रामक होगा।

कुछ दिन पहले IRGC ने बयान जारी कर कहा था कि किसी भी नए अमेरिकी हमले का जवाब ऐसा होगा जिसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अपने मिसाइल नेटवर्क, ड्रोन क्षमताओं और नौसैनिक रणनीति को भी मजबूत कर रहा है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि संभावित संघर्ष की स्थिति में अमेरिकी सैन्य ठिकाने, ऊर्जा ढांचा और उससे जुड़े हित निशाने पर आ सकते हैं। हालांकि तेहरान लगातार यह भी कह रहा है कि वह सीधे युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी दबाव का जवाब देने के लिए तैयार है।

ड्रोन और हवाई गतिविधियों पर तनाव

पिछले 24 घंटों में कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं जिन्होंने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान ने दावा किया कि उसकी सुरक्षा बलों ने अमेरिकी MQ-9B और RQ-4 ड्रोन को निशाना बनाया। इसके अलावा ईरानी हवाई क्षेत्र में कथित रूप से घुसे F-35 लड़ाकू विमान पर भी फायरिंग किए जाने का दावा किया गया। हालांकि अमेरिका की ओर से इन दावों की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में दोनों देशों की सैन्य गतिविधियां पहले के मुकाबले काफी बढ़ी हैं।

अमेरिका ने भी हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट और खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य निगरानी मजबूत की है। अमेरिकी सेंटकॉम के मुताबिक कुछ संदिग्ध नौसैनिक गतिविधियों पर कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिका ने बंदर अब्बास के पास कुछ मिसाइल ठिकानों और समुद्री गतिविधियों को निशाना बनाया।

इंटरनेट बहाली और आंतरिक हालात

इसी बीच ईरान में 88 दिनों बाद इंटरनेट सेवाओं की आंशिक बहाली भी चर्चा में है। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स ने इसे आधुनिक इतिहास के सबसे लंबे राष्ट्रीय इंटरनेट ब्लैकआउट में से एक बताया है। लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से कारोबार, बैंकिंग, ऑनलाइन सेवाएं और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई। सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाए थे।

ईरान एक तरफ बाहरी दबाव से निपटने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर घरेलू स्तर पर स्थिरता बनाए रखने की भी कोशिश कर रहा है। सरकार आंतरिक विरोध और आर्थिक दबाव को नियंत्रित रखने के लिए लगातार रणनीतिक कदम उठा रही है।

इजराइल भी अलर्ट मोड में

मिडिल ईस्ट के हालात को देखते हुए इजराइल ने भी सुरक्षा गतिविधियां तेज कर दी हैं। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रक्षा अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में उत्तरी सीमा और लेबनान की स्थिति पर चर्चा हुई। हिजबुल्लाह के ठिकानों पर इजराइली हमले भी बढ़ाए गए हैं। इजराइल को आशंका है कि क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में ईरान समर्थित संगठन सक्रिय हो सकते हैं।

वैश्विक बाजार पर असर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। ऊर्जा बाजार से जुड़े होर्मुज स्ट्रेट में अस्थिरता बढ़ने पर तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। भारत समेत कई देश खाड़ी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं। ऐसे में यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर ईंधन कीमतों, व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-again-preparing-for-war-calls-strait-of-hormuz-a/article-54284

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