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IRCTC घोटाला मामला: फिर टला फैसला, लालू परिवार पर अब 9 जून को आएगा कोर्ट का आदेश
नेशनल डेस्क
IRCTC घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला टाल दिया है। लालू परिवार पर अब 9 जून को आदेश सुनाया जाएगा।
नई दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में बुधवार को IRCTC घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले का फैसला फिर नहीं आया। अदालत ने सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए अगली तारीख 9 जून तय की है। इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और बेटी मीसा भारती सहित कई अन्य लोग आरोपी हैं। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, इस केस के चारों ओर राजनीतिक और कानूनी हलचल बढ़ती जा रही है।
पिछली सुनवाई के बाद से ही उम्मीद थी कि आज कोर्ट कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है, लेकिन मामला फिर से टल गया। इससे पहले 6 मई को भी अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। अब 9 जून को जो आदेश आएगा, वो इस पूरे केस की दिशा तय कर सकता है, क्योंकि आगे की कानूनी कार्रवाई इसी पर निर्भर करेगी। अदालत पहले ही आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है और अब ट्रायल से पहले का ये अहम फैसला सबकी निगाहों में है।
यह पूरा मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। उन पर आरोप है कि उस समय IRCTC के तहत रांची और पुरी में बीएनआर होटलों के संचालन के लिए हुए टेंडर में गंभीर अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसियों का कहना है कि नियमों को दरकिनार कर एक निजी कंपनी, सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को ये टेंडर दिया गया और इसके बदले में लालू परिवार को पटना में बेशकीमती जमीन मिली।
सीबीआई और ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि यह जमीन डिलाइट मार्केटिंग लिमिटेड से लारा प्रोजेक्ट्स के नाम पर सिर्फ 65 लाख रुपये में ट्रांसफर की गई, जबकि इसकी बाजार कीमत लगभग 94 करोड़ रुपये और सर्कल रेट करीब 32 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये लेन-देन सीधे सत्ता के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।
कोर्ट ने पहले की सुनवाई में यह भी कहा था कि टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप के काफी सबूत सामने आए हैं और इससे कथित तौर पर लालू परिवार को आर्थिक लाभ हुआ। इसी आधार पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी। ईडी ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है और इसे मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर मामला बताया है।
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IRCTC घोटाला मामला: फिर टला फैसला, लालू परिवार पर अब 9 जून को आएगा कोर्ट का आदेश
नेशनल डेस्क
नई दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में बुधवार को IRCTC घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले का फैसला फिर नहीं आया। अदालत ने सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए अगली तारीख 9 जून तय की है। इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और बेटी मीसा भारती सहित कई अन्य लोग आरोपी हैं। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, इस केस के चारों ओर राजनीतिक और कानूनी हलचल बढ़ती जा रही है।
पिछली सुनवाई के बाद से ही उम्मीद थी कि आज कोर्ट कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है, लेकिन मामला फिर से टल गया। इससे पहले 6 मई को भी अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। अब 9 जून को जो आदेश आएगा, वो इस पूरे केस की दिशा तय कर सकता है, क्योंकि आगे की कानूनी कार्रवाई इसी पर निर्भर करेगी। अदालत पहले ही आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है और अब ट्रायल से पहले का ये अहम फैसला सबकी निगाहों में है।
यह पूरा मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। उन पर आरोप है कि उस समय IRCTC के तहत रांची और पुरी में बीएनआर होटलों के संचालन के लिए हुए टेंडर में गंभीर अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसियों का कहना है कि नियमों को दरकिनार कर एक निजी कंपनी, सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को ये टेंडर दिया गया और इसके बदले में लालू परिवार को पटना में बेशकीमती जमीन मिली।
सीबीआई और ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि यह जमीन डिलाइट मार्केटिंग लिमिटेड से लारा प्रोजेक्ट्स के नाम पर सिर्फ 65 लाख रुपये में ट्रांसफर की गई, जबकि इसकी बाजार कीमत लगभग 94 करोड़ रुपये और सर्कल रेट करीब 32 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये लेन-देन सीधे सत्ता के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।
कोर्ट ने पहले की सुनवाई में यह भी कहा था कि टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप के काफी सबूत सामने आए हैं और इससे कथित तौर पर लालू परिवार को आर्थिक लाभ हुआ। इसी आधार पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी। ईडी ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है और इसे मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर मामला बताया है।
