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इजरायल में धूमधाम से मनी जन्माष्टमी, सैकड़ों कृष्ण भक्तों ने लगाए जयकारे
Digital Desk
उत्तरी इजरायल के मोशाव अवीएल में सैकड़ों कृष्ण भक्तों ने जन्माष्टमी मनाई। अधिकांश श्रद्धालु यहूदी समुदाय से थे और भजन-कीर्तन व नाटक में शामिल हुए।
उत्तरी इजरायल के मोशाव अवीएल में सैकड़ों कृष्ण भक्त जन्माष्टमी समारोह में जुटे। अधिकांश श्रद्धालु यहूदी समुदाय से थे और उन्होंने भजन-कीर्तन के साथ भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया।
इजरायल में शुक्रवार को जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। उत्तरी इजरायल के मोशाव अवीएल में सैकड़ों कृष्ण भक्तों ने भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव में हिस्सा लिया। इस दौरान पूरे परिसर में ‘हरे राम हरे कृष्ण’ के जयकारे गूंजते रहे। खास बात यह रही कि समारोह में शामिल अधिकांश श्रद्धालु यहूदी समुदाय से थे।
भगवान कृष्ण को हिंदू धर्म में भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। जन्माष्टमी उनके जन्म की स्मृति में मनाई जाती है। इजरायल में कृष्ण भक्ति से जुड़े समुदाय के लिए यह पर्व प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है।
मोशाव अवीएल में जुटे भक्त
कृष्ण जन्माष्टमी के लिए उत्तरी इजरायल के कृषि आधारित सामूहिक समुदाय मोशाव अवीएल का सांस्कृतिक केंद्र शुक्रवार को भक्तों से भर गया। आयोजन स्थल को भगवान कृष्ण और भारतीय संस्कृति से जुड़े प्रतीकों और सजावटी तत्वों से सजाया गया था।
इजरायल के अलग-अलग हिस्सों से कृष्ण भक्त यहां पहुंचे। इनमें आसपास के कस्बों में रहने वाले वे लोग भी शामिल थे, जो लंबे समय से कृष्ण भक्ति और भारतीय संस्कृति से जुड़े आयोजनों में भाग लेते रहे हैं।
यहूदी समुदाय की खास भागीदारी
इस आयोजन की सबसे उल्लेखनीय बात स्थानीय यहूदी समुदाय की भागीदारी रही। यहां मौजूद कई श्रद्धालु यहूदी थे और वे लंबे समय से कृष्ण भक्ति की परंपराओं का पालन कर रहे हैं।
कृष्ण भक्तों का यह छोटा समुदाय भारत की यात्राओं के दौरान वृंदावन और मायापुर में सीखी गई धार्मिक परंपराओं और शिक्षाओं का पालन करता है। उनके लिए गौरा पूर्णिमा और जन्माष्टमी सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में शामिल हैं।
दो दशक से समारोह में शामिल
पास के एक कस्बे में रहने वाली तामार ने बताया कि वह दो दशक से अधिक समय से हर साल जन्माष्टमी समारोह में हिस्सा ले रही हैं।
उन्होंने कहा कि इस समूह से जुड़ने के बाद भारतीय संस्कृति में उनकी रुचि और गहरी हुई है। उनके अनुभव से पता चलता है कि कृष्ण भक्ति से जुड़े ये आयोजन इजरायल में भारतीय संस्कृति के प्रति रुचि पैदा करने में भी भूमिका निभा रहे हैं।
कृष्ण-राधा पर नाटक
समारोह के दौरान भक्तों ने ‘एलोहिम प्लस’ (गॉड प्लस) नामक नाटक भी प्रस्तुत किया। नाटक में भगवान कृष्ण और राधा के जीवन से जुड़े केंद्रीय संदेशों को मंच पर पेश किया गया।
प्रस्तुति में कृष्ण और राधा की एकता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। नाटक के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि दोनों का साथ ही ईश्वरत्व में ‘प्लस’ का भाव जोड़ता है।
भजन और संगीत से सजा माहौल
नाटक से पहले भक्तों ने कई घंटे तक भजन और कीर्तन किया। तबला और ढोलक की ताल के साथ हारमोनियम, झाल और बांसुरी की धुनों ने पूरे आयोजन को भक्तिमय बना दिया।
श्रद्धालुओं ने संगीत की धुनों पर नृत्य भी किया। ‘हरे राम हरे कृष्ण’ के सामूहिक जयकारों के बीच समारोह में भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिली।
108 व्यंजनों का प्रसाद
समारोह का समापन भगवान कृष्ण को समर्पित प्रसाद के वितरण के साथ हुआ। मेहमानों और श्रद्धालुओं को 108 शाकाहारी व्यंजनों से तैयार विशेष भोजन परोसा गया।
हिंदू धार्मिक परंपरा में 108 संख्या को पवित्र माना जाता है। इसी मान्यता के अनुरूप जन्माष्टमी समारोह में 108 शाकाहारी व्यंजनों का प्रसाद तैयार किया गया।
इजरायल में बढ़ती सांस्कृतिक रुचि
इजरायल में आयोजित यह जन्माष्टमी समारोह धार्मिक आयोजन के साथ भारतीय संस्कृति और कृष्ण भक्ति के प्रति स्थानीय रुचि की भी झलक देता है। वृंदावन और मायापुर की यात्राओं से प्रभावित श्रद्धालु यहां भारतीय धार्मिक परंपराओं को अपने तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं।
भजन, नृत्य, नाटक और प्रसाद के साथ मनाया गया यह आयोजन इजरायल में भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं की मौजूदगी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक उदाहरण बनकर सामने आया।
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