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खामेनेई का अंतिम संस्कार 21 जून के आसपास, मशहद में दफन की योजना
Digital Desk
ईरान के सुप्रीम लीडर रहे खामेनेई का अंतिम संस्कार भारी सुरक्षा और भीड़ के बीच मशहद में किए जाने की तैयारी, लगभग 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर देशभर में व्यापक और संवेदनशील तैयारियां चल रही हैं। ईरानी अधिकारियों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से मिली जानकारी के अनुसार उनका अंतिम संस्कार 21 जून के आसपास आयोजित किया जा सकता है। उन्हें शिया इस्लाम के पवित्र शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की योजना है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस ऐतिहासिक आयोजन में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में से एक बन सकता है। अधिकारियों के अनुसार अंतिम संस्कार की शुरुआत ईरान की राजधानी तेहरान से होगी, जहां मुख्य राजकीय समारोह आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम लगभग 24 घंटे तक चलने की संभावना है और इसमें देश के शीर्ष राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व के शामिल होने की उम्मीद है। इसके बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को धार्मिक शहर कुम ले जाया जाएगा और फिर अंतिम यात्रा के लिए मशहद पहुंचाया जाएगा, जहां उन्हें दफनाया जाएगा।
IRGC ने इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी संभाल ली है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष योजना बनाई गई है क्योंकि इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि देश में मौजूदा सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए यह आयोजन और भी संवेदनशील हो गया है। पहले यह अंतिम संस्कार मार्च में प्रस्तावित था, लेकिन परिस्थितियों के कारण इसे स्थगित करना पड़ा था। तेहरान, कुम और मशहद में जनता को अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए तीन दिनों का सार्वजनिक कार्यक्रम रखा जाएगा। प्रशासन भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष रूट, बैरिकेडिंग और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन न केवल धार्मिक बल्कि प्रशासनिक क्षमता की भी बड़ी परीक्षा होगा।
ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि यदि 2 करोड़ लोग अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं, तो यह 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के जनाजे से भी बड़ा होगा। उस समय करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे और भीड़ इतनी अधिक थी कि भगदड़ जैसी स्थिति में कई लोगों की जान चली गई थी और हजारों घायल हुए थे। इस बार प्रशासन ऐसे किसी हादसे से बचने के लिए पहले से ही कड़े इंतजाम कर रहा है। मशहद में खामेनेई को दफनाने का निर्णय धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मशहद शिया इस्लाम का प्रमुख पवित्र शहर है और यहां स्थित इमाम रजा का दरगाह दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक है। यह स्थान लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है और हर साल यहां भारी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। खामेनेई का यहां दफन होना उन्हें शिया धार्मिक परंपरा के ऐतिहासिक प्रतीकों से जोड़ देगा।
ईरान के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस आयोजन को लेकर गहरी चर्चा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतिम संस्कार देश की आंतरिक एकता और शक्ति प्रदर्शन दोनों का माध्यम बन सकता है। साथ ही यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान की स्थिति और उसकी राजनीतिक स्थिरता को दर्शाने का अवसर होगा। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के सैन्य ऑपरेशन के दौरान ईरान में कई रणनीतिक ठिकानों पर बड़े हमले हुए थे। इन हमलों में खामेनेई के आवास और कार्यालय को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई थी। बाद में उनकी मौत की पुष्टि हुई, जिसके बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा तनाव बढ़ गया। अब जबकि अंतिम संस्कार की तारीख नजदीक आ रही है, ईरानी प्रशासन और IRGC की प्राथमिकता है कि यह कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और नियंत्रित तरीके से संपन्न हो। भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स को लेकर लगातार समीक्षा की जा रही है।
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खामेनेई का अंतिम संस्कार 21 जून के आसपास, मशहद में दफन की योजना
Digital Desk
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर देशभर में व्यापक और संवेदनशील तैयारियां चल रही हैं। ईरानी अधिकारियों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से मिली जानकारी के अनुसार उनका अंतिम संस्कार 21 जून के आसपास आयोजित किया जा सकता है। उन्हें शिया इस्लाम के पवित्र शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की योजना है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस ऐतिहासिक आयोजन में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में से एक बन सकता है। अधिकारियों के अनुसार अंतिम संस्कार की शुरुआत ईरान की राजधानी तेहरान से होगी, जहां मुख्य राजकीय समारोह आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम लगभग 24 घंटे तक चलने की संभावना है और इसमें देश के शीर्ष राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व के शामिल होने की उम्मीद है। इसके बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को धार्मिक शहर कुम ले जाया जाएगा और फिर अंतिम यात्रा के लिए मशहद पहुंचाया जाएगा, जहां उन्हें दफनाया जाएगा।
IRGC ने इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी संभाल ली है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष योजना बनाई गई है क्योंकि इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि देश में मौजूदा सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए यह आयोजन और भी संवेदनशील हो गया है। पहले यह अंतिम संस्कार मार्च में प्रस्तावित था, लेकिन परिस्थितियों के कारण इसे स्थगित करना पड़ा था। तेहरान, कुम और मशहद में जनता को अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए तीन दिनों का सार्वजनिक कार्यक्रम रखा जाएगा। प्रशासन भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष रूट, बैरिकेडिंग और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन न केवल धार्मिक बल्कि प्रशासनिक क्षमता की भी बड़ी परीक्षा होगा।
ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि यदि 2 करोड़ लोग अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं, तो यह 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के जनाजे से भी बड़ा होगा। उस समय करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे और भीड़ इतनी अधिक थी कि भगदड़ जैसी स्थिति में कई लोगों की जान चली गई थी और हजारों घायल हुए थे। इस बार प्रशासन ऐसे किसी हादसे से बचने के लिए पहले से ही कड़े इंतजाम कर रहा है। मशहद में खामेनेई को दफनाने का निर्णय धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मशहद शिया इस्लाम का प्रमुख पवित्र शहर है और यहां स्थित इमाम रजा का दरगाह दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक है। यह स्थान लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है और हर साल यहां भारी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। खामेनेई का यहां दफन होना उन्हें शिया धार्मिक परंपरा के ऐतिहासिक प्रतीकों से जोड़ देगा।
ईरान के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस आयोजन को लेकर गहरी चर्चा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतिम संस्कार देश की आंतरिक एकता और शक्ति प्रदर्शन दोनों का माध्यम बन सकता है। साथ ही यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान की स्थिति और उसकी राजनीतिक स्थिरता को दर्शाने का अवसर होगा। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के सैन्य ऑपरेशन के दौरान ईरान में कई रणनीतिक ठिकानों पर बड़े हमले हुए थे। इन हमलों में खामेनेई के आवास और कार्यालय को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई थी। बाद में उनकी मौत की पुष्टि हुई, जिसके बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा तनाव बढ़ गया। अब जबकि अंतिम संस्कार की तारीख नजदीक आ रही है, ईरानी प्रशासन और IRGC की प्राथमिकता है कि यह कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और नियंत्रित तरीके से संपन्न हो। भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स को लेकर लगातार समीक्षा की जा रही है।
