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भारत आते ही मिशनरीज ऑफ चैरिटी पहुंचे मार्को रूबियो, फिर चर्चा में आया FCRA विवाद
नेशनल डेस्क
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत दौरे पर कोलकाता पहुंचे और मिशनरीज ऑफ चैरिटी गए। FCRA कानून फिर चर्चा में आया।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शनिवार को अपनी चार दिन की भारत यात्रा की शुरुआत कोलकाता से की। जैसे ही वह कोलकाता पहुंचे, उन्होंने अपनी पत्नी जेनेट रूबियो के साथ सीधे 'मदर हाउस' का दौरा किया। यह मदर टेरेसा की संस्था 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' का मुख्यालय भी है। रूबियो ने यहां कुछ अधिकारियों से मुलाकात की और पास के चिल्ड्रन्स होम का भी दौरा किया। इसे पिछले 14 साल में किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का पहला कोलकाता दौरा बताया जा रहा है, जबकि इससे पहले 2012 में हिलेरी क्लिंटन यहां आई थीं।
इस यात्रा के साथ ही 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' और उसके FCRA विवाद की चर्चा फिर से तेज हो गई है। यह वही संस्था है जिसके विदेशी चंदे को लेकर 2021 में बड़ा विवाद खड़ा हुआ था, जब भारत सरकार ने FCRA के तहत इसका लाइसेंस नवीनीकरण रोक दिया था। गृह मंत्रालय ने उस समय 'प्रतिकूल इनपुट्स' का जिक्र किया था। हालांकि बाद में जरूरी दस्तावेज जमा होने के बाद लाइसेंस बहाल कर दिया गया था।
उस समय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा था और दावा किया था कि क्रिसमस के दिन संस्था से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया था, जिससे वहां रहने वाले हजारों मरीज और कर्मचारियों पर असर पड़ा। हालाँकि, बाद में गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि खातों को फ्रीज करने का अनुरोध खुद संस्था की ओर से SBI को भेजा गया था। उस समय मामला काफी राजनीतिक हो गया था और विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे।
अब इस मुद्दे की फिर से चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि केंद्र सरकार संसद के अगले मॉनसून सत्र में FCRA कानून में संशोधन के लिए नया बिल लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित बदलावों के मुताबिक, अगर किसी विदेशी फंड पाने वाली संस्था का लाइसेंस रद्द होता है या नवीनीकरण नहीं होता, तो उसकी संपत्तियों को एक नामित प्राधिकरण अपने नियंत्रण में ले सकेगा। इसमें अस्पताल, स्कूल और बैंक खाते जैसी संपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं।
रूबियो के भारत दौरे से पहले, अमेरिकी सांसद क्रिस स्मिथ ने भी इस मामले को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने एक लेख में विदेश मंत्री से अनुरोध किया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ होने वाली बैठकों में इस मुद्दे को उठाएं। स्मिथ का कहना है कि नए कानून से ईसाई चैरिटी संस्थाओं, स्कूलों और अस्पतालों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटी तकनीकी गलतियों के कारण संस्थाओं की संपत्तियां जब्त होने का खतरा हो सकता है।
मार्को रूबियो की यह यात्रा राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोलकाता के बाद, वह आगरा, जयपुर और नई दिल्ली जाएंगे। 26 मई को नई दिल्ली में QUAD देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में भारत-अमेरिका संबंधों, रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी के अलावा कुछ संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या FCRA और मिशनरीज ऑफ चैरिटी का मुद्दा आधिकारिक बातचीत का हिस्सा बनेगा या नहीं।
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भारत आते ही मिशनरीज ऑफ चैरिटी पहुंचे मार्को रूबियो, फिर चर्चा में आया FCRA विवाद
नेशनल डेस्क
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शनिवार को अपनी चार दिन की भारत यात्रा की शुरुआत कोलकाता से की। जैसे ही वह कोलकाता पहुंचे, उन्होंने अपनी पत्नी जेनेट रूबियो के साथ सीधे 'मदर हाउस' का दौरा किया। यह मदर टेरेसा की संस्था 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' का मुख्यालय भी है। रूबियो ने यहां कुछ अधिकारियों से मुलाकात की और पास के चिल्ड्रन्स होम का भी दौरा किया। इसे पिछले 14 साल में किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का पहला कोलकाता दौरा बताया जा रहा है, जबकि इससे पहले 2012 में हिलेरी क्लिंटन यहां आई थीं।
इस यात्रा के साथ ही 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' और उसके FCRA विवाद की चर्चा फिर से तेज हो गई है। यह वही संस्था है जिसके विदेशी चंदे को लेकर 2021 में बड़ा विवाद खड़ा हुआ था, जब भारत सरकार ने FCRA के तहत इसका लाइसेंस नवीनीकरण रोक दिया था। गृह मंत्रालय ने उस समय 'प्रतिकूल इनपुट्स' का जिक्र किया था। हालांकि बाद में जरूरी दस्तावेज जमा होने के बाद लाइसेंस बहाल कर दिया गया था।
उस समय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा था और दावा किया था कि क्रिसमस के दिन संस्था से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया था, जिससे वहां रहने वाले हजारों मरीज और कर्मचारियों पर असर पड़ा। हालाँकि, बाद में गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि खातों को फ्रीज करने का अनुरोध खुद संस्था की ओर से SBI को भेजा गया था। उस समय मामला काफी राजनीतिक हो गया था और विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे।
अब इस मुद्दे की फिर से चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि केंद्र सरकार संसद के अगले मॉनसून सत्र में FCRA कानून में संशोधन के लिए नया बिल लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित बदलावों के मुताबिक, अगर किसी विदेशी फंड पाने वाली संस्था का लाइसेंस रद्द होता है या नवीनीकरण नहीं होता, तो उसकी संपत्तियों को एक नामित प्राधिकरण अपने नियंत्रण में ले सकेगा। इसमें अस्पताल, स्कूल और बैंक खाते जैसी संपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं।
रूबियो के भारत दौरे से पहले, अमेरिकी सांसद क्रिस स्मिथ ने भी इस मामले को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने एक लेख में विदेश मंत्री से अनुरोध किया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ होने वाली बैठकों में इस मुद्दे को उठाएं। स्मिथ का कहना है कि नए कानून से ईसाई चैरिटी संस्थाओं, स्कूलों और अस्पतालों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटी तकनीकी गलतियों के कारण संस्थाओं की संपत्तियां जब्त होने का खतरा हो सकता है।
मार्को रूबियो की यह यात्रा राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोलकाता के बाद, वह आगरा, जयपुर और नई दिल्ली जाएंगे। 26 मई को नई दिल्ली में QUAD देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में भारत-अमेरिका संबंधों, रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी के अलावा कुछ संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या FCRA और मिशनरीज ऑफ चैरिटी का मुद्दा आधिकारिक बातचीत का हिस्सा बनेगा या नहीं।
