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विदेश दौरे से लौटते ही एक्शन में मोदी, आज दिल्ली में मंत्रियों के साथ करेंगे अहम बैठक
नेशनल डेस्क
विदेश दौरे से लौटते ही पीएम मोदी ने दिल्ली में मंत्रिपरिषद की बड़ी बैठक बुलाई। NEET विवाद, पश्चिम एशिया संकट और फेरबदल की चर्चा तेज।
पांच देशों की यात्रा से लौटते ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में खासा buzz है। चर्चा सिर्फ सरकारी कामकाज की समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि मंत्रिमंडल में फेरबदल की बातें भी फिर से उठने लगी हैं। जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक, यह बैठक शाम के करीब 4 बजे नई दिल्ली के 'सेवा तीर्थ' में होगी, जिसमें सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य मंत्री शामिल होंगे। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की यह पहली बड़ी समीक्षा बैठक मानी जा रही है। इस समय यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक ओर NEET परीक्षा लीक मामले को लेकर सरकार विपक्ष और छात्रों के निशाने पर है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली में दिनभर इस बैठक की चर्चाएं होती रही हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री विभिन्न मंत्रालयों की कामकाजी रिपोर्ट पर भी नज़र डाल सकते हैं। कुछ मंत्रालयों के प्रदर्शन पर पहले ही सवाल उठाए जा चुके हैं, जिससे कई मंत्री दबाव में नज़र आ रहे हैं।
शुरूआती जानकारी के अनुसार, इस बैठक में देश की मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। खासकर, पश्चिम एशिया के संकट का आर्थिक असर प्रमुख विषय हो सकता है। भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों पर निर्भर है, और हालात बिगड़ने से सप्लाई चेन पर असर देखने को मिल रहा है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पहले से ही चर्चा में है, साथ ही LPG सिलेंडर के दाम बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि ऊर्जा, उर्वरक, कृषि, विमानन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मंत्रालयों को निर्देश दे सकते हैं कि संकट का असर आम जनता पर कम से कम पड़े। इसी बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भी एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। हालांकि, इसका एजेंडा अभी तक आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है, लेकिन यह माना जा रहा है कि इसमें कानून व्यवस्था और परीक्षा पेपर लीक जैसी समस्याओं पर चर्चा की जा सकती है। पिछले कुछ दिनों में कई राज्यों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज़ हो गई है। राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे कई राज्यों में जांच का दायरा बढ़ चुका है।
NEET परीक्षा लीक मामला इस समय केंद्र सरकार के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुका है। लगभग 23 लाख छात्र परीक्षा से जुड़े फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं। NTA की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने परीक्षा को 'सिस्टेमैटिक फेलियर' बताते हुए एनटीए को हटाने की मांग की है। छात्र संगठनों का विरोध भी लगातार बढ़ रहा है, कई जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना तेज है। ऐसे माहौल में, प्रधानमंत्री मोदी की यह बैठक सिर्फ प्रशासनिक समीक्षा नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखी जा रही है। BJP के भीतर भी चर्चा है कि सरकार आने वाले महीनों में अपनी कार्यशैली और फैसलों को लेकर अधिक आक्रामक रुख अपना सकती है। कुछ नेताओं का कहना है कि बैठक में अगले दस साल की विकास और सुधार रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक एजेंडा जारी नहीं किया गया है, लेकिन दिल्ली में इस बैठक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बनी रही है। कई मंत्रियों की नजरें इस बात पर हैं कि प्रधानमंत्री बैठक में क्या संकेत देते हैं और क्या वास्तव में बड़े बदलाव की शुरुआत होने वाली है।
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विदेश दौरे से लौटते ही एक्शन में मोदी, आज दिल्ली में मंत्रियों के साथ करेंगे अहम बैठक
नेशनल डेस्क
पांच देशों की यात्रा से लौटते ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में खासा buzz है। चर्चा सिर्फ सरकारी कामकाज की समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि मंत्रिमंडल में फेरबदल की बातें भी फिर से उठने लगी हैं। जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक, यह बैठक शाम के करीब 4 बजे नई दिल्ली के 'सेवा तीर्थ' में होगी, जिसमें सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य मंत्री शामिल होंगे। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की यह पहली बड़ी समीक्षा बैठक मानी जा रही है। इस समय यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक ओर NEET परीक्षा लीक मामले को लेकर सरकार विपक्ष और छात्रों के निशाने पर है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली में दिनभर इस बैठक की चर्चाएं होती रही हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री विभिन्न मंत्रालयों की कामकाजी रिपोर्ट पर भी नज़र डाल सकते हैं। कुछ मंत्रालयों के प्रदर्शन पर पहले ही सवाल उठाए जा चुके हैं, जिससे कई मंत्री दबाव में नज़र आ रहे हैं।
शुरूआती जानकारी के अनुसार, इस बैठक में देश की मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। खासकर, पश्चिम एशिया के संकट का आर्थिक असर प्रमुख विषय हो सकता है। भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों पर निर्भर है, और हालात बिगड़ने से सप्लाई चेन पर असर देखने को मिल रहा है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पहले से ही चर्चा में है, साथ ही LPG सिलेंडर के दाम बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि ऊर्जा, उर्वरक, कृषि, विमानन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मंत्रालयों को निर्देश दे सकते हैं कि संकट का असर आम जनता पर कम से कम पड़े। इसी बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भी एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। हालांकि, इसका एजेंडा अभी तक आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है, लेकिन यह माना जा रहा है कि इसमें कानून व्यवस्था और परीक्षा पेपर लीक जैसी समस्याओं पर चर्चा की जा सकती है। पिछले कुछ दिनों में कई राज्यों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज़ हो गई है। राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे कई राज्यों में जांच का दायरा बढ़ चुका है।
NEET परीक्षा लीक मामला इस समय केंद्र सरकार के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुका है। लगभग 23 लाख छात्र परीक्षा से जुड़े फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं। NTA की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने परीक्षा को 'सिस्टेमैटिक फेलियर' बताते हुए एनटीए को हटाने की मांग की है। छात्र संगठनों का विरोध भी लगातार बढ़ रहा है, कई जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना तेज है। ऐसे माहौल में, प्रधानमंत्री मोदी की यह बैठक सिर्फ प्रशासनिक समीक्षा नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखी जा रही है। BJP के भीतर भी चर्चा है कि सरकार आने वाले महीनों में अपनी कार्यशैली और फैसलों को लेकर अधिक आक्रामक रुख अपना सकती है। कुछ नेताओं का कहना है कि बैठक में अगले दस साल की विकास और सुधार रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक एजेंडा जारी नहीं किया गया है, लेकिन दिल्ली में इस बैठक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बनी रही है। कई मंत्रियों की नजरें इस बात पर हैं कि प्रधानमंत्री बैठक में क्या संकेत देते हैं और क्या वास्तव में बड़े बदलाव की शुरुआत होने वाली है।
