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नया कश्मीर — नए भारत का उज्ज्वल प्रतीक.... श्रीनगर में राष्ट्रीय संगोष्ठी ने दिखाया विकास, शांति और समरसता का नया परिदृश्य
नई दिल्ली।
श्रीनगर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान कश्मीर की धरती ने अपने नए, प्रगतिशील और शांतिपूर्ण स्वरूप का सजीव अनुभव कराया। वर्षों तक आतंक, पत्थरबाज़ी और अस्थिरता की छवि से जुड़ा यह प्रदेश आज शांति, विकास, समरसता और युवा-सशक्तिकरण के मार्ग पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
यह परिवर्तन माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के दूरदर्शी नेतृत्व में संभव हुआ है, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति, विश्वास और निवेश के वातावरण को सशक्त रूप से स्थापित किया है।
सामाजिक कार्यकर्ता और आरएसएस से जुड़े एडवोकेट रोनक माली ने कहा, “आज का कश्मीर वास्तव में नए भारत का सुनहरा कश्मीर बन चुका है।”

विश्वग्राम संगोष्ठी में उभरी नई सोच
श्रीनगर में ‘विश्वग्राम’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश से आए प्रबुद्ध जनों ने भाग लिया। मंच पर यह साझा अनुभव हुआ कि अब कश्मीर में स्थिरता और विश्वास की स्थिति पूरी तरह स्थापित हो चुकी है। यहाँ के युवा शिक्षा, उद्यम, सामाजिक नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सक्रियता से आगे बढ़ रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि कश्मीर केवल प्राकृतिक सौंदर्य की भूमि नहीं, बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यही वह पावन भूमि है, जहाँ आदि गुरु शंकराचार्य सहित अनेक ऋषि-मुनियों ने ज्ञान, दर्शन और साहित्य से इस क्षेत्र को गौरवान्वित किया।
गौरवशाली उपस्थिति और प्रेरक संवाद
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा रहे। उनकी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक प्रेरणादायक बना दिया।
इस अवसर पर निशांत समा, ब्रिक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के यूथ वर्टिकल के उपाध्यक्ष तथा इंडो-अफ्रीका ट्रेड काउंसिल के भारत निदेशक के रूप में विशेष अतिथि रहे। उनके विचारों ने भारत-कश्मीर संबंधों को वैश्विक दृष्टि से जोड़ने का एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
यात्रा के दौरान श्रीनगर के प्रमुख समाजसेवी याकूब जी से हुई भेंट विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। वे सामाजिक एकता, सद्भाव और राष्ट्रवाद के प्रसार में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उनकी आत्मीयता और संवाद ने कश्मीरियत की वास्तविक आत्मा का अनुभव कराया।
कश्मीरी संस्कृति और सौहार्द का जीवंत उदाहरण
प्रवास के दौरान पारंपरिक लकड़ी से निर्मित हाउसबोट में निवास का अनुभव कश्मीरी संस्कृति और आतिथ्य का सजीव उदाहरण रहा। झील की शांति और स्थानीय लोगों की आत्मीयता ने इस यात्रा को अविस्मरणीय बना दिया।
आज का कश्मीर शांति, सौहार्द, विकास और युवा शक्ति का प्रतीक है। यह नया कश्मीर वास्तव में नए भारत का उज्ज्वल प्रतिबिंब बन चुका है।
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नया कश्मीर — नए भारत का उज्ज्वल प्रतीक.... श्रीनगर में राष्ट्रीय संगोष्ठी ने दिखाया विकास, शांति और समरसता का नया परिदृश्य
नई दिल्ली।
श्रीनगर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान कश्मीर की धरती ने अपने नए, प्रगतिशील और शांतिपूर्ण स्वरूप का सजीव अनुभव कराया। वर्षों तक आतंक, पत्थरबाज़ी और अस्थिरता की छवि से जुड़ा यह प्रदेश आज शांति, विकास, समरसता और युवा-सशक्तिकरण के मार्ग पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
यह परिवर्तन माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के दूरदर्शी नेतृत्व में संभव हुआ है, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति, विश्वास और निवेश के वातावरण को सशक्त रूप से स्थापित किया है।
सामाजिक कार्यकर्ता और आरएसएस से जुड़े एडवोकेट रोनक माली ने कहा, “आज का कश्मीर वास्तव में नए भारत का सुनहरा कश्मीर बन चुका है।”

विश्वग्राम संगोष्ठी में उभरी नई सोच
श्रीनगर में ‘विश्वग्राम’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश से आए प्रबुद्ध जनों ने भाग लिया। मंच पर यह साझा अनुभव हुआ कि अब कश्मीर में स्थिरता और विश्वास की स्थिति पूरी तरह स्थापित हो चुकी है। यहाँ के युवा शिक्षा, उद्यम, सामाजिक नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सक्रियता से आगे बढ़ रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि कश्मीर केवल प्राकृतिक सौंदर्य की भूमि नहीं, बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यही वह पावन भूमि है, जहाँ आदि गुरु शंकराचार्य सहित अनेक ऋषि-मुनियों ने ज्ञान, दर्शन और साहित्य से इस क्षेत्र को गौरवान्वित किया।
गौरवशाली उपस्थिति और प्रेरक संवाद
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा रहे। उनकी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक प्रेरणादायक बना दिया।
इस अवसर पर निशांत समा, ब्रिक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के यूथ वर्टिकल के उपाध्यक्ष तथा इंडो-अफ्रीका ट्रेड काउंसिल के भारत निदेशक के रूप में विशेष अतिथि रहे। उनके विचारों ने भारत-कश्मीर संबंधों को वैश्विक दृष्टि से जोड़ने का एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
यात्रा के दौरान श्रीनगर के प्रमुख समाजसेवी याकूब जी से हुई भेंट विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। वे सामाजिक एकता, सद्भाव और राष्ट्रवाद के प्रसार में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उनकी आत्मीयता और संवाद ने कश्मीरियत की वास्तविक आत्मा का अनुभव कराया।
कश्मीरी संस्कृति और सौहार्द का जीवंत उदाहरण
प्रवास के दौरान पारंपरिक लकड़ी से निर्मित हाउसबोट में निवास का अनुभव कश्मीरी संस्कृति और आतिथ्य का सजीव उदाहरण रहा। झील की शांति और स्थानीय लोगों की आत्मीयता ने इस यात्रा को अविस्मरणीय बना दिया।
आज का कश्मीर शांति, सौहार्द, विकास और युवा शक्ति का प्रतीक है। यह नया कश्मीर वास्तव में नए भारत का उज्ज्वल प्रतिबिंब बन चुका है।
