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ओमान के पास तेल टैंकर पर हमला, भारतीय क्रू के साथ जहाज में लगी आग
Digital Desk
सेटेबेलो टैंकर के इंजन रूम में मिसाइल हमले से आग, 24 भारतीयों में से 3 लापता, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति
ओमान के तट के पास अरब सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य के बीच एक तेल टैंकर पर हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है। यह घटना उस वक्त हुई जब Palau-flagged तेल टैंकर “सेटेबेलो” सामान्य समुद्री मार्ग से गुजर रहा था। जहाज पर कुल 28 क्रू मेंबर मौजूद थे, जिनमें 24 भारतीय नागरिक शामिल थे। अचानक हुए इस हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते पूरी मशीनरी में आग लग गई। यह घटना ओमान के सोहर पोर्ट से लगभग 20 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में हुई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी 15 सेकंड के एक वीडियो में यह दृश्य सामने आया है जिसमें साफ दिखाई देता है कि जहाज को निशाना बनाए जाने के तुरंत बाद उसमें आग लग जाती है। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना को लेकर बहस और तेज हो गई है।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि जहाज को सटीक हथियारों से निशाना बनाया गया क्योंकि उसने कथित तौर पर दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। बयान के मुताबिक यह कार्रवाई एक चल रहे समुद्री अवरोध अभियान का हिस्सा थी, जिसमें कुछ जहाजों को रोका गया और कुछ को वापस भेजा गया। हालांकि इस कार्रवाई के तरीके और इसके परिणामों को लेकर कई देशों ने चिंता जताई है। हमले के तुरंत बाद जहाज के इंजन रूम में लगी आग तेजी से फैल गई। जहाज के भीतर अफरातफरी का माहौल बन गया और क्रू मेंबर्स को बचाने के प्रयास शुरू किए गए। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, जहाज पर मौजूद 28 लोगों में से 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि 3 भारतीय अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाकी क्रू सदस्यों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।
इस घटना के बाद भारत सरकार ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि भारत इस हमले की कड़ी निंदा करता है और यह स्वीकार्य नहीं है कि किसी भी नागरिक जहाज या व्यापारिक पोत को इस तरह निशाना बनाया जाए। भारत ने अमेरिका के शीर्ष राजनयिक को तलब कर इस मामले में औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। सरकार ने यह भी कहा कि इस पूरे क्षेत्र में बढ़ता तनाव बेहद चिंताजनक है और सभी पक्षों को तुरंत संयम बरतना चाहिए। भारत ने दोहराया कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद जरूरी है और किसी भी तरह की कार्रवाई जो इसे बाधित करे, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालती है।
भारत ने यह भी कहा कि लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं न केवल मानवीय संकट पैदा करती हैं बल्कि भारत की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर डालती हैं। इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने भी इस घटना की निंदा की है। संगठन ने कहा कि कोई भी कार्रवाई जो नाविकों की जान और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सुरक्षा को खतरे में डालती है, पूरी तरह अस्वीकार्य है। IMO महासचिव ने कहा कि इस घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
यह घटना खाड़ी क्षेत्र में पहले से जारी तनाव को और गंभीर बना सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि यह कार्रवाई समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई थी, लेकिन इसके परिणामस्वरूप नागरिकों की जान जोखिम में पड़ना गंभीर चिंता का विषय बन गया है। वीडियो सामने आने के बाद कई मानवाधिकार संगठनों ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
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ओमान के पास तेल टैंकर पर हमला, भारतीय क्रू के साथ जहाज में लगी आग
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ओमान के तट के पास अरब सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य के बीच एक तेल टैंकर पर हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है। यह घटना उस वक्त हुई जब Palau-flagged तेल टैंकर “सेटेबेलो” सामान्य समुद्री मार्ग से गुजर रहा था। जहाज पर कुल 28 क्रू मेंबर मौजूद थे, जिनमें 24 भारतीय नागरिक शामिल थे। अचानक हुए इस हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते पूरी मशीनरी में आग लग गई। यह घटना ओमान के सोहर पोर्ट से लगभग 20 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में हुई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी 15 सेकंड के एक वीडियो में यह दृश्य सामने आया है जिसमें साफ दिखाई देता है कि जहाज को निशाना बनाए जाने के तुरंत बाद उसमें आग लग जाती है। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना को लेकर बहस और तेज हो गई है।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि जहाज को सटीक हथियारों से निशाना बनाया गया क्योंकि उसने कथित तौर पर दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। बयान के मुताबिक यह कार्रवाई एक चल रहे समुद्री अवरोध अभियान का हिस्सा थी, जिसमें कुछ जहाजों को रोका गया और कुछ को वापस भेजा गया। हालांकि इस कार्रवाई के तरीके और इसके परिणामों को लेकर कई देशों ने चिंता जताई है। हमले के तुरंत बाद जहाज के इंजन रूम में लगी आग तेजी से फैल गई। जहाज के भीतर अफरातफरी का माहौल बन गया और क्रू मेंबर्स को बचाने के प्रयास शुरू किए गए। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, जहाज पर मौजूद 28 लोगों में से 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि 3 भारतीय अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाकी क्रू सदस्यों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।
इस घटना के बाद भारत सरकार ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि भारत इस हमले की कड़ी निंदा करता है और यह स्वीकार्य नहीं है कि किसी भी नागरिक जहाज या व्यापारिक पोत को इस तरह निशाना बनाया जाए। भारत ने अमेरिका के शीर्ष राजनयिक को तलब कर इस मामले में औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। सरकार ने यह भी कहा कि इस पूरे क्षेत्र में बढ़ता तनाव बेहद चिंताजनक है और सभी पक्षों को तुरंत संयम बरतना चाहिए। भारत ने दोहराया कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद जरूरी है और किसी भी तरह की कार्रवाई जो इसे बाधित करे, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालती है।
भारत ने यह भी कहा कि लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं न केवल मानवीय संकट पैदा करती हैं बल्कि भारत की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर डालती हैं। इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने भी इस घटना की निंदा की है। संगठन ने कहा कि कोई भी कार्रवाई जो नाविकों की जान और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सुरक्षा को खतरे में डालती है, पूरी तरह अस्वीकार्य है। IMO महासचिव ने कहा कि इस घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
यह घटना खाड़ी क्षेत्र में पहले से जारी तनाव को और गंभीर बना सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि यह कार्रवाई समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई थी, लेकिन इसके परिणामस्वरूप नागरिकों की जान जोखिम में पड़ना गंभीर चिंता का विषय बन गया है। वीडियो सामने आने के बाद कई मानवाधिकार संगठनों ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
