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'हॉर्मुज खोलो या अंजाम भुगतो'... ट्रंप की ईरान को 48 घंटे की सख्त चेतावनी
Digital Desk
डोनाल्ड ट्रंप बोले- ईरान के साथ बातचीत सही दिशा में, लेकिन जलडमरूमध्य बंद रहा तो होगी कड़ी कार्रवाई; तेहरान ने प्रत्यक्ष वार्ता से किया इनकार
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जल्द नहीं खोला गया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन यदि रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग को बंद रखा गया तो अमेरिका सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
कैलिफोर्निया दौरे के दौरान फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि आने वाले 48 घंटे इस पूरे घटनाक्रम के लिए बेहद अहम होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि स्थिति जल्द स्पष्ट हो जाएगी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य फिर से सामान्य रूप से खुल जाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो ईरान को "बहुत मजबूत जवाब" का सामना करना पड़ेगा।
ट्रंप ने बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच "बेहद अच्छी चर्चा" चल रही है। उन्होंने दावा किया कि ईरान सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार नहीं करना चाहता, लेकिन दोनों देशों के बीच संपर्क बना हुआ है। उनके अनुसार ईरान भी किसी न किसी समझौते तक पहुंचना चाहता है, जिससे क्षेत्र में तनाव कम हो सके।
हालांकि दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के इस दावे को खारिज कर दिया है। तेहरान का कहना है कि उसकी वॉशिंगटन के साथ कोई प्रत्यक्ष बातचीत नहीं चल रही है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अमेरिका द्वारा किए जा रहे दावे वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते और दोनों देशों के बीच औपचारिक वार्ता की कोई प्रक्रिया जारी नहीं है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है। ऐसे में यदि इस समुद्री रास्ते पर किसी प्रकार की बाधा आती है तो उसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर तुरंत दिखाई देता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेजी आ सकती है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। भारत समेत कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य या राजनीतिक तनाव को पूरी दुनिया गंभीरता से देख रही है।
ट्रंप ने अपने बयान में एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। उनके अनुसार ईरान पहले भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाया है और भविष्य में भी ऐसा नहीं हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को औपचारिक रूप से भी सुनिश्चित किया जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में पहले से ही कई मोर्चों पर तनाव बना हुआ है। क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक संतुलन को लेकर लगातार चिंताएं बनी हुई हैं। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
ट्रंप का "48 घंटे" वाला बयान इस ओर संकेत करता है कि आने वाले दिनों में कोई महत्वपूर्ण कूटनीतिक या रणनीतिक फैसला सामने आ सकता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के बीच बातचीत किस स्तर पर हो रही है और क्या वास्तव में किसी समझौते की संभावना है।
ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों और पश्चिमी देशों के दबाव का सामना कर रहा है। वहीं अमेरिका लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाता रहा है। दोनों देशों के बीच वर्षों से अविश्वास का माहौल बना हुआ है और समय-समय पर तनाव बढ़ता रहा है।
दुनिया के कई देशों ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य रहती है तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी। लेकिन यदि तनाव बढ़ता है या किसी प्रकार की सैन्य कार्रवाई होती है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
ऊर्जा बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि निवेशक और तेल कंपनियां फिलहाल अमेरिका और ईरान के अगले कदम का इंतजार कर रही हैं। यदि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान निकलता है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। वहीं किसी भी टकराव की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।
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'हॉर्मुज खोलो या अंजाम भुगतो'... ट्रंप की ईरान को 48 घंटे की सख्त चेतावनी
Digital Desk
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जल्द नहीं खोला गया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन यदि रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग को बंद रखा गया तो अमेरिका सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
कैलिफोर्निया दौरे के दौरान फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि आने वाले 48 घंटे इस पूरे घटनाक्रम के लिए बेहद अहम होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि स्थिति जल्द स्पष्ट हो जाएगी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य फिर से सामान्य रूप से खुल जाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो ईरान को "बहुत मजबूत जवाब" का सामना करना पड़ेगा।
ट्रंप ने बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच "बेहद अच्छी चर्चा" चल रही है। उन्होंने दावा किया कि ईरान सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार नहीं करना चाहता, लेकिन दोनों देशों के बीच संपर्क बना हुआ है। उनके अनुसार ईरान भी किसी न किसी समझौते तक पहुंचना चाहता है, जिससे क्षेत्र में तनाव कम हो सके।
हालांकि दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के इस दावे को खारिज कर दिया है। तेहरान का कहना है कि उसकी वॉशिंगटन के साथ कोई प्रत्यक्ष बातचीत नहीं चल रही है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अमेरिका द्वारा किए जा रहे दावे वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते और दोनों देशों के बीच औपचारिक वार्ता की कोई प्रक्रिया जारी नहीं है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है। ऐसे में यदि इस समुद्री रास्ते पर किसी प्रकार की बाधा आती है तो उसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर तुरंत दिखाई देता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेजी आ सकती है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। भारत समेत कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य या राजनीतिक तनाव को पूरी दुनिया गंभीरता से देख रही है।
ट्रंप ने अपने बयान में एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। उनके अनुसार ईरान पहले भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाया है और भविष्य में भी ऐसा नहीं हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को औपचारिक रूप से भी सुनिश्चित किया जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में पहले से ही कई मोर्चों पर तनाव बना हुआ है। क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक संतुलन को लेकर लगातार चिंताएं बनी हुई हैं। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
ट्रंप का "48 घंटे" वाला बयान इस ओर संकेत करता है कि आने वाले दिनों में कोई महत्वपूर्ण कूटनीतिक या रणनीतिक फैसला सामने आ सकता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के बीच बातचीत किस स्तर पर हो रही है और क्या वास्तव में किसी समझौते की संभावना है।
ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों और पश्चिमी देशों के दबाव का सामना कर रहा है। वहीं अमेरिका लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाता रहा है। दोनों देशों के बीच वर्षों से अविश्वास का माहौल बना हुआ है और समय-समय पर तनाव बढ़ता रहा है।
दुनिया के कई देशों ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य रहती है तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी। लेकिन यदि तनाव बढ़ता है या किसी प्रकार की सैन्य कार्रवाई होती है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
ऊर्जा बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि निवेशक और तेल कंपनियां फिलहाल अमेरिका और ईरान के अगले कदम का इंतजार कर रही हैं। यदि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान निकलता है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। वहीं किसी भी टकराव की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।
