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US Green Card Reform: भारतीय H-1B प्रोफेशनल्स के लिए खुल सकता है नया रास्ता
Digital Desk
सीनेटर एलेक्स पैडिला के प्रस्ताव में 7 साल से अमेरिका में रह रहे योग्य प्रवासियों को परमानेंट रेजिडेंसी का मौका देने की बात, लेकिन कांग्रेस की मंजूरी बड़ी चुनौती
अमेरिका में वर्षों से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय H-1B वीजा धारकों के लिए एक नया इमिग्रेशन प्रस्ताव उम्मीद जगा रहा है। अमेरिकी सीनेटर Alex Padilla ने ‘Renewing Immigration Provisions of the Immigration Act of 1929’ से जुड़े प्रस्ताव को आगे बढ़ाया है। इसका मकसद अमेरिका के पुराने ‘Registry’ नियम में बदलाव करना है। अगर यह प्रस्ताव कांग्रेस के दोनों सदनों से मंजूर होकर कानून बनता है, तो लंबे समय से अमेरिका में रह रहे लाखों प्रवासियों को स्थायी निवास यानी Green Card के लिए आवेदन करने का एक अतिरिक्त रास्ता मिल सकता है। इसका असर उन भारतीय प्रोफेशनल्स पर भी पड़ सकता है जो H-1B पर लंबे समय से अमेरिका में काम कर रहे हैं और रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की लंबी कतार में फंसे हैं। हालांकि फिलहाल इसे मिलने वाली राहत तय नहीं है। बिल को लंबी विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा और अमेरिकी संसद में इमिग्रेशन को लेकर गहरे राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
प्रस्ताव का सबसे अहम हिस्सा Immigration and Nationality Act की Section 249 यानी Registry व्यवस्था से जुड़ा है। मौजूदा Registry प्रावधान काफी पुराने कटऑफ पर आधारित हैं और सामान्य तौर पर 1 जनवरी 1972 से पहले अमेरिका में प्रवेश करने वाले पात्र प्रवासियों से जुड़े हैं। पैडिला का प्रस्ताव इस निश्चित तारीख की जगह अमेरिका में लगातार रहने की अवधि को आधार बनाने की कोशिश करता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत आवेदन करने से पहले कम से कम सात साल तक लगातार अमेरिका में रह चुके कुछ प्रवासी कानूनी शर्तें पूरी करने पर lawful permanent resident बनने के लिए पात्र हो सकते हैं। इसके लिए केवल अमेरिका में सात साल बिताना ही पर्याप्त नहीं होगा। आवेदक को कानून में तय बाकी पात्रता शर्तें भी पूरी करनी होंगी। यानी इसे सात साल पूरा होते ही अपने आप Green Card मिलने की व्यवस्था समझना सही नहीं होगा। पैडिला इस बदलाव को मौजूदा अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम को आज की परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की कोशिश बता रहे हैं।
भारतीय समुदाय की नजर इस प्रस्ताव पर खास तौर पर इसलिए है क्योंकि अमेरिका के H-1B सिस्टम में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी काफी बड़ी है। टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और दूसरे स्किल्ड सेक्टर में काम करने वाले बड़ी संख्या में भारतीय कर्मचारी पहले H-1B वीजा पर अमेरिका पहुंचते हैं और बाद में employment-based Green Card के लिए आवेदन करते हैं। यहां सबसे बड़ी परेशानी लंबा बैकलॉग है। रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड में देश के आधार पर लागू सीमाओं की वजह से भारतीय आवेदकों के लिए प्रतीक्षा अवधि कई मामलों में काफी लंबी हो जाती है। इसी दौरान नौकरी बदलने, बच्चों की उम्र बढ़ने और वीजा स्टेटस बनाए रखने जैसी परेशानियां परिवारों के सामने आती रहती हैं। Registry व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव लागू होता है तो पात्रता शर्तें पूरी करने वाले कुछ लंबे समय से रह रहे भारतीयों को मौजूदा employment-based queue से अलग एक विकल्प मिल सकता है।
इसका दायरा केवल H-1B प्रोफेशनल्स तक सीमित नहीं रखा गया है। प्रस्ताव के समर्थकों के मुताबिक Dreamers, Temporary Protected Status यानी TPS से जुड़े लोग, लंबे समय से अमेरिका में रह रहे कुछ वीजा धारक और दूसरे पात्र प्रवासी भी इसके दायरे में आ सकते हैं। भारतीय छात्रों के लिहाज से भी प्रस्ताव पर नजर रहेगी। अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद कई छात्र OPT के जरिए काम शुरू करते हैं और बाद में H-1B हासिल कर Green Card प्रक्रिया में जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति प्रस्तावित अवधि और दूसरी कानूनी शर्तों को पूरा करता है तो भविष्य में Registry का बदला हुआ रास्ता उसके लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि अंतिम पात्रता इस बात पर निर्भर करेगी कि बिल किस रूप में पारित होता है और लागू नियम क्या तय किए जाते हैं।
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US Green Card Reform: भारतीय H-1B प्रोफेशनल्स के लिए खुल सकता है नया रास्ता
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अमेरिका में वर्षों से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय H-1B वीजा धारकों के लिए एक नया इमिग्रेशन प्रस्ताव उम्मीद जगा रहा है। अमेरिकी सीनेटर Alex Padilla ने ‘Renewing Immigration Provisions of the Immigration Act of 1929’ से जुड़े प्रस्ताव को आगे बढ़ाया है। इसका मकसद अमेरिका के पुराने ‘Registry’ नियम में बदलाव करना है। अगर यह प्रस्ताव कांग्रेस के दोनों सदनों से मंजूर होकर कानून बनता है, तो लंबे समय से अमेरिका में रह रहे लाखों प्रवासियों को स्थायी निवास यानी Green Card के लिए आवेदन करने का एक अतिरिक्त रास्ता मिल सकता है। इसका असर उन भारतीय प्रोफेशनल्स पर भी पड़ सकता है जो H-1B पर लंबे समय से अमेरिका में काम कर रहे हैं और रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की लंबी कतार में फंसे हैं। हालांकि फिलहाल इसे मिलने वाली राहत तय नहीं है। बिल को लंबी विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा और अमेरिकी संसद में इमिग्रेशन को लेकर गहरे राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
प्रस्ताव का सबसे अहम हिस्सा Immigration and Nationality Act की Section 249 यानी Registry व्यवस्था से जुड़ा है। मौजूदा Registry प्रावधान काफी पुराने कटऑफ पर आधारित हैं और सामान्य तौर पर 1 जनवरी 1972 से पहले अमेरिका में प्रवेश करने वाले पात्र प्रवासियों से जुड़े हैं। पैडिला का प्रस्ताव इस निश्चित तारीख की जगह अमेरिका में लगातार रहने की अवधि को आधार बनाने की कोशिश करता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत आवेदन करने से पहले कम से कम सात साल तक लगातार अमेरिका में रह चुके कुछ प्रवासी कानूनी शर्तें पूरी करने पर lawful permanent resident बनने के लिए पात्र हो सकते हैं। इसके लिए केवल अमेरिका में सात साल बिताना ही पर्याप्त नहीं होगा। आवेदक को कानून में तय बाकी पात्रता शर्तें भी पूरी करनी होंगी। यानी इसे सात साल पूरा होते ही अपने आप Green Card मिलने की व्यवस्था समझना सही नहीं होगा। पैडिला इस बदलाव को मौजूदा अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम को आज की परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की कोशिश बता रहे हैं।
भारतीय समुदाय की नजर इस प्रस्ताव पर खास तौर पर इसलिए है क्योंकि अमेरिका के H-1B सिस्टम में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी काफी बड़ी है। टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और दूसरे स्किल्ड सेक्टर में काम करने वाले बड़ी संख्या में भारतीय कर्मचारी पहले H-1B वीजा पर अमेरिका पहुंचते हैं और बाद में employment-based Green Card के लिए आवेदन करते हैं। यहां सबसे बड़ी परेशानी लंबा बैकलॉग है। रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड में देश के आधार पर लागू सीमाओं की वजह से भारतीय आवेदकों के लिए प्रतीक्षा अवधि कई मामलों में काफी लंबी हो जाती है। इसी दौरान नौकरी बदलने, बच्चों की उम्र बढ़ने और वीजा स्टेटस बनाए रखने जैसी परेशानियां परिवारों के सामने आती रहती हैं। Registry व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव लागू होता है तो पात्रता शर्तें पूरी करने वाले कुछ लंबे समय से रह रहे भारतीयों को मौजूदा employment-based queue से अलग एक विकल्प मिल सकता है।
इसका दायरा केवल H-1B प्रोफेशनल्स तक सीमित नहीं रखा गया है। प्रस्ताव के समर्थकों के मुताबिक Dreamers, Temporary Protected Status यानी TPS से जुड़े लोग, लंबे समय से अमेरिका में रह रहे कुछ वीजा धारक और दूसरे पात्र प्रवासी भी इसके दायरे में आ सकते हैं। भारतीय छात्रों के लिहाज से भी प्रस्ताव पर नजर रहेगी। अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद कई छात्र OPT के जरिए काम शुरू करते हैं और बाद में H-1B हासिल कर Green Card प्रक्रिया में जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति प्रस्तावित अवधि और दूसरी कानूनी शर्तों को पूरा करता है तो भविष्य में Registry का बदला हुआ रास्ता उसके लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि अंतिम पात्रता इस बात पर निर्भर करेगी कि बिल किस रूप में पारित होता है और लागू नियम क्या तय किए जाते हैं।
