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परीक्षा पे चर्चा 2026: पीएम मोदी ने छात्रों को दिया आत्मविश्वास का मंत्र, स्वदेशी अपनाने और संतुलित सोच पर जोर
नेशनल न्यूज
दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास में ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें संस्करण में पीएम मोदी ने देशभर के छात्रों से संवाद किया, परीक्षा तनाव, करियर, स्किल और राष्ट्र निर्माण पर खुलकर बात की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें संस्करण में देश के विभिन्न राज्यों से आए छात्रों से सीधा संवाद किया। कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुआ, जहां पीएम मोदी ने छात्रों का स्वागत असम के पारंपरिक गमछे पहनाकर किया। इस संवाद में उन्होंने परीक्षा के दबाव, आत्मविश्वास, करियर विकल्प, स्वदेशी सोच और विकसित भारत के लक्ष्य पर विस्तार से विचार रखे।
कार्यक्रम के पहले एपिसोड में प्रधानमंत्री ने छात्रों से विदेशी वस्तुओं के बजाय स्वदेशी उत्पाद अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि हर नागरिक साल में एक विदेशी वस्तु को स्वदेशी विकल्प से बदलने का संकल्प ले, तो इसका सीधा लाभ देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा। पीएम मोदी ने छात्रों से 2047 तक विकसित भारत बनाने को व्यक्तिगत लक्ष्य बनाने का आह्वान किया।
छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने परीक्षा और प्रस्तुति के दौरान आने वाले डर पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास का सबसे बड़ा स्रोत अपनी सच्चाई और तैयारी पर भरोसा है। पीएम ने उदाहरण देते हुए कहा कि सामान्य लोग भी जब सच के आधार पर बोलते हैं, तो उनका आत्मविश्वास स्वतः झलकता है।
करियर और रुचि से जुड़े सवाल पर प्रधानमंत्री ने छात्रों को रचनात्मक सोच अपनाने की सलाह दी। गेमिंग में रुचि रखने वाले एक छात्र को उन्होंने भारत की पारंपरिक कहानियों पर आधारित गेम विकसित करने का सुझाव दिया। पंचतंत्र और महाभारत जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय कथाओं में वैश्विक संभावनाएं हैं।
अंक और उपलब्धियों को लेकर बढ़ते दबाव पर प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि “मार्क्स-मार्क्स की बीमारी” से बाहर निकलने की जरूरत है। उन्होंने छात्रों से पूछा कि क्या उन्हें पिछले वर्षों के टॉपर्स के नाम याद हैं। पीएम ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए।
स्किल बनाम मार्क्स के सवाल पर प्रधानमंत्री ने संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में कौशल भी जरूरी है और छात्र जीवन में अंक भी अहम हैं। किसी एक को नजरअंदाज करना सही नहीं है। शिक्षक और पढ़ाई की गति को लेकर उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि सीखने की जिज्ञासा बनाए रखें और खुद को आगे बढ़ाते रहें।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘परीक्षा पे चर्चा’ का उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं से पहले छात्रों के तनाव को कम करना और उन्हें सकारात्मक दृष्टिकोण देना है। इस वर्ष का अगला एपिसोड 9 फरवरी को प्रसारित किया जाएगा। कार्यक्रम को दूरदर्शन और शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकेगा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें संस्करण में देश के विभिन्न राज्यों से आए छात्रों से सीधा संवाद किया। कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुआ, जहां पीएम मोदी ने छात्रों का स्वागत असम के पारंपरिक गमछे पहनाकर किया। इस संवाद में उन्होंने परीक्षा के दबाव, आत्मविश्वास, करियर विकल्प, स्वदेशी सोच और विकसित भारत के लक्ष्य पर विस्तार से विचार रखे।
कार्यक्रम के पहले एपिसोड में प्रधानमंत्री ने छात्रों से विदेशी वस्तुओं के बजाय स्वदेशी उत्पाद अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि हर नागरिक साल में एक विदेशी वस्तु को स्वदेशी विकल्प से बदलने का संकल्प ले, तो इसका सीधा लाभ देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा। पीएम मोदी ने छात्रों से 2047 तक विकसित भारत बनाने को व्यक्तिगत लक्ष्य बनाने का आह्वान किया।
छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने परीक्षा और प्रस्तुति के दौरान आने वाले डर पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास का सबसे बड़ा स्रोत अपनी सच्चाई और तैयारी पर भरोसा है। पीएम ने उदाहरण देते हुए कहा कि सामान्य लोग भी जब सच के आधार पर बोलते हैं, तो उनका आत्मविश्वास स्वतः झलकता है।
करियर और रुचि से जुड़े सवाल पर प्रधानमंत्री ने छात्रों को रचनात्मक सोच अपनाने की सलाह दी। गेमिंग में रुचि रखने वाले एक छात्र को उन्होंने भारत की पारंपरिक कहानियों पर आधारित गेम विकसित करने का सुझाव दिया। पंचतंत्र और महाभारत जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय कथाओं में वैश्विक संभावनाएं हैं।
अंक और उपलब्धियों को लेकर बढ़ते दबाव पर प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि “मार्क्स-मार्क्स की बीमारी” से बाहर निकलने की जरूरत है। उन्होंने छात्रों से पूछा कि क्या उन्हें पिछले वर्षों के टॉपर्स के नाम याद हैं। पीएम ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए।
स्किल बनाम मार्क्स के सवाल पर प्रधानमंत्री ने संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में कौशल भी जरूरी है और छात्र जीवन में अंक भी अहम हैं। किसी एक को नजरअंदाज करना सही नहीं है। शिक्षक और पढ़ाई की गति को लेकर उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि सीखने की जिज्ञासा बनाए रखें और खुद को आगे बढ़ाते रहें।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘परीक्षा पे चर्चा’ का उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं से पहले छात्रों के तनाव को कम करना और उन्हें सकारात्मक दृष्टिकोण देना है। इस वर्ष का अगला एपिसोड 9 फरवरी को प्रसारित किया जाएगा। कार्यक्रम को दूरदर्शन और शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकेगा।
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