PFRDA की खास पहल, पेंशन परिदृश्य में परिवर्तन’ विषय पर किया सम्मेलन

Jagran, Desk

1 अक्टूबर को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी NPS दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसे पेंशन फंड विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने 2021 में शुरू किया था। इस दिन का उद्देश्य पेंशन और सेवानिवृत्ति योजनाओं की महत्ता पर जागरूकता फैलाना है, ताकि देश के नागरिक रिटायरमेंट के बाद वित्तीय आत्मनिर्भरता सुनिश्चित कर सकें।

पीएफआरडीए ने अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर इसके बारे में जागरूकता बढ़ाने का काम कर रहा है। यह दिन अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के साथ ही आता है, जो विश्व स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित करने के लिए समर्पित दिन है। एनपीएस दिवस मनाकर, पीएफआरडीए का उद्देश्य भारतीय नागरिकों में वित्तीय आत्मनिर्भरता की संस्कृति को बढ़ावा देना है, तथा यह सुनिश्चित करना है कि वे सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक और स्वतंत्र जीवन जी सकें।
एक पहल के रूप में, पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने 1 अक्टूबर, 2024 को होटल द अशोक, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में एनपीएस दिवस सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन का विषय था ‘सुरक्षित सेवानिवृत्ति: भारत के पेंशन परिदृश्य में परिवर्तन’, जिसमें प्रतिष्ठित पॉलिसीमेकर्स, फाईनेंशियल एक्सपर्ट और इंडस्ट्री के लीडर भारत में पेंशन के भविष्य पर विशेष रूप से उभरते श्रम बाजार की गतिशीलता और डिजिटलीकरण के संदर्भ में चर्चा करने के लिए एक साथ आए । 

कार्यक्रम की शुरुआत पीएफआरडीए की पूर्णकालिक सदस्य (इकोनॉमिक्स) सुश्री ममता शंकर के स्वागत भाषण से हुई। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की वृद्ध होती आबादी के वित्तीय कल्याण को सुनिश्चित करने में पेंशन की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा हाल ही में शुरू की गई विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया, जो देश की पेंशन प्रणाली को सुदृढ़ और समावेशी बनाने के प्रयासों का हिस्सा हैं।
इसके बाद, पीएफआरडीए के अध्यक्ष डॉ. दीपक मोहंती ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने भारत की पेंशन प्रणाली में चल रहे परिवर्तनों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान परिदृश्य में एक अधिक समावेशी और सरल पेंशन ढांचे की आवश्यकता है, जो विशेष रूप से श्रम बाजार की गतिशीलता और गिग इकॉनमी के संदर्भ में सभी नागरिकों की जरूरतों को पूरा कर सके।
डॉ. मोहंती ने यह भी जोर दिया कि पेंशन ढांचे को आधुनिक तकनीकी के साथ एकीकृत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे पेंशन प्रणाली डिजिटल युग में अधिक सुलभ, कुशल, और सुरक्षित बन सकेगी, जिससे न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण और असंगठित क्षेत्र के लोग भी पेंशन योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी अनंत नागेश्वरन ने एनपीएस दिवस सम्मेलन में अपने विशेष संबोधन के दौरान पेंशन के लिए शुरुआती वर्षों से बचत के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पेंशन क्षेत्र की उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद, भारत की कुल जनसंख्या का केवल लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा ही राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के अंतर्गत आता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कुशल पेंशन प्रणाली के लिए संतुलित परिसंपत्ति-देयता ढांचे की आवश्यकता होती है, ताकि इसमें निवेश की गई राशि और भविष्य में दी जाने वाली पेंशन देनदारियों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
इसके बाद, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल ने अपने मुख्य भाषण में बताया कि भारत के विभिन्न राज्यों में बुजुर्गों की स्थिति समान नहीं है और युवा पीढ़ी में तात्कालिक संतुष्टि पर आधारित धन की सोच को बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने बुजुर्गों की लैंगिक विविधता पर प्रकाश डाला, जिसमें महिलाओं का अनुपात अधिक है, और यह बताया कि विधवा महिलाओं की संख्या 54% है। उन्होंने यह भी कहा कि 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के मार्ग पर होगा, और तब तक जीवन प्रत्याशा बढ़कर 85 वर्ष तक पहुंचने की संभावना है, जो नई चुनौतियाँ उत्पन्न करेगी।
डॉ. पॉल ने ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों तक पहुँचने और एनपीएस और एपीवाई के बारे में जागरूकता फैलाने में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नीति निर्माण के दौरान स्वास्थ्य, सामाजिक-आर्थिक कल्याण और डिजिटल समावेशन के पहलुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। यह पहल देश में एक समग्र और समावेशी पेंशन प्रणाली के विकास में मदद करेगी, जो सभी आयु और वर्गों के लोगों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखेगी।
सम्मेलन के दौरान पेंशन बुलेटिन का हिंदी संस्करण जारी किया गया। इस बुलेटिन में पेंशन नियोजन के विभिन्न पहलुओं और पेंशन क्षेत्र से जुड़ी नवीनतम जानकारियाँ शामिल हैं।
सम्मेलन के दौरान, पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने अपने निरंतर प्रयासों के तहत निवेश विकल्पों का विस्तार करने के उद्देश्य से एक नया बैलेंस्ड लाइफ साइकिल फंड (BLC) पेश किया। यह नया फंड विशेष रूप से विकास परिसंपत्तियों, खासकर इक्विटी निवेशों पर केंद्रित है, जिससे राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) के ग्राहकों को सरल और उच्च रिटर्न की संभावनाएँ प्रदान की जा सकें।
BLC के तहत इक्विटी आवंटन की संरचना मौजूदा लाइफ साइकिल फंड 50 (LC 50) से मिलती-जुलती है, जिसमें इक्विटी की सीमा 50% रखी गई है। हालांकि, BLC में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि इक्विटी आवंटन की टेपरिंग (धीरे-धीरे कमी) 35 की बजाय 45 साल की उम्र में शुरू होती है। इसका उद्देश्य ग्राहकों को लंबी अवधि तक इक्विटी में अधिक निवेश बनाए रखने का अवसर देना है, जिससे उनके रिटर्न की संभावना बेहतर हो सके।
यह पहल एनपीएस ग्राहकों के लिए निवेश प्रक्रिया को अधिक लचीला और लाभकारी बनाने की दिशा में एक और कदम है, जो उनकी वित्तीय सुरक्षा और दीर्घकालिक पेंशन उद्देश्यों को पूरा करने में सहायक होगी।
इन भाषणों के बाद, सम्मेलन में दो महत्वपूर्ण पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं। पहली पैनल चर्चा, जिसका विषय "डिजिटल युग में पेंशन की पुनर्कल्पना" था, में इस बात पर गहन चर्चा की गई कि डिजिटल टेक्नोलॉजी किस प्रकार से पेंशन प्रणालियों को नया रूप दे रही हैं। चर्चा में यह बात सामने आई कि डिजिटल इनोवेशन पेंशन योजनाओं को अधिक सुगम और विविध कार्यबल की जरूरतों के अनुरूप बना रहा है, जिसमें विशेष रूप से मोबाइल और अनौपचारिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं।
दूसरी पैनल चर्चा "श्रम बाजार की बदलती गतिशीलता: पेंशन की भूमिका" पर केंद्रित थी। इसमें बढ़ती गिग इकॉनमी और श्रम गतिशीलता के प्रभावों पर चर्चा की गई। पैनल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह परिवर्तन न केवल पॉलिसी मेकर्स के लिए नए अवसर प्रस्तुत कर रहा है, बल्कि इससे कुछ चुनौतियाँ भी उत्पन्न हो रही हैं, जैसे अनौपचारिक और अस्थायी कार्यबल के लिए दीर्घकालिक पेंशन सुरक्षा सुनिश्चित करना। इस चर्चा ने नीति निर्माताओं के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया कि किस तरह से पेंशन योजनाओं को बदलते श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढाला जा सकता है।
एनपीएस दिवस सम्मेलन का समापन इस सहमति के साथ हुआ कि पेंशन प्रणालियों को मजबूत और कुशल बनाए रखने के लिए नीतिगत पहलों की आवश्यकता है, जो डिजिटल इनोवेशन को समावेशी विकास रणनीतियों के साथ एकीकृत करें। इन पहलों का उद्देश्य वृद्ध लोगों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि भारत की पेंशन प्रणाली अधिक व्यापक और प्रभावी हो सके।
चर्चाओं में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि पेंशन नीतियों में लैंगिक समानता का ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों के योगदान को भी महत्व दिया गया, जो वैल्यू बढ़ाने और पेंशन योजनाओं को व्यापक बनाने में सहायक हो सकता है। 
एनपीएस दिवस सम्मेलन का आयोजन पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा किया गया, जो देश में एक सुरक्षित और न्यायसंगत पेंशन प्रणाली के निर्माण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दोहराता है। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय आबादी के सभी वर्गों की पेंशन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रभावी समाधान प्रदान करना है।
सम्मेलन में 250 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें उद्योग जगत के विशेषज्ञ, वित्तीय संस्थान, और अन्य महत्वपूर्ण हितधारक शामिल थे। इसका मुख्य ध्यान राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को और अधिक सुलभ और सुरक्षित बनाने पर था ताकि सभी आर्थिक वर्गों के लोग अपनी वृद्धावस्था के लिए सुरक्षित पेंशन योजना का लाभ उठा सकें।PO

 

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04 Oct 2024 By दैनिक जागरण

PFRDA की खास पहल, पेंशन परिदृश्य में परिवर्तन’ विषय पर किया सम्मेलन

Jagran, Desk

पीएफआरडीए ने अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर इसके बारे में जागरूकता बढ़ाने का काम कर रहा है। यह दिन अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के साथ ही आता है, जो विश्व स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित करने के लिए समर्पित दिन है। एनपीएस दिवस मनाकर, पीएफआरडीए का उद्देश्य भारतीय नागरिकों में वित्तीय आत्मनिर्भरता की संस्कृति को बढ़ावा देना है, तथा यह सुनिश्चित करना है कि वे सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक और स्वतंत्र जीवन जी सकें।
एक पहल के रूप में, पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने 1 अक्टूबर, 2024 को होटल द अशोक, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में एनपीएस दिवस सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन का विषय था ‘सुरक्षित सेवानिवृत्ति: भारत के पेंशन परिदृश्य में परिवर्तन’, जिसमें प्रतिष्ठित पॉलिसीमेकर्स, फाईनेंशियल एक्सपर्ट और इंडस्ट्री के लीडर भारत में पेंशन के भविष्य पर विशेष रूप से उभरते श्रम बाजार की गतिशीलता और डिजिटलीकरण के संदर्भ में चर्चा करने के लिए एक साथ आए । 

कार्यक्रम की शुरुआत पीएफआरडीए की पूर्णकालिक सदस्य (इकोनॉमिक्स) सुश्री ममता शंकर के स्वागत भाषण से हुई। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की वृद्ध होती आबादी के वित्तीय कल्याण को सुनिश्चित करने में पेंशन की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा हाल ही में शुरू की गई विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया, जो देश की पेंशन प्रणाली को सुदृढ़ और समावेशी बनाने के प्रयासों का हिस्सा हैं।
इसके बाद, पीएफआरडीए के अध्यक्ष डॉ. दीपक मोहंती ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने भारत की पेंशन प्रणाली में चल रहे परिवर्तनों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान परिदृश्य में एक अधिक समावेशी और सरल पेंशन ढांचे की आवश्यकता है, जो विशेष रूप से श्रम बाजार की गतिशीलता और गिग इकॉनमी के संदर्भ में सभी नागरिकों की जरूरतों को पूरा कर सके।
डॉ. मोहंती ने यह भी जोर दिया कि पेंशन ढांचे को आधुनिक तकनीकी के साथ एकीकृत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे पेंशन प्रणाली डिजिटल युग में अधिक सुलभ, कुशल, और सुरक्षित बन सकेगी, जिससे न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण और असंगठित क्षेत्र के लोग भी पेंशन योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी अनंत नागेश्वरन ने एनपीएस दिवस सम्मेलन में अपने विशेष संबोधन के दौरान पेंशन के लिए शुरुआती वर्षों से बचत के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पेंशन क्षेत्र की उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद, भारत की कुल जनसंख्या का केवल लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा ही राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के अंतर्गत आता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कुशल पेंशन प्रणाली के लिए संतुलित परिसंपत्ति-देयता ढांचे की आवश्यकता होती है, ताकि इसमें निवेश की गई राशि और भविष्य में दी जाने वाली पेंशन देनदारियों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
इसके बाद, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल ने अपने मुख्य भाषण में बताया कि भारत के विभिन्न राज्यों में बुजुर्गों की स्थिति समान नहीं है और युवा पीढ़ी में तात्कालिक संतुष्टि पर आधारित धन की सोच को बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने बुजुर्गों की लैंगिक विविधता पर प्रकाश डाला, जिसमें महिलाओं का अनुपात अधिक है, और यह बताया कि विधवा महिलाओं की संख्या 54% है। उन्होंने यह भी कहा कि 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के मार्ग पर होगा, और तब तक जीवन प्रत्याशा बढ़कर 85 वर्ष तक पहुंचने की संभावना है, जो नई चुनौतियाँ उत्पन्न करेगी।
डॉ. पॉल ने ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों तक पहुँचने और एनपीएस और एपीवाई के बारे में जागरूकता फैलाने में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नीति निर्माण के दौरान स्वास्थ्य, सामाजिक-आर्थिक कल्याण और डिजिटल समावेशन के पहलुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। यह पहल देश में एक समग्र और समावेशी पेंशन प्रणाली के विकास में मदद करेगी, जो सभी आयु और वर्गों के लोगों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखेगी।
सम्मेलन के दौरान पेंशन बुलेटिन का हिंदी संस्करण जारी किया गया। इस बुलेटिन में पेंशन नियोजन के विभिन्न पहलुओं और पेंशन क्षेत्र से जुड़ी नवीनतम जानकारियाँ शामिल हैं।
सम्मेलन के दौरान, पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने अपने निरंतर प्रयासों के तहत निवेश विकल्पों का विस्तार करने के उद्देश्य से एक नया बैलेंस्ड लाइफ साइकिल फंड (BLC) पेश किया। यह नया फंड विशेष रूप से विकास परिसंपत्तियों, खासकर इक्विटी निवेशों पर केंद्रित है, जिससे राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) के ग्राहकों को सरल और उच्च रिटर्न की संभावनाएँ प्रदान की जा सकें।
BLC के तहत इक्विटी आवंटन की संरचना मौजूदा लाइफ साइकिल फंड 50 (LC 50) से मिलती-जुलती है, जिसमें इक्विटी की सीमा 50% रखी गई है। हालांकि, BLC में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि इक्विटी आवंटन की टेपरिंग (धीरे-धीरे कमी) 35 की बजाय 45 साल की उम्र में शुरू होती है। इसका उद्देश्य ग्राहकों को लंबी अवधि तक इक्विटी में अधिक निवेश बनाए रखने का अवसर देना है, जिससे उनके रिटर्न की संभावना बेहतर हो सके।
यह पहल एनपीएस ग्राहकों के लिए निवेश प्रक्रिया को अधिक लचीला और लाभकारी बनाने की दिशा में एक और कदम है, जो उनकी वित्तीय सुरक्षा और दीर्घकालिक पेंशन उद्देश्यों को पूरा करने में सहायक होगी।
इन भाषणों के बाद, सम्मेलन में दो महत्वपूर्ण पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं। पहली पैनल चर्चा, जिसका विषय "डिजिटल युग में पेंशन की पुनर्कल्पना" था, में इस बात पर गहन चर्चा की गई कि डिजिटल टेक्नोलॉजी किस प्रकार से पेंशन प्रणालियों को नया रूप दे रही हैं। चर्चा में यह बात सामने आई कि डिजिटल इनोवेशन पेंशन योजनाओं को अधिक सुगम और विविध कार्यबल की जरूरतों के अनुरूप बना रहा है, जिसमें विशेष रूप से मोबाइल और अनौपचारिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं।
दूसरी पैनल चर्चा "श्रम बाजार की बदलती गतिशीलता: पेंशन की भूमिका" पर केंद्रित थी। इसमें बढ़ती गिग इकॉनमी और श्रम गतिशीलता के प्रभावों पर चर्चा की गई। पैनल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह परिवर्तन न केवल पॉलिसी मेकर्स के लिए नए अवसर प्रस्तुत कर रहा है, बल्कि इससे कुछ चुनौतियाँ भी उत्पन्न हो रही हैं, जैसे अनौपचारिक और अस्थायी कार्यबल के लिए दीर्घकालिक पेंशन सुरक्षा सुनिश्चित करना। इस चर्चा ने नीति निर्माताओं के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया कि किस तरह से पेंशन योजनाओं को बदलते श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढाला जा सकता है।
एनपीएस दिवस सम्मेलन का समापन इस सहमति के साथ हुआ कि पेंशन प्रणालियों को मजबूत और कुशल बनाए रखने के लिए नीतिगत पहलों की आवश्यकता है, जो डिजिटल इनोवेशन को समावेशी विकास रणनीतियों के साथ एकीकृत करें। इन पहलों का उद्देश्य वृद्ध लोगों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि भारत की पेंशन प्रणाली अधिक व्यापक और प्रभावी हो सके।
चर्चाओं में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि पेंशन नीतियों में लैंगिक समानता का ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों के योगदान को भी महत्व दिया गया, जो वैल्यू बढ़ाने और पेंशन योजनाओं को व्यापक बनाने में सहायक हो सकता है। 
एनपीएस दिवस सम्मेलन का आयोजन पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा किया गया, जो देश में एक सुरक्षित और न्यायसंगत पेंशन प्रणाली के निर्माण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दोहराता है। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय आबादी के सभी वर्गों की पेंशन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रभावी समाधान प्रदान करना है।
सम्मेलन में 250 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें उद्योग जगत के विशेषज्ञ, वित्तीय संस्थान, और अन्य महत्वपूर्ण हितधारक शामिल थे। इसका मुख्य ध्यान राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को और अधिक सुलभ और सुरक्षित बनाने पर था ताकि सभी आर्थिक वर्गों के लोग अपनी वृद्धावस्था के लिए सुरक्षित पेंशन योजना का लाभ उठा सकें।PO

 

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pfrdas-special-initiative-know-why-nps-day-is-celebrated-how/article-650

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